2050 तक प्यासा होगा बिहार? IIT पटना की रिपोर्ट में हुआ खुलासा,जानें सरकार का नया रिवर्स प्लान

Water Resources Minister Vijay Chaudhary
Bihar News: जिस बिहार की पहचान उसकी बहती नदियों से रही है, अब उसी जल संपदा को बचाने की चुनौती सामने है. IIT पटना की ताजा रिपोर्ट चेतावनी जरूर देती है, लेकिन साथ ही यह भी संकेत देती है कि अभी सही कदम उठाकर भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है.
Bihar News: बिहार में भूगर्भ जल स्तर तेजी से गिर रहा है, एक सरकारी सर्वे और IIT पटना के अध्ययन से यह खुलासा हुआ है.
जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने विधान परिषद में बताया कि 2050 तक राज्य जल संकट की श्रेणी में आ सकता है.उन्होंने दीर्घकालिक जल प्रबंधन, नदी पुनर्जीवन और गंगाजल जैसी योजनाओं पर जोर दिया, साथ ही अंधाधुंध दोहन रोकने की अपील की.
घटता जल, बढ़ती चिंता
विधान परिषद में जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने जो आंकड़े पेश किए, उन्होंने सबकी नींद उड़ा दी है. IIT पटना और जल संसाधन विभाग के सर्वे से यह साफ हो गया है कि बिहार अब जल के मामले में धनी राज्य नहीं रहा. प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता इतनी तेजी से गिर रही है कि राज्य ‘वॉटर स्ट्रेस’ की श्रेणी में प्रवेश कर चुका है.
कभी बिहार में 600 के करीब नदियां हुआ करती थीं, लेकिन आज स्थिति यह है कि सरकार को 340 नदियों को चिह्नित कर उनके पुनर्जीवन के लिए विशेष अभियान चलाना पड़ रहा है. बेलगाम भूजल दोहन और नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में रुकावट इसके सबसे बड़े दुश्मन बनकर उभरे हैं.
नदियों की सिल्ट हटाने की अनोखी पहल
नदियों में बढ़ती गाद को बड़ी समस्या बताते हुए मंत्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था मिट्टी भराई के लिए सिल्ट लेना चाहे तो सरकार इसे मुफ्त में उपलब्ध कराएगी. इससे नदियों की धारा और जलधारण क्षमता बहाल करने में मदद मिलेगी. जिलों में प्रशासनिक समितियां बनाकर इस योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है.
अक्सर नदियों की गहराई सिल्ट जमा होने की वजह से कम हो जाती है, जिससे जलधारण क्षमता घटती है और बाढ़ का खतरा बढ़ता है. अब सरकार ने एलान किया है कि अगर कोई आम नागरिक या संस्था मिट्टी भराई के काम के लिए नदियों से सिल्ट निकालना चाहती है, तो सरकार उसे बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराएगी.
इसके लिए सभी जिलों में डीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है. चांदन डैम में यह प्रयोग काफी सफल रहा है और अब इसे पूरे राज्य में लागू किया जा रहा है ताकि नदियों की खोई हुई धार वापस मिल सके.
सर्वेक्षण से मिले गंभीर संकेत
आईआईटी पटना और जल संसाधन विभाग के संयुक्त अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया कि जल प्रबंधन की दिशा में तुरंत कदम उठाने की जरूरत है. राज्य में जनसंख्या घनत्व अधिक होने के कारण जल संसाधनों पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है.
जल-जीवन-हरियाली अभियान का असर
सरकार ने दावा किया कि जल-जीवन-हरियाली मिशन से भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला है. साथ ही सिंचाई क्षेत्र में भी वृद्धि हुई है. मंत्री ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में जल प्रबंधन पर लगातार मंथन किया जा रहा है.
तमाम चुनौतियों के बीच ‘जल-जीवन-हरियाली’ मिशन एक ढाल बनकर उभरा है. केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण की रिपोर्ट बताती है कि इस मिशन के कारण पिछले दस वर्षों में भूगर्भ जलस्तर में 930 वर्गमीटर क्षेत्र की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, कोसी-मैची लिंक परियोजना सीमांचल के किसानों के लिए वरदान साबित होने वाली है, जिससे करीब दो लाख हेक्टेयर नई सिंचित भूमि तैयार होगी.
वर्तमान में राज्य की 53 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित है, जिसमें से बड़ा हिस्सा मौजूदा सरकार के प्रयासों का नतीजा है. सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक और जनभागीदारी के जरिए बिहार को प्यासा होने से बचाया जाए.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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