नवादा: सखी वन स्टॉप सेंटर ने एक साल में 206 मामलों का कराया निपटारा, घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं को मिल रहा सहारा

Author Vishal kumar|Edited by Rajeev Kumar
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पत्र सौंपते हुए

पत्र सौंपते हुए

नवादा का सखी वन स्टॉप सेंटर घरेलू हिंसा और महिला उत्पीड़न के मामलों में अहम भूमिका निभा रहा है. पिछले वर्ष 206 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया, जिससे कई महिलाओं को नया जीवन मिला है.

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Nawada News : महिला एवं बाल विकास निगम द्वारा संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, दहेज हत्या, दूसरी शादी और महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. वर्ष 2025-26 में केंद्र में 188 नए मामले दर्ज किए गए, जबकि पुराने मामलों को मिलाकर कुल 206 मामलों का समझौते और कानूनी परामर्श के माध्यम से निपटारा किया गया. केंद्र में महिलाएं सादे कागज पर आवेदन देकर नि:शुल्क सहायता प्राप्त कर सकती हैं.

समझौते और कानूनी परामर्श से सुलझ रहे विवाद

नवादा सदर प्रखंड कार्यालय परिसर में संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर में घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, दूसरी शादी, पारिवारिक विवाद सहित महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाती है. केंद्र में दोनों पक्षों की काउंसलिंग और कानूनी प्रक्रिया के बाद आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का प्रयास किया जाता है.

पूरी टीम करती है मामलों की काउंसलिंग

वन स्टॉप सेंटर का संचालन महिला एवं बाल विकास निगम के तहत किया जा रहा है. सेंटर मैनेजर राजकुमारी देवी के नेतृत्व में केस वर्कर, परामर्शदाता, पारा लीगल अधिवक्ता, स्वास्थ्यकर्मी तथा अन्य कर्मी मामलों के समाधान में सहयोग करते हैं. शक्ति सदन, सखी निवास और नारी अदालत जैसी संस्थाएं भी सहयोगी भूमिका निभा रही हैं.

181 हेल्पलाइन पर भी मिलती है सहायता

महिलाएं घरेलू हिंसा या प्रताड़ना की स्थिति में महिला हेल्पलाइन 181 पर भी संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकती हैं. इसके बाद संबंधित मामलों को सखी वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता है.

समझौते से फिर बसे कई परिवार

सेंटर ने हाल के वर्षों में कई परिवारों को टूटने से बचाया है. सिरदला, गुनावां, मोगलखार और दादपुर के मामलों में कई दौर की काउंसलिंग के बाद पति-पत्नी के बीच समझौता कराया गया, जिसके बाद परिवार दोबारा साथ रहने लगा.

निपटारे के बाद भी होती है निगरानी

सेंटर मैनेजर राजकुमारी देवी ने बताया कि वर्ष 2025-26 में 188 नए आवेदन प्राप्त हुए और पुराने मामलों को मिलाकर कुल 206 मामलों का निपटारा किया गया. उन्होंने कहा कि समझौते के बाद भी केंद्र की टीम कई महीनों तक संबंधित परिवारों की निगरानी करती है, ताकि महिला सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में जीवनयापन कर सके.


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