अब जूस के लिए भी नासिक, झारखंड और छत्तीसगढ़ से आते हैं गन्ने

Updated at : 28 Apr 2024 9:40 PM (IST)
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अब जूस के लिए भी नासिक, झारखंड और छत्तीसगढ़ से आते हैं गन्ने

किसानों को गन्ना की खेती से लगातार मोहभंग होती जा रही है. हालांकि जैसे-जैसे तापमान में बढ़ोत्तरी हो रही है, वैसे-वैसे गन्ना की मांग में बढ़ोत्तरी होने लगाती है.

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बिहारशरीफ. किसानों को गन्ना की खेती से लगातार मोहभंग होती जा रही है. हालांकि जैसे-जैसे तापमान में बढ़ोत्तरी हो रही है, वैसे-वैसे गन्ना की मांग में बढ़ोत्तरी होने लगाती है. शहर में प्रतिदिन औसतन अन्य प्रदेशों से 50 से 80 क्विंटल गन्ना सिर्फ जूस के लिए आ रहे हैं. 20 से 30 वर्ष तक पूर्व तक जिले में गन्ना से गुड़, मीठी आपूर्ति के दृष्टिकोण से आत्मनिर्भर हुआ करता था, लेकिन आज जूस के लिए भी नासिक, झारखंड और छत्तीसगढ़ के गन्ने आ रहे हैं. नतीजतन पं. बगाल, यूपी, मध्य प्रदेश आदि प्रदेशों से गुड़ और चीनी पर जिलेवासी की निर्भरता दिन-प्रति-दिन बढ़ती जा रही है. महंगी खाद-बीज, मजदूर की समस्या, नीचे खिसकते भू-जलस्तर समेत 10 से 14 माह में गन्ना (केतारी) की फसल तैयार होने के कारण यहां के किसानों के लिए अब यह नकदी खेती नहीं रही. दो से तीन दशक तक जिले में कुल खेती योग्य भूमि के एक से दो फीसदी में केतारी (गन्ना) को नकदी फसल के रूप में किसान लगाया करते थे. यानि 17 हजार 600 बीघा में होने वाली गन्ना की खेती वर्तमान में सिमट कर 90 से 98 बीघा तक पहुंच गई है. करीब 98 बीघा में गन्ने की खेती होती है, जो छठ और रस में खपत हो जाती है. इससे आम दिनों के लिए मीठा और गड़ का निर्माण नहीं होता है. अब जिले के किसान नकदी फसल के रूप में गन्ना के जगह सब्जी और फल की खेती की ओर तेजी से रुख कर लिया है. हालांकि गन्ना और गन्ना से तैयार उत्पाद की मांग नित्य प्रतिदिन बढ़ रही है. गन्ना और गन्ना से तैयार उत्पाद के नियमित सेवन से कई बीमारियों से मुक्ति और स्वास्थ्य काया रहती है. दस प्रखंड में ही होती है गन्ना की छिटपुट खेती

वर्तमान में बीस प्रखंडों में से सिर्फ दस प्रखंडों में ही छिटपुट गन्ने की खेती हो रही है. सबसे अधिक नूरसराय में 30 से 40 बीघा में गन्ने की खेती हो रही है. नूरसराय प्रखंड के जमुनापुर, परिऔना, मेयार गांव के किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं. इसी प्रकार इस्लामपुर के संडा समेत एक दर्जन गांव में, थरथरी के करियाना, भत्तहर, छरियारी गांव में, गिरियक के चोरसुआ, बकरा और पावापुरी गांव में गन्ने की छिटपुट खेती होती है. करायपरसुराय के चंदकुरा एवं राजगीर प्रखंड के लोदीपुर, छबीलापुर व बनौसा गांव के किसान कठ्ठा दो कट्ठा में गन्ने की फसल लगाते हैं. हिलसा के मुराढ़ी, सबनहुआ गांव में व नगरनौसा के बेलदा, सरैया, सकरौला और अकैड़ गांव में एवं चंडी प्रखंड के धर्मपुरा, तीना लोदीपुर, हसनी, गगनपुरा व सिलामा के किसान गन्ने की खेती करते हैं. इन क्षेत्रों के अधिकांश किसान छठ पूजा में गन्ने के रस व मीठा का उपयोग करने के उद्देश्य से खेती करते हैं.

बाहर से प्रतिदिन आ रहे 50 से 80 क्विंटल गन्ना

शहर के चौक-चौराहों व सड़कों के किनारे गर्मी आते ही गन्ने की जूस की खूब बिक्री होती है. प्रतिदिन गन्ना रस की मांग बढ़ रही है, लेकिन जिले में गन्ने की उपज लगातार कम होती जा रही है. नतीजतन छत्तीसगढ़, झारखंड और नासिक से वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 50 से 80 क्विंटल गन्ना व्यापारी मंगाकर जूस विक्रेताओं को आपूर्ति कराते हैं. अस्पताल चौक के गन्ना जूस विक्रेता अनिल कुमार बताते हैं कि नासिक के गन्ना सबसे अधिक मीठा होता है और उससे रस भी अधिक निकलती है.

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