सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
Updated at : 18 Feb 2025 10:31 PM (IST)
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शहर के पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को किया गया. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र- छात्राओं के अलावे शिक्षकों भी शामिल हुए.
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राजगीर.
शहर के पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को किया गया. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र- छात्राओं के अलावे शिक्षकों भी शामिल हुए. इस परिचर्चा मगध विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ साइकॉलजी के प्रो डॉ रविंद्र कुमार सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया बहुत तेजी से फैल रहा है. इससे लाभ है तो हानि भी कम नहीं है. उन्होंने बताया कि बच्चों द्वारा ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से, ऑनलाइन गेम या ज्यादा स्क्रीन पर समय देने से डोपामाइन नामक द्रव्य उत्पन्न होता है, जो धूम्रपान के निकोटिन से भी ज्यादा घातक होता है. छात्रों को सोशल मीडिया के संदेशों, सूचनाओं से ज्यादा तथ्यों पर विश्वास करना चाहिए. डॉ सिंह ने छात्रों के अनेकानेक जिज्ञासाओं को भी अपने वक्तव्य से जागरूक किया. उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक तनाव में रहने के कारण लोग मानसिक रोग का शिकार हो रहे हैं. इससे हमारे शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. डिप्रेशन जैसी अनेक बीमारियों से ग्रसित होने का खतरा बना रहता है. प्राचार्य विवेक किशोर ने कहा कि पीएम श्री योजना के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य का लाभ और जागरूकता लाने हेतु विद्यालय स्तर पर इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. उनके द्वारा सोशल मीडिया के लाभ और हानि की चर्चा करते हुए कहा गया कि महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने, दोस्तों के साथ संवाद करने और लोगों के एक समूह से जुड़कर अपने सामाजिक दायरे का विस्तार करने की क्षमता इसमें है. सोशल मीडिया के अधिक उपयोग की लत, अकेलापन, अवसाद, आत्म-सम्मान में कमी आदि शामिल है. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग सामाजिक व्यवहार को बदल रहा है. जो लोग सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग करते हैं, जिन्हें प्रतिदिन औसतन दो घंटे से अधिक उपयोग के रूप में परिभाषित किया जाता है. उनमें सामाजिक अलगाव की रिपोर्ट करने की संभावना उन लोगों की तुलना में दोगुनी है, जो प्रतिदिन आधे घंटे से कम सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं. सोशल मीडिया का अधिक उपयोग करने से अवसाद के लक्षण दिखने की संभावना काफी अधिक होती है. सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने से आत्म-सम्मान कम होता है. प्राचार्य ने कहा कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से आपसी रिश्ते कमजोर हो जाते हैं. सोशल मीडिया पर अवास्तविक चित्रणों के लगातार संपर्क में आने से गलत धारणा बनती है. प्राचार्य द्वारा अतिथि डॉ रविंद्र कुमार सिंह का पुष्य गुच्छ और अंगवस्त्र से स्वागत किया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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