गर्मी में रोहतास-कैमूर के झरने बने नेचर लवर्स की पहली पसंद, 2 महीने में 50 हजार पर्यटक पहुंचे

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रोहतास-कैमूर झरना

Bihar Tourism: बिहार में इको टूरिज्म का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. खासकर रोहतास और कैमूर के जलप्रपात इन दिनों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं. पिछले दो महीनों में करीब 50 हजार लोग इन टूरिस्ट प्लेस पर पहुंचे हैं, जिससे ये इलाक़े अब नए टूरिस्ट हॉटस्पॉट के रूप में उभर रहे हैं.

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Bihar Tourism: बिहार के रोहतास और कैमूर की पहाड़ियों में छिपा कुदरत का खजाना इन दिनों पर्यटकों के लिए नया ‘हॉटस्पॉट’ बन गया है. पिछले दो महीनों में ही करीब 50 हजार सैलानी इन दूधिया झरनों और ऊंचे पहाड़ों का दीदार करने पहुंचे हैं.

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इको टूरिज्म के बढ़ते क्रेज ने कैमूर की शांत वादियों को रोमांच से भर दिया है. यहां की प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और ऊंचाई से गिरते जलप्रपातों का शोर अब दूर-दूर तक सुनाई दे रहा है.

850 फीट की ऊंचाई से गिरता कशिश

रोहतास जिले का 850 फीट ऊंची पहाड़ियों से गिरते इस झरने की आवाज दूर से ही सैलानियों को अपनी ओर खींच लेती है. इसके अलावा, तुतला भवानी झरने भी अपनी 180 फीट की ऊंचाई और धार्मिक महत्व के कारण लोगों की पहली पसंद बना हुआ है.

यहां स्थित मां तुतला भवानी का मंदिर और चारों ओर फैली हरियाली पर्यटकों को भक्ति और प्रकृति का अनोखा संगम प्रदान करती है. गर्मी के मौसम में यहाँ का तापमान मैदानी इलाकों के मुकाबले काफी कम रहता है, जो सुकून के पल बिताने के लिए सबसे सटीक है.

कैमूर के घने जंगलों में छिपा ‘मगरमच्छों का संसार’

कैमूर की पहाड़ियों के बीच स्थित करकटगढ़ झरने न केवल अपनी सुंदरता के लिए मशहूर है, बल्कि इसे एक प्रमुख मगरमच्छ संरक्षण केंद्र के रूप में भी विकसित किया गया है. यहां बच्चों के लिए इको पार्क और मनोरंजन की शानदार सुविधाएं मौजूद हैं.

तेलहर कुंड अपनी प्राकृतिक बनावट और दुर्गावती नदी के करीब होने के कारण पिकनिक प्रेमियों का पसंदीदा स्थल बन गया है. मांझर कुंड और धुआं कुंड की खूबसूरती तो ऐसी है कि लोग यहां घंटों बैठकर प्रकृति की गोद में शांति का अनुभव करते हैं.

बुनियादी सुविधाओं से बढ़ी पर्यटकों की आवाजाही

बिहार सरकार के पर्यटन विभाग ने इन इलाकों को अब सुलभ बना दिया है. बेहतर सड़कें, पुख्ता सुरक्षा इंतजाम और पर्यटकों के ठहरने के लिए बनाए गए गेस्ट हाउस के कारण यहां आने वालों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है.

इन झरनों को इको टूरिज्म हब बनने से न केवल बिहार के पर्यटन को नई ऊंचाई मिली है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुले हैं. अब लोग वीकेंड पर परिवार के साथ इन झरनों के पास सुकून और रोमांच तलाशने पहुंच रहे हैं.

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