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महाकवि जयशंकर प्रसाद स्मृति भवन में नवनिर्मित प्रतिमा का हुआ अनावरण

Updated at : 30 Jan 2026 9:43 PM (IST)
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महाकवि जयशंकर प्रसाद स्मृति भवन में नवनिर्मित प्रतिमा का हुआ अनावरण

कान्यकुब्ज वैश्य हलवाई महासभा द्वारा शुक्रवार को राजगीर के महाकवि जयशंकर प्रसाद स्मृति भवन में महाकवि जयशंकर प्रसाद की 137वीं जयंती सह मिलन समारोह का आयोजन किया गया.

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राजगीर. कान्यकुब्ज वैश्य हलवाई महासभा द्वारा शुक्रवार को राजगीर के महाकवि जयशंकर प्रसाद स्मृति भवन में महाकवि जयशंकर प्रसाद की 137वीं जयंती सह मिलन समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में साहित्य, समाज और संस्कृति से जुड़े गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही. समारोह का उद्घाटन गया जी जिला परिषद अध्यक्षा नैना कुमारी, वारिसलीगंज नगर परिषद अध्यक्षा रेखा देवी, बिहार हलवाई महासभा के पूर्व अध्यक्ष बीरेंद्र कुमार, जयंती समारोह के अध्यक्ष मनोज कुमार, सचिव महेंद्र प्रसाद गुप्ता, संयोजक रणविजय कुमार एवं जितेंद्र गुप्ता द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस अवसर पर स्मृति भवन परिसर में महाकवि जयशंकर प्रसाद की नवनिर्मित प्रतिमा का अनावरण भी किया गया. प्रतिमा देख उपस्थित साहित्यप्रेमियों में विशेष उत्साह देखा गया. मुख्य अतिथि सह गया जी जिला परिषद अध्यक्षा नैना कुमारी ने कहा कि महाकवि जयशंकर प्रसाद ने अपने साहित्य के माध्यम से भारतीय समाज, संस्कृति और जीवन के गहन पक्षों को उजागर किया है. उनका साहित्य आज भी न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए, बल्कि समकालीन समाज के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है. नई पीढ़ी को दिशा देने का कार्य करता है। विशिष्ट अतिथि सह वारिसलीगंज नगर परिषद अध्यक्षा रेखा देवी ने कहा कि जयशंकर प्रसाद के साहित्य में नारी चेतना की गहराई स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. उन्होंने नारी को समाज की सशक्त आधारशिला के रूप में प्रस्तुत कर महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया है. वहीं डॉ (प्रो) ऋचा योगमयी ने कहा कि प्रसाद जी की लेखनी में नारी के कर्तव्य, जिम्मेदारियां और आत्मनिर्भरता का सशक्त चित्रण मिलता है. आज जब समाज में महिलाओं के अधिकार और लिंग समानता की चर्चा हो रही है, तब प्रसाद जी की रचनाएं आधुनिक सोच को मजबूती प्रदान करती हैं. कार्यक्रम में अंजनी कुमार साहा ने महाकवि जयशंकर प्रसाद की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छायावाद के प्रमुख स्तंभों में से एक प्रसाद जी के जीवन और कृतित्व में गहरा संतुलन, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्य झलकते हैं. उनका साहित्य प्रेम, संघर्ष, समाज और संस्कृति के मूल्यों को समेटे हुए है. वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देता है. कार्यक्रम को मुकुल मोहन गुप्ता और पप्पू कुमार ने भी संबोधित किया. समारोह के दौरान आगंतुकों एवं अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया. छोटे-छोटे बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर माहौल को जीवंत बना दिया. कार्यक्रम में बाबा जसवीर सिंह, कोषाध्यक्ष मनोज गुप्ता, श्रवण कुमार, वार्ड पार्षद कुमकुम गुप्ता, सरपंच ऊषा देवी, विनय कुमार गुप्ता, राजीव कुमार, चंदन कुमार गुप्ता, सुनील चंद्रा, अजय कुमार गुप्ता, सेवानिवृत्त शिक्षक सुनील कुमार, विकास गुप्ता, अक्षय गुप्ता, अर्जुन कुमार, रंजीत कुमार गुप्ता, योगेश गुप्ता, संजय कुमार सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे.

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AMLESH PRASAD

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By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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