कारगिल के अमर शहीद हरदेव प्रसाद सिंह : नालंदा की मिट्टी का वह वीर सपूत जिनकी शहादत को नहीं भूलता बिहार

कारगिल विजय दिवस विशेष | Prabhat Khabar Network
नालंदा जिले के वीर सपूत हरदेव प्रसाद सिंह ने कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दी. उनकी शहादत को पूरा जिला आज भी याद करता है. जानें उनकी असाधारण जीवन यात्रा.
कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उन वीर सपूतों के अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को नमन करने का दिन है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए.
26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल की दुर्गम चोटियों पर विजय का परचम फहराकर दुनिया को अपनी सैन्य शक्ति का परिचय दिया था. इस ऐतिहासिक विजय में नालंदा जिले के वीर सपूत शहीद सिपाही हरदेव प्रसाद सिंह का योगदान हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा.
27 वर्ष बाद भी हरदेव प्रसाद सिंह केवल एक नाम नहीं, बल्कि नालंदा की पहचान, गौरव और देशभक्ति की प्रेरणा बन चुके हैं. जिले के मुख्यालय से लेकर गांव तक उनके नाम पर कई चौक-चौराहों, सड़कों और सरकारी परिसरों का नामकरण किया गया है.
बिहारशरीफ कलेक्ट्रेट परिसर के सभागार का नाम भी उनके सम्मान में रखा गया है. हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस और 13 जून को उनके शहादत दिवस पर पूरा जिला भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है.
साधारण किसान परिवार से निकला असाधारण वीर
नालंदा जिले के एकंगरसराय प्रखंड के कुकुरबर गांव में जन्मे हरदेव प्रसाद सिंह का बचपन सामान्य ग्रामीण परिवेश में बीता. परिवार आर्थिक रूप से साधारण था, लेकिन संस्कार असाधारण थे. बचपन से ही उनमें अनुशासन, साहस और देश सेवा का जज़्बा दिखाई देता था. युवावस्था में उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती होकर मातृभूमि की रक्षा का संकल्प लिया और पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया.
संयुक्त राष्ट्र के सोमालिया मिशन में भी निभाई थी अहम जिम्मेदारी
कारगिल युद्ध से पहले वर्ष 1994 में हरदेव प्रसाद सिंह को संयुक्त राष्ट्र के सोमालिया शांति मिशन में सेवा देने का अवसर मिला था. वहां उन्होंने भारतीय सेना का गौरव बढ़ाया और अपने उत्कृष्ट कार्यों से अधिकारियों की प्रशंसा प्राप्त की. यह उनके सैन्य कौशल, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का प्रत्यक्ष प्रमाण था.
जब कारगिल की बर्फीली चोटियों पर गूंजा भारत माता की जय
साल 1999 में पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों ने कारगिल, द्रास और बटालिक सेक्टर की ऊंची चोटियों पर अवैध कब्जा जमा लिया था. भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन विजय' के तहत दुश्मनों को खदेड़ने का अभियान शुरू किया. दुर्गम पहाड़ियां, माइनस तापमान, लगातार हो रही गोलाबारी और ऑक्सीजन की कमी जैसी कठिन परिस्थितियों में भारतीय जवानों ने अद्वितीय साहस का परिचय दिया.
इसी अभियान के दौरान हरदेव प्रसाद सिंह ने दुश्मनों से लोहा लेते हुए मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया. उनकी शहादत भारतीय सेना के इतिहास में अमर गाथा बन गई.
शहादत की खबर से रो पड़ा था पूरा नालंदा
जब हरदेव प्रसाद सिंह के शहीद होने की सूचना उनके पैतृक गांव कुकुरबर पहुंची, तो पूरे गांव और जिले में शोक की लहर दौड़ गई. हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी. अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा था. हर किसी की आंखें नम थीं, लेकिन सीना इस बात से गर्व से चौड़ा था कि गांव का बेटा देश की रक्षा में अमर हो गया.
सरकार की घोषणाएं और वर्तमान स्थिति
शहादत के बाद बिहार सरकार ने उनके सम्मान में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं:
- गांव को आदर्श गांव के रूप में विकसित करना.
- शहीद के नाम पर विद्यालय का नामकरण.
- एकंगरसराय में शहीद स्मारक का निर्माण.
- परिवार को गैस एजेंसी उपलब्ध कराना.
- एक आश्रित को सरकारी नौकरी.
- गांव में सड़क, यात्री शेड और अन्य विकास कार्य कराना.
इन घोषणाओं में से कुछ पर अमल हुआ; परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिली, साथ ही सड़क और कुछ बुनियादी विकास कार्य भी कराए गए. हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि आदर्श गांव, भव्य स्मारक और विद्यालय के नामकरण जैसी कई घोषणाएं आज भी पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी हैं.
जिले के कोने-कोने में जीवित है हरदेव प्रसाद सिंह की स्मृति
नालंदा में शहीद हरदेव प्रसाद सिंह केवल इतिहास का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि जनमानस की भावनाओं में आज भी जीवित हैं. जिले में उनके नाम पर चौक-चौराहे, सड़कें और सरकारी परिसरों का नामकरण किया गया है. बिहारशरीफ कलेक्ट्रेट परिसर का सभागार भी उनके सम्मान में नामित है. यह इस बात का प्रमाण है कि नालंदा अपने इस वीर सपूत को कभी नहीं भूल सकता.
हर साल उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब
हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस और 13 जून को शहादत दिवस पर गांव, प्रखंड और जिला स्तर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पूर्व सैनिक, सामाजिक संगठन, छात्र-छात्राएं और आम नागरिक शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन करते हैं.
इस अवसर पर एक बार फिर यह मांग जोर पकड़ती है कि बिहारशरीफ या एकंगरसराय में शहीद हरदेव प्रसाद सिंह की भव्य प्रतिमा और आधुनिक स्मारक का निर्माण कराया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान से प्रेरणा ले सकें.
युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा नाम
आज जब देशभर के लाखों युवा सेना में भर्ती होकर देश सेवा का सपना देख रहे हैं, तब हरदेव प्रसाद सिंह का जीवन उनके लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है. उन्होंने यह साबित किया कि सीमित संसाधन कभी भी बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकते. अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति ही किसी सैनिक की सबसे बड़ी पहचान होती है.
एक नजर में: शहीद हरदेव प्रसाद सिंह
| विवरण | विवरण जानकारी |
| नाम | शहीद सिपाही हरदेव प्रसाद सिंह |
| पैतृक गांव | कुकुरबर, प्रखंड एकंगरसराय, जिला नालंदा |
| सेवा | भारतीय सेना |
| विशेष दायित्व | संयुक्त राष्ट्र सोमालिया शांति मिशन (1994) |
| शहादत | कारगिल युद्ध, 1999 |
| पहचान | नालंदा जिले के कारगिल युद्ध के अमर शहीद |
| सम्मान | चौक-चौराहों, सरकारी परिसरों तथा कलेक्ट्रेट सभागार का नामकरण |
"शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा."
Also Read : शेखपुरा में पेट्रोल पंप पर लूट, कर्मी से मारपीट कर हथियारबंद बदमाशों ने 2 लाख लूटे, CCTV भी तोड़ा
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










