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बिहार में CO हड़ताल पर, सर्किल आफिसों का काम ठप, जमीन सर्वे-चकबंदी पर असर

Updated at : 09 Mar 2026 12:12 PM (IST)
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Bihar News

सांकेतिक तस्वीर

Bihar News: बिहार में प्रशासनिक व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है. राज्य के सभी अंचलाधिकारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे अंचल कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है. इसका सीधा असर जमीन सर्वे, चकबंदी और दाखिल-खारिज जैसे जरूरी कामों पर पड़ रहा है.

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Bihar News: बिहार में राजस्व प्रशासन से जुड़ी सेवाएं सोमवार से बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं. ‘बिहार राजस्व सेवा संघ’ और ‘बिरसा यूनाइटेड’ के आह्वान पर राज्य के सभी अंचलाधिकारी (CO) अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि सरकार डीसीएलआर पद पर तैनाती को लेकर लगातार वादाखिलाफी कर रही है और उच्च न्यायालय के आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा है. इसके विरोध में उन्होंने कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया है.

डीसीएलआर पद पर तैनाती को लेकर नाराजगी

CO की हड़ताल का मुख्य कारण डीसीएलआर यानी भूमि सुधार उप समाहर्ता के पद पर तैनाती का मुद्दा है. राजस्व सेवा संघ का आरोप है कि सरकार इस मामले में गंभीर नहीं है और लंबे समय से लंबित मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. संघ का कहना है कि उच्च न्यायालय ने भी राजस्व सेवा के अधिकारियों को डीसीएलआर पद पर तैनात करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

राज्य में राजस्व प्रशासन पहले से ही दबाव में था, क्योंकि पिछले 17 दिनों से राजस्व कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं. कर्मचारी प्रोन्नति, स्थानांतरण और वेतन विसंगतियों समेत अपनी 17 सूत्री मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार कर रहे हैं. अब अधिकारियों और कर्मचारियों दोनों के एक साथ हड़ताल पर चले जाने से अंचल कार्यालयों में पूरी तरह सन्नाटा छा गया है.

जमीन सर्वे और चकबंदी का काम हुआ ठप

इस हड़ताल का सबसे बड़ा असर राज्य में चल रहे विशेष भूमि सर्वे और चकबंदी कार्यक्रम पर पड़ा है. ये दोनों परियोजनाएं किसानों और जमीन मालिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. लेकिन अंचल कार्यालयों में काम बंद होने से इन योजनाओं की रफ्तार थम गई हैं.

दाखिल-खारिज, जाति और आय प्रमाण पत्र जारी करने जैसे कई जरूरी काम अंचल कार्यालयों से ही होते हैं. ऐसे में हड़ताल के कारण आम लोगों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. जमीन विवादों के निपटारे और राजस्व वसूली जैसे कार्य भी प्रभावित होने की आशंका है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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