कोलकाता से फरार साइबर ठग राजगीर से गिरफ्तार

कोलकाता के पूर्व जादवपुर थाना के फरार साइबर अपराधी देवाशीष बानिक को राजगीर के एक होटल से गिरफ्तार किया गया है.
प्रतिनिधि, राजगीर.
कोलकाता के पूर्व जादवपुर थाना के फरार साइबर अपराधी देवाशीष बानिक को राजगीर के एक होटल से गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार आरोपी पर 5.11 करोड़ एक लाख रुपये ठगी करने का गंभीर आरोप है. यह गिरफ्तारी कोलकाता पुलिस द्वारा राजगीर थानाध्यक्ष रमन कुमार के सहयोग से किया गया है. बिहारशरीफ न्यायालय की अनुमति के बाद कोलकाता पश्चिम बंगाल की पुलिस अभियुक्त को अपने साथ ले गयी है. कोलकाता पुलिस के अनुसार आरोपी देबाशीष बानिक एवं अन्य द्वारा मिलकर क्रिप्टो और ट्रेडिंग में निवेश के बदले बहुत अधिक रिटर्न का वादा करके आम जनता को लुभाया, शिवोम ट्रेडर्स एवं शिवोम एंटरप्राइजेज नामक दो कंपनियों के फर्जी चालान पर, फर्जी ऋण समझौतों के आधार पर ठगी किया गया है. आरोप है कि उच्च रिटर्न देने के बजाय आरोपी व्यक्तियों ने अज्ञात सहयोगियों के साथ मिलकर बेईमानी किया है. उसके द्वारा कई लोगों को गलत तरीके से आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है. पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया 5.11 करोड़ की राशि गबन करने का आरोप देवाशीष बानिक, पिता डिजान बानिक पर है. उन्होंने बताया कि आरोपी देबाशीष बानिक द्वारा सभी संचार लिंक बंद कर दिया गया था. वह गिरफ्तारी से बचने के लिये 06.03.2024 से कोलकाता में अपने स्थायी पते से फरार हो गया था. पुलिस के अनुसार जांच के दौरान कई दस्तावेज यथा एग्रीमेंट, मनी रसीद जब्त की गई है, जो पीड़ित को लुभाने के उद्देश्य से असली माना जाता है. जांच के दौरान RBI, SEBI और I. G. रजिस्ट्रेशन, रजिस्ट्रेशन और स्टांप रेवेन्यू के निदेशक जैसे विनियामक प्राधिकरणों को नोटिस भेजे गए हैं. संबंधित प्राधिकरण का जवाब प्राप्त हुआ है, जिसमें मामूली रूप से उल्लेखित आरोपी की लापरवाही स्थापित हुई है. उन्होंने बताया कि जांच के दौरान कोलकाता नगर निगम के लाइसेंस अधिकारी को भी नोटिस भेजा गया था. दस्तावेजों से पता चला कि देबाशीष बनिक के नाम पर उनकी कंपनी शिवोम एंटरप्राइज के पक्ष में ट्रेड लाइसेंस (C.E.No.011146100195) जारी किया था. कंपनी के लाइसेंस की प्रकृति सिविल ठेकेदार और भूमि विकास से संबंधित है. राजगीर थाना में पूर्व जादवपुर थाना पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान संबंधित बैंक अकाउंट स्टेटमेंट एकत्रित किया गया है। फंड ट्रेल का पता लगाने और खाते की पहचान करने के लिए पैन सर्च पहले ही किया गया है. जांच में आरोपी देबाशीष बनिक ने नकद और ऑनलाइन दोनों तरीकों से पैसे लिया है. आरोपी और उसके सहयोगियों ने निवेशकों को आश्वासन दिया था कि वह क्रिप्टो ट्रेडिंग व्यवसाय के लाभ के साथ इसे वापस कर देगा. सभी निवेशकों को सहमत लाभ प्रदान करने के बाद वह एक वर्ष के बाद कई गुना अधिक रिटर्न देता था. कुछ को एक ही शुरुआती मासिक रिटर्न भी दिया गया था.
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