राजगीर मलमास मेला: बुधवार को पुरुषोत्तम एकादशी पर होगा पहला ‘शाही स्नान’, पवित्र कुंडों में आस्था की डुबकी लगाएंगे श्रद्धालु

Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 25 May 2026 5:46 PM

विज्ञापन

सांकेतिक तस्वीर

Malmas Mela 2026: राजगीर के राजकीय मलमास मेला में बुधवार को पुरुषोत्तम एकादशी के अवसर पर पहला शाही स्नान आयोजित होगा. इस पावन मौके पर ब्रह्मकुंड सहित विभिन्न गर्मजल कुंडों में लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है, जिसे लेकर संत-महात्माओं और जिला प्रशासन द्वारा विशेष तैयारियां की गई हैं.

विज्ञापन

Malmas Mela 2026(रामविलास): धर्मनगरी राजगीर बुधवार को पुरुषोत्तम एकादशी के पावन अवसर पर पूरी तरह से भक्तिरस में डूब जाएगी. ऐतिहासिक राजकीय मलमास मेला में इस दिन आस्था का विराट संगम देखने को मिलेगा. देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालु मोक्ष, आत्मशुद्धि और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्ति की कामना लेकर राजगीर के पवित्र गर्मजल कुंडों एवं पुण्य सलिला धाराओं में स्नान करेंगे. धार्मिक दृष्टिकोण से पुरुषोत्तम एकादशी को मलमास मेला का पहला ‘शाही स्नान’ भी माना जाता है. इस विशेष तिथि को लेकर मेला क्षेत्र के विभिन्न धर्मपीठों, अखाड़ों और आध्यात्मिक शिविरों में विशेष तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.

अक्षय पुण्य की होती है प्राप्ति, ‘हरि बोल’ के जयघोष से गूंजेगी धर्मनगरी

जगतगुरु विश्वकर्मा शंकराचार्य स्वामी दिलीप योगी जी महाराज ने इस तिथि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अधिकमास (मलमास) में पड़ने वाली पुरुषोत्तम एकादशी का सनातन धर्म में अत्यंत विशेष महत्व है. हमारे धर्मग्रंथों में स्पष्ट वर्णित है कि इस दिन भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम स्वरूप की आराधना, व्रत, दान और पवित्र स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. उन्होंने कहा कि राजगीर में आयोजित राजकीय मलमास मेला के दौरान पुरुषोत्तम एकादशी श्रद्धा, तप और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत पर्व बन जाता है. बुधवार की अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें ब्रह्मकुंड, सप्तधारा, सूर्यकुंड समेत अन्य गर्मजल कुंडों के तट पर उमड़ने लगेंगी. श्रद्धालु ‘हरि बोल’ और ‘जय श्री विष्णु’ के जयघोष के बीच पवित्र जल में डुबकी लगाकर सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति की कामना करेंगे. मान्यता है कि राजगीर के गर्मजल कुंड प्राचीन ऋषि-मुनियों की तपोभूमि से जुड़े हैं, जहां स्नान करने से तन, मन और आत्मा की शुद्धि होती है.

जन्म-जन्मांतर के कष्ट होते हैं दूर, भक्तिमय माहौल में सराबोर हुई राजगीर की वादियां

वहीं, पीठाधीश्वर स्वामी चिदात्मन जी महाराज उर्फ फलाहारी बाबा ने बताया कि पुरुषोत्तम एकादशी पर राजगीर के इन ऐतिहासिक व औषधीय गुणों से भरपूर गर्मजल कुंडों में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के कष्ट दूर होते हैं. इसी अटूट आस्था के साथ दूर-दराज से लाखों श्रद्धालु राजगीर पहुंच रहे हैं. वर्तमान में पूरा मेला क्षेत्र पूरी तरह से भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो चुका है. प्रमुख मंदिरों और आध्यात्मिक शिविरों में भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम पाठ और विशेष पूजा-अर्चना का क्रम लगातार जारी है. श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर बड़े पैमाने पर दान-पुण्य भी कर रहे हैं. राजगीर की वादियों में गूंजती शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रहे हैं.

इसे भी पढ़ें: पटना जू की जमीन पर बढ़ सकता है एयरपोर्ट का रनवे, नया प्लान तैयार, जल्द शुरू होगा सर्वे

विज्ञापन
Aditya Kumar Ravi

लेखक के बारे में

By Aditya Kumar Ravi

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन