जीविका निधि से महिलाओं को मिलेगा ऋण

जीविका जिला कार्यालय के सभागार में बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड की ऋण नीति पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया.
शेखपुरा. जीविका जिला कार्यालय के सभागार में बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड की ऋण नीति पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यशाला में जीविका के प्रखंड तथा जिला स्तरीय कर्मियों के साथ-साथ संकुल संघ की अध्यक्ष दीदियों को ऋण, पात्रता मानदंड और डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी दी गई.जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक संतोष कुमार सोनू, सामुदायिक वित्त प्रबंधक धीरेन्द्र साहू, रोजगार प्रबंधक अजय रंजन कुमार, संकुल संघ की अध्यक्ष दीदियों एवं अन्य ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का विधिवत् उद्घाटन किया. इस संबंध में जानकारी देते हुए जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक संतोष कुमार सोनू ने बताया कि जीविका निधि का उद्देश्य सामुदायिक संगठनों से जुड़े परिवारों को रोजगारपरख गतिविधियों को बढ़ाने हेतु तकनीकी रूप से वितीय सेवाएं प्रदान करना एवं उनके सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए प्रयासरत रहना है. कार्यशाला में जीविका निधि के संचालन और लाभों पर विस्तृत जानकारी दी गई. राज्य स्त्तर पर बिहार सहकारी सोसायटी अधिनियम 1935 के अधीन राज्य स्त्तर पर बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संध लिमिटेड, पटना के नाम से इसका निबंधन 29 मई 2025 को किया गया है. 02 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करकमलों द्वारा जीविका निधि का लाइव प्रसारण के माध्यम से विधिवत उद्घाटन किया गया. माइक्रो फाइनेंस संस्थान पर महिलाओं की निर्भरता होगी कम जीविका निधि की आवश्यकता माइक्रो फाइनेंस संस्थान पर महिलाओं की निर्भरता को कैसे कम किया जा सकता है, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने के साथ-साथ माइक्रो फाइनेंस संस्थानों पर उनकी निर्भरता भी बढ़ी है, क्योंकि वे शिक्षा, शादी, छोटे-छोटे व्यवसाय, घरेलू उद्योग और स्व-रोज़गार कार्यों के लिए ऋण लेती हैं. बिना सोचे समझे अत्यधिक ऋण पर निर्भरता कभी-कभी ब्याज के बोझ, ऋण चक्र और आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकती है. इसलिए महिलाओं की इन संस्थानों पर निर्भरता कम करने के कई प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं. इस कार्यशाला के दौरान जीविका के सामुदायिक वित्त प्रबंधक धीरेन्द्र साहू ने बताया कि गरीब परिवारों, विशेषकर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आजीविका संवर्धन हेतु सुरक्षित और मानक ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही जीविका निधि की शुरुआत की गई है. ऋण की उपलब्धता की रूपरेखा. अल्पकालिक ऋण 15,000 तक अधिकतम 12 माह सूक्ष्म ऋण 15,001 से 75,000 तक – अधिकतम 24 माह लघु ऋण – 75,001 से 2,00,000 तक-अधिकतम 36 माह सभी ऋण पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर लागू होगी. इसके अलावा किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा.सभी प्रक्रियाएं डिजिटल मोड में होंगी. आवेदन से लेकर वितरण और वसूली तक की प्रक्रिया जीविका निधि ऐप के माध्यम से होगी.ऋण के लिए 18 से 65 वर्ष आयु के समूह सदस्य को लोकओएस से वेरीफाई करते हुए ऋण उपलब्ध कराया जाएगा. एनपीए खाते वाले समूह सदस्य और सरकारी कर्मचारी ऋण के पात्र नहीं होंगे.जीविका निधि के माध्यम से महिलाओं को सरल ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध होगा, जिससे वे छोटे व्यवसाय, उत्पादन इकाइयां और अन्य आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ा सकेंगी. यह पहल ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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