बिहार में फरार अपराधियों से पहले गायब नाबालिग को तलाशेगी पुलिस, हाईकोर्ट की फटकार के बाद तय हुई प्राथमिकता

Updated at : 17 Jan 2024 3:52 PM (IST)
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बिहार में फरार अपराधियों से पहले गायब नाबालिग को तलाशेगी पुलिस, हाईकोर्ट की फटकार के बाद तय हुई प्राथमिकता

बिहार पुलिस के एडीजी मुख्यालय जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि किसी भी नाबालिग या अबोध गुमशुदगी पर बिहार पुलिस के द्वारा की जाने वाली कार्रवाई की मानक कार्य प्रक्रिया में बदलाव करते हुए राज्य के सभी पुलिस पदाधिकारी व कर्मियों को निर्देश जारी किये गये हैं.

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पटना. नाबालिग या अबोध के गुमशुदगी मामलों को सुलझाना अब बिहार पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी. इसको लेकर जिलों में पुलिस पदाधिकारियों को शपथ दिलाये जाने के साथ ही नयी गाइडलाइन भी निर्धारित की गयी है. ऐसे मामलों में थानों के साथ ही डायल 112 के पुलिस बल को भी लगाया जायेगा. बिहार पुलिस के एडीजी मुख्यालय जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि किसी भी नाबालिग या अबोध गुमशुदगी पर बिहार पुलिस के द्वारा की जाने वाली कार्रवाई की मानक कार्य प्रक्रिया में बदलाव करते हुए राज्य के सभी पुलिस पदाधिकारी व कर्मियों को निर्देश जारी किये गये हैं.

गुमशुदगी की सूचना को सर्वोच्च प्राथमिकता

जारी निर्देश के अनुसार ऐसी किसी गुमशुदगी की सूचना मिलने पर उस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए गुमशुदा की तलाश हेतु प्रत्येक संभव प्रयास करना है. जो भी संसाधन उपलब्ध हों, उनके सहयोग से विधि सम्मत तरीके से गुमशुदा की तलाश करनी है. उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य के सभी जिलों में थाना के पदाधिकारियों व कर्मियों को शपथ दिलाई जा रही है. शपथ दिलाने का उद्देश्य ऐसे मामलों में सभी पुलिसकर्मियों को प्रेरित करना, उनका मनोबल बढ़ाना तथा सेंसेटाइज्ड करना है.

डायल 112 को सूचित करें

एडीजी ने आम जनता से अपील करते हुए कहा है कि अगर उनके किसी निकटस्थ की गुमशुदगी का मामला हो तो अविलंब स्थानीय थाना, गश्ती वाहन या डायल 112 को सूचित करें. गुमशुदा बालक-बालिका का हाल में लिया गया एक साफ सुथरा फोटो सहित उसके अन्य विवरणों यथा गुमशुदा की आयु, शारीरिक कद-काठी, रंग, परिचान, भाषा का ज्ञान, कोई विशेष चिह्न आदि भी पुलिस को अवश्य बताएं ताकि पुलिस बल उक्त मामले में यथोचित कार्रवाई कर सके.

विवरणों को वाट्सअप ग्रुपों पर साझा किया जायेगा

उन्होंने कहा कि ऐसे मामले में तस्वीर सहित इन विवरणों को पुलिस विभाग के वाट्सअप ग्रुपों पर साझा किया जायेगा. अभिभावकों से अपील की गयी है कि गुमशुदा के द्वारा प्रयुक्त किये जा रहे मोबाइल को अवश्य उपलब्ध कराएं ताकि उसके वैज्ञानिक विश्लेषण से गुमशुदा की पिछले दिन की गतिविधियों, उसके संपर्कों तथा उसकी मानसिक दशा का विश्लेषण किया जा सके. उन्होंने कहा कि पुलिस मुख्यालय का भी प्रयास रहेगा कि प्रत्येक स्तर पर ऐसे मामलों के संबंध में गंभीरता तथा संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जाये.

