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biharsharif news : बांस के पुल से आवागमन कर रहे किसान, जान पर खतरा

Updated at : 10 Aug 2025 9:56 PM (IST)
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biharsharif news : बांस के पुल से आवागमन कर रहे किसान, जान पर खतरा

biharsharif news : चुनावी वर्ष में भी पुल बनाने का वादा नहीं हो सका पूरा

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बरबीघा. जनप्रतिनिधियों के विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जिले के पनयपुर गांव के किसानों की हालात आज भी नहीं बदली है.

गांव से खेतों तक पहुंचने के लिए बीच में बहने वाली नदी पर पक्का पुल बनाने का वादा वर्षों पहले नेताओं ने किया था, लेकिन आज तक वह सपना साकार नहीं हो सका. मजबूरी में ग्रामीण और किसान रोजाना बांस के अस्थायी पुल के सहारे नदी पार करते हैं. यह पुल बरसात में और भी खतरनाक हो जाता है. लेकिन खेतों तक पहुंचने का यही एकमात्र रास्ता होने के कारण लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इसका इस्तेमाल करने को विवश हैं. किसानों का कहना है कि चुनावी वर्ष में भी जनप्रतिनिधियों का वादा अधूरा रह गया. नदी में डूब कर दो बच्चों की मौत हो जाने के बाद भी नेताओं का दिल नही पसीजा. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे.

क्या है मामला

दरअसल जिले के शेखोपुरसराय प्रखंड क्षेत्र का पनयपुर गांव के ठीक बगल से अपर सकरी नहर गुजरती है. गांव मुख्य सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है. किसानों का अधिकांश खेत नदी के उस पार स्थित है. खेतों तरफ सड़क मार्ग से जाने में कई किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता है. इसलिए किसान समय बचाने के लिए नदी पार करके ही खेतों की तरफ जाते हैं. गांव वालों ने आपसी सहयोग से नदी पर एक बांस का पुल बना रखा है. ग्रामीण किसान मदन यादव ने बताया चुनावी वर्ष में हर बार नदी पर छोटा सा पुल बनाने का वादा नेता लोग करते हैं. लेकिन चुनाव खत्म होते ही अपना वादा भूल जाते हैं. किसान उसी बदहाली में सालों जीने विवश रहते हैं.

खरीफ फसल के सीजन में बढ़ जाती है परेशानी

ग्रामीणों ने बताया कि खासकर खरीफ फसल के सीजन में किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. 70% किसान अपनी खेती गांव के पश्चिमी हिस्से में ही करते हैं. खेतों में धान की बुवाई के वक्त नदी में तेज धार बहती रहती है. किसानों को मोरी लेकर जाना हो, मजदूरों को खेतों की तरफ भेजना हो, खाद पानी ले जाना हो, खाने पीने का सामान ले जाना हो, तमाम कार्यों के लिए उसी बांस का पुल का प्रयोग किसान करते हैं. पुल पर करने के दौरान कई बार लोग फिसल कर नदी में गिर जाते हैं. जिन्हें तैरना आता है,वे तो निकल जाते हैं. लेकिन जितने तैरना नहीं आता उनके लिए जानलेवा साबित हो जाता है.

गांव के छात्र भी करते हैं चचरी पुल का इस्तेमाल

ग्रामीणों ने बताया कि नदी पर बने बांस की चचरी का पुल पनयपुर गांव को ओनामा, चमरबीघा, लक्ष्मीपुर जोधनबीघा, अम्बारी जैसे कई गांवों को जोड़ता है. जहां से किसान और अन्य लोग कई तरह के कारोबार करते हैं. इन सभी गांव में घूम के जाने में करीब 10 किलोमीटर से अधिक का सफर तय करना पड़ेगा. यही नही गांव के छात्र हाइस्कूल अम्बरी में पढ़ने हेतु जाने के लिए भी इसी पुल का प्रयोग करते हैं. पिछले वर्ष भी एक छात्र का पैर फिसल कर नदी में गिरने की वजह से डूब कर मौत हो गयी थी. पूर्व में एक वृद्ध की भी जान इसी पुल पर से नदी में गिरने की वजह से हो गयी थी.

हादसों के बाद भी नहीं बन सका पुल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हादसों के बाद कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे थे. सभी ने पुल बनाने की दिशा में उचित पहल करने की बात कही थी. लेकिन आज तक नहर पर पुल नहीं बन सका. जिस वजह से इस बार भी ग्रामीणों को किसी अनहोनी की आशंका सता रही है. ग्रामीण इस दिशा में जिला प्रशासन से भी उचित पहल करने की मांग की है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH KUMAR

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By SHAILESH KUMAR

SHAILESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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