नालंदा का हिरण्य पर्वत उपेक्षा का शिकार, खुले में शौच और गंदगी से बिगड़ा माहौल
हिरण्य पर्वत
Bihar Sahrif News : हिरण्य पर्वत की चमक फीकी: कभी भीड़भाड़ वाला पार्क अब वीरान, असामाजिक गतिविधियों और बदहाल सुविधाओं से जूझता हिरण्य पर्वत.
बिहारशरीफ से कंचन कुमार की रिपोर्ट
Bihar Sharif News : नालंदा जिला मुख्यालय का एकमात्र प्रमुख पर्यटन एवं मनोरंजन स्थल हिरण्य पर्वत इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. कभी सुबह-शाम सैलानियों और मॉर्निंग वॉक करने वालों से गुलजार रहने वाला यह पार्क अब वीरान होता जा रहा है. खराब आधारभूत सुविधाओं, खुले में शौच, बढ़ती गंदगी और असामाजिक गतिविधियों के कारण लोगों ने यहां आना कम कर दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि एक समय ऐसा था जब ठंड के मौसम में हिरण्य पर्वत पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ती थी. सुबह की सैर करने वाली महिलाओं की बड़ी संख्या यहां नियमित रूप से पहुंचती थी, लेकिन अब खुले में शौच करने वालों की बढ़ती संख्या और असुरक्षित माहौल के कारण महिलाओं ने यहां आना लगभग बंद कर दिया है.
2.83 करोड़ रुपये खर्च, फिर भी सुविधाएं ध्वस्त
वर्ष 2015 में लगभग 2 करोड़ 83 लाख रुपये की लागत से हिरण्य पर्वत का सौंदर्यीकरण किया गया था. उस समय पार्क में हाईमास्ट लाइट, एलईडी लाइट, झरने, पेयजल व्यवस्था, शौचालय और अन्य सुविधाएं विकसित की गई थीं. लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण अधिकांश सुविधाएं आज पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं. पार्क में लगाई गई हाईमास्ट लाइट वर्षों से टूटी पड़ी है. अधिकांश एलईडी लाइटों के केवल पोल ही बचे हैं, जबकि बल्ब, प्लेट और तार गायब हो चुके हैं. रात के समय पूरे क्षेत्र में अंधेरा पसरा रहता है, जिससे लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
खुले में शौच और गंदगी ने बिगाड़ी पहचान
हिरण्य पर्वत की सबसे बड़ी समस्या खुले में शौच बन गई है. यहां सुबह और शाम महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों को खुले में शौच करते देखा जा सकता है. जबकि नगर निगम द्वारा पर्वत के आसपास कई सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं, फिर वन विभाग इसका देखरेख का जिम्मा संभाला तब से उनका उपयोग नहीं हो रहा है. पार्क परिसर और आसपास के क्षेत्रों में फैली गंदगी पर्यटकों को निराश कर रही है. नियमित रूप से आने वाले लोगों का कहना है कि बदबू और गंदगी के कारण अब यहां सैर करना मुश्किल हो गया है.
बंद पड़े झरने और पेयजल संकट
कभी हिरण्य पर्वत की पहचान रहे 11 झरने वर्षों से बंद पड़े हैं. पानी की आपूर्ति ठप होने के कारण 50 से अधिक पेयजल पाइप क्षतिग्रस्त होकर बर्बाद हो रहे हैं. लॉकडाउन के दौरान खराब हुई मोटर को आज तक नहीं बदला गया, जिसके कारण पानी की समस्या लगातार बनी हुई है. पर्वत पर स्थित पानी टंकी की भी वर्षों से सफाई नहीं हुई है. इससे पेयजल व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है.
अवैध निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त
हिरण्य पर्वत पर लगातार अवैध मकानों का निर्माण हो रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की जानकारी में ही यह निर्माण कार्य चल रहा है. पर्वत के चारों ओर सुरक्षा के लिए लगाई गई लोहे की जालियां जगह-जगह तोड़ दी गई हैं. इसके अलावा टूटे हुए बिजली के तार और उखड़े हुए पानी के पाइप किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं. बावजूद इसके मरम्मत की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है.
नशेड़ियों और जुआरियों का अड्डा बनता जा रहा पार्क
स्थानीय नागरिकों के अनुसार हिरण्य पर्वत अब धीरे-धीरे असामाजिक तत्वों का सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है. यहां जुआ खेलने और नशा करने वालों की गतिविधियां बढ़ गई हैं. नियमित रूप से भ्रमण करने वाले लोगों का कहना है कि गांजा, गुटखा, सिगरेट सहित अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले युवकों का यहां जमावड़ा लगा रहता है. इसके कारण परिवार और महिलाएं यहां आने से परहेज करने लगी हैं.
गोशालाएं और आवारा मवेशी बन रहे खतरा
पर्वत पर कई स्थानों पर गोशालाएं संचालित हो रही हैं. हल्की बारिश होने पर मवेशियों का गोबर रास्तों पर फैल जाता है, जिससे राहगीरों के फिसलने का खतरा बना रहता है. स्थानीय लोगों के अनुसार पूर्व में एक व्यक्ति की गोबर पर फिसलने से मौत भी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
पहले होती थी सख्ती, अब नहीं दिखती निगरानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि तत्कालीन जिलाधिकारी आनंद किशोर के कार्यकाल में हिरण्य पर्वत की सफाई और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता था. वे स्वयं सुबह भ्रमण के दौरान गंदगी और अव्यवस्था देखने पर संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते थे. उनके कार्यकाल में पार्क की स्थिति काफी बेहतर थी, लेकिन बाद के वर्षों में निगरानी कम होने से हालात बिगड़ते चले गए.
वन विभाग ने सुधार का दिया भरोसा
वन रेंजर ऋषिकेश कुमार ने बताया कि हिरण्य पर्वत और पार्क की समस्याओं को चिह्नित किया जा रहा है. हाल ही में स्थल का निरीक्षण भी किया गया है. बिजली, पानी, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने की योजना बनाई जा रही है. उन्होंने दावा किया कि आगामी एक-दो माह में पार्क का बदला हुआ स्वरूप लोगों को देखने को मिलेगा.
पर्यटन स्थल को बचाने की चुनौती
नालंदा जिले के इस प्रमुख पर्यटन स्थल की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो हिरण्य पर्वत अपनी पहचान पूरी तरह खो सकता है. स्थानीय लोगों और पर्यटकों को अब प्रशासन द्वारा किए जाने वाले सुधार कार्यों का इंतजार है.
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