लगता है राज्य की पुलिस जनता के लिए काम नहीं करती

इससे पूर्व टना हाइकोर्ट ने नाबालिग बच्चे और बच्चियों के गायब होने पर उन्हें जल्द बरामद करने के लिए डीजीपी को एसओपी जारी करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि लगता है राज्य की पुलिस जनता के लिए काम नहीं करती है. जब कोई मामला उनके या अपने ऊपर गुजरता है, तब दर्द महसूस होता है. कोर्ट ने कहा कि जब पुलिस की वर्दी उतर जाती है और उनके साथ कोई घटना घटती है और वे थाने में पुलिस के सामने गिड़गिड़ाते हैं, तब उन्हें जरूर याद आता होगा कि एक समय पीड़ित परिवार इसी तरह उनके सामने गिड़गिड़ाते थे.

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60 वर्ष की नौकरी के बाद वर्दी साथ नहीं रहेंगी

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 60 वर्ष की नौकरी के बाद वर्दी साथ नहीं रहेंगी . उन्हें भी आम जनता की तरह ही अपना जीवन गुजारना होगा. इस बीच बहुत ऐसा समय आएगा, जब उन्हें अपने किये हुए गलती पर पछतावा होगा. उन्हें महसूस होगा कि मैंने किसी की आत्मा को दुखाया है और उन्हें जरूरी मदद नहीं किया. मंगलवार को न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की एकलपीठ ने पटना से 2018 में गायब एक नाबालिग बच्चे की बरामदगी के लिए उसके पिता विनय कुमार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. कोर्ट ने उक्त बातें चिवालय डीएसपी के साथ ही शास्त्रीनगर थानेदार और इस केस के दारोगा के मौजूदगी में कही.

बच्चा 2018 में गायब हुआ और पुलिस अब तक उसे खोज नहीं सकी

कोर्ट ने कहा कि बच्चा 2018 में गायब हुआ और पुलिस अब तक उसे खोज नहीं सकी. कोर्ट अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि बड़े ही दुख की बात है कि समय रहते पुलिस कार्रवाई करती तो बच्चा बरामद हो सकता था.जब इस मामले में कोर्ट ने सुनवाई शुरू की तो पुलिस द्वारा आनन फानन में पिछले साल 13 फरवरी को एक विशेष जांच दल एसआइटी का गठन कर दिया गया. यह कार्य सिर्फ इसलिए किया गया कि जांच अधिकारी की कमियों को छुपाया जा सकें. कोर्ट ने कहा कि गत दिनों डीएसपी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि वह मामले को गंभीरता को ईमानदारी से लेंगे और पीड़ित लड़के का पता लगाने और अपराधी को जल्द से जल्द पकड़ने का प्रयास करेंगे, लेकिन वे अभी तक कोई सुराग नहीं लगा सके.

सीबीआइ को पार्टी बनाने का आदेश

कोर्ट ने इस मामले में सीबीआइ को पार्टी बनाने का आदेश दिया, ताकि सीबीआइ पुलिस अधिकारियों के कार्यकलापों की जांच कर सकें.कोर्ट का मानना था कि समय बीत जाने पर साक्ष्य मिलना नामुमकिन हो जाता हैं ऐसे में गायब बच्चों की बरामदगी आसान नहीं होता. सरकारी वकील सुमन झा ने कोर्ट में उपस्थित सभी पुलिस अधिकारियों का बचाव करते हुए कहा कि पुलिस शुरू से कार्रवाई कर रही है, लेकिन अभी तक गायब बच्चा का सुराग नहीं मिल सका है.

क्या है मामला

पटना के पटेल नगर स्थित देव पब्लिक स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाला छात्र घर से स्कूल गये गायब हो गया . काफी खोजबीन किये जाने पर जब कुछ पता नहीं चला तो शास्त्रीनगर थाना में प्राथमिकी कांड संख्या 636/18 दर्ज करायी गयी. पुलिस द्वारा जब छात्र की खोज नहीं की जा सकी तो यह मामला हाइकोर्ट में आया और कोर्ट इस मामले की लगातार सुनवाई कर रहा है.

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