अवैध निकासी के मामले में मुखिया ने खुद को बताया निर्दोष

Updated at : 09 May 2024 9:57 PM (IST)
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अवैध निकासी के मामले में मुखिया ने खुद को बताया निर्दोष

जिले के बरबीघा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत मालदह पंचायत में 11 लाख रुपये की अवैध निकासी के मामले में अब मुखिया ने भी अपना खुलकर पक्ष रखा है.

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बरबीघा. जिले के बरबीघा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत मालदह पंचायत में 11 लाख रुपये की अवैध निकासी के मामले में अब मुखिया ने भी अपना खुलकर पक्ष रखा है. इस मामले में पूर्व पंचायत सचिव ताहिर इमाम द्वारा अवैध निकासी को लेकर अपना कबूलनामा और रुपया वापस लौटाने संबंधी एक शपथ पत्र भी वायरल किया गया है. एक 1000 रुपए के स्टांप पेपर पर तैयार किए गए शपथ पत्र में साफ-साफ लिखा हुआ है कि ताहिर इमाम ने मुखिया को झांसे में लेकर कुल नौ ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर करवा लिया था.धरातल पर योजनाओं से संबंधित कोई भी कार्य कराए बगैर ही ताहिर इमाम द्वारा हस्ताक्षर युक्त चेक से लगभग 11 लाख रुपए की निकासी कर ली गई. शपथ पत्र में यह भी लिखा गया है की निकासी की गई राशि को ताहिर इमाम ने अपने निजी कार्य में खर्च कर दिया. मुखिया अनामिका कुमारी और उनके पति सुधीर कुमार ने बताया कि जैसे ही मुझे अवैध निकासी के बारे में जानकारी मिली मैंने तुरंत पैसा लौटाने के लिए ताहिर ईमाम पर दबाव बनाना शुरू कर दिया.इसके बाद 5 जनवरी को उसने 1000 के स्टांप पेपर पर अवैध रूप से निकाले गए पैसे को 25 दिन के अंदर लौटने की बात स्वीकार की थी.तय समय के बाद जब ताहिर इमाम ने पैसा नहीं लौटाया तब इस बात की सूचना प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी को भी दिया गया था.कई बार प्रयास करने के बाद भी ताहिर इमाम के द्वारा अवैध रूप से निकाले गए पैसे को लौटाया नहीं जा सका है.हालांकि सवाल यह भी खड़ा होता है कि योजना का कार्य संपन्न कराए बगैर ही मुखिया ने आखिर किसके दबाव में ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर कर दिया था?गौरतलब हो कि वितीय वर्ष 2022-23 में बरबीघा प्रखंड के मालदह पंचायत में कुल दो योजना खोली गई थी.योजना संख्या 01/2022-23 तथा 02/2022-23 के लिए क्रमशः 454000 और 316000 की राशि प्राक्कलित की गई थी. लेकिन दोनों योजना का धरातल पर से कोई लेना-देना नहीं है. यही नहीं पंचायत सचिव और मुखिया के हस्ताक्षर से दोनों योजनाओं को मिलाकर कल 770800 रुपये की राशि के विरुद्ध जाकर उससे अधिक 11,15,000 रुपए की की निकासी कर ली गई थी.नियमानुसार दोनों योजनाओं में (7500 7500) यानी कि कुल 15000 की निकासी अग्रिम के रूप में निकासी की जा सकती थी. शेष राशि की निकासी मापीपुस्त और अभिश्रव के आधार पर ही किया जा सकता था. लेकिन दोनों के द्वारा नियम के विरुद्ध जाते हुए लगभग 70 गुना अधिक राशि की निकासी ली गई. इस मामले का उदभेदन होने के बाद जिले में हलचल मची हुई है.

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