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टाल क्षेत्र के चर्चित मुड़बरिया नरसंहार कांड के सभी 38 अभियुक्त रिहा

Updated at : 18 Dec 2024 10:51 PM (IST)
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टाल क्षेत्र के चर्चित मुड़बरिया नरसंहार कांड के सभी 38 अभियुक्त रिहा

जिले के घाटकोसुम्भा टाल क्षेत्र के चर्चित मुड़बरिया नरसंहार कांड के सभी 38 अभियुक्त मंगलवार के दिन साक्ष्य के अभाव में बरी किये गये.

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शेखपुरा.

जिले के घाटकोसुम्भा टाल क्षेत्र के चर्चित मुड़बरिया नरसंहार कांड के सभी 38 अभियुक्त मंगलवार के दिन साक्ष्य के अभाव में बरी किये गये. वर्ष 1993 के जनवरी माह में दो जातियों के बीच आपसी वर्चस्व की लड़ाई में एक पक्ष के चार और दूसरे पक्ष के एक लोगों की हत्या और महिलाओं के साथ दुष्कर्म तथा एक दर्जन से ज्यादा के घायल होने के आरोप को लेकर 100 से ज्यादा लोगों को अभियुक्त बनाया गया था. जिनमें से कई की मृत्यु और कई की रिहाई पहले ही विभिन्न न्यायालयों द्वारा की जा चुकी है. 31 साल के लंबे न्यायिक कार्रवाई के बाद इस मामले का पटाक्षेप अभियुक्तों की रिहाई के साथ हुआ. अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निषेध अधिनियम के विशेष न्यायाधीश मधु अग्रवाल ने खचाखच भरे न्यायालय में निर्णय सुनाया. इस संबंध में अभियुक्तों के अधिवक्ता रविन्द्र प्रसाद, किराणी प्रसाद, मो तसीमुद्दीन आदि ने बताया कि 1993 के इस जघन्य नरसंहार का मामला मुंगेर न्यायालय में शुरू हुआ था. यहां जिला न्यायालय की स्थापना के बाद मामले का न्यायिक विचारण यहां शुरू हुआ. इस मामले में अंतिम कार्रवाई करते हुए न्यायाधीश ने बच्चू धानुक, राम गुलाम महतो, राम जी महतो, रामनाथ महतो, प्रताप महतो, रामू महतो, जगदीश महतो, रक्षा महतो, विभीषण महतो, पदार्थ उर्फ राम पदारथ महतो, विजय महतो, रामविलास महतो, अवध महतो, चांदो महतो, दुखी महतो, नरसिंह महतो, अनिक महतो, तनिक महतो, प्रकाश महतो, किशोरी महतो, मिथिलेश महतो, बिनो महतो, रूपन महतो, दारो महतो, इंद्रर महतो, अयोध्या महतो, किशोरी महतो, विष्णु देव महतो, लखिंदर महतो, भागीरथ महतो, विष्णु देव महतो, सुखो महतो, चनीरक महतो, रामाश्रय महतो, अर्जुन महतो, सागर महतो और रामबालक महतो को साक्ष्य के आभाव में बरी कर दिया. न्यायालय के इस निर्णय के बाद राहत प्राप्त सभी अभियुक्तों ने हर्ष व्यक्त किया है. इस नरसंहार ने टाल क्षेत्र के पूरे सामाजिक ताने-बाने को छिन्न भिन्न कर दिया था. राज्य सरकार द्वारा इस नरसंहार के तुरंत बाद घाटकुसुंभा प्रखंड का गठन करते हुए लोगों में विश्वास पैदा करने का प्रयास शुरू किया गया था. 31 साल पूर्व की इस घटना के बाद भी अभी तक लोगों के जख्म भरे नहीं है. इस घटना की याद अभी भी क्षेत्र के लोगों के बीच ताजा है. इस घटना को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग विस्तार से प्राथमिक की दर्ज की गयी थी.

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