शहीद परिवारों को नीतीश सरकार का बड़ा तोहफा, खेती-घर के लिए जमीन देने का फैसला

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Nitish Kumar

Bihar News: बिहार सरकार ने शहीद सैनिकों के आश्रितों के लिए एक अहम और संवेदनशील फैसला लिया है. राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने शहीद सैनिकों के परिवारों को सरकारी जमीन की बंदोबस्ती के लिए नई और स्पष्ट प्रक्रिया लागू कर दी है. यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है.

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Bihar News: देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूतों के परिवारों के लिए बिहार सरकार ने खुशियों का पिटारा खोल दिया है. राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए शहीद सैनिकों के आश्रितों को खेती और आवास के लिए सरकारी जमीन देने की नई और पारदर्शी प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है.

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अब शहीदों के परिजनों को अपने ही गांव और प्रखंड में सम्मान के साथ जीवन यापन करने के लिए जमीन के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी इस नए फरमान ने उन परिवारों में उम्मीद की नई किरण जगा दी है जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया.

गृह जिला और गृह प्रखंड में ही मिलेगी जमीन

विभागीय निर्देशों के अनुसार शहीद सैनिकों के आश्रितों को जमीन उनके गृह जिले और गृह प्रखंड में ही दी जाएगी, ताकि परिवार सामाजिक और पारिवारिक परिवेश से जुड़ा रह सके. इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी जिलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं. जमीन की बंदोबस्ती ग्रामीण क्षेत्र की सरकारी और विवादमुक्त भूमि पर ही की जाएगी.

नई व्यवस्था के तहत यह सुविधा केवल थल सेना तक सीमित नहीं रखी गई है. इसमें बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स, बिहार मिलिट्री पुलिस, टेरिटोरियल आर्मी, सीआरपीएफ, बॉर्डर स्काउट्स, बीआरएफ, लोक सहायक सेवा, एनसीसी, होमगार्ड्स और असम राइफल्स के जवानों के आश्रित भी शामिल होंगे. इसके लिए संबंधित बोर्ड की अनुशंसा और न्यूनतम छह माह की संतोषजनक सेवा का प्रमाण-पत्र अनिवार्य होगा.
पांच साल तक नहीं देना होगा लगान

निर्देशों के अनुसार भूमि बंदोबस्ती के बाद आश्रितों से सलामी तो ली जाएगी, लेकिन पहले पांच वर्षों तक कोई वार्षिक लगान नहीं देना होगा. सरकार का मानना है कि इससे शहीद परिवारों को आर्थिक रूप से स्थिर होने का समय मिलेगा और वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकेंगे.

कौन नहीं होगा पात्र

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आश्रित के पास पहले से निजी आवासीय जमीन उपलब्ध पाई जाती है, तो उसे इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा. इसके साथ ही आश्रित का बिहार का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है.

उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार शहीद सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. यह निर्णय शहीदों के प्रति कृतज्ञता और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशीलता का स्पष्ट संदेश देता है.

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