Bihar News: खुशखबरी! बिहार में अब आशा और आंगनबाड़ी दीदियों का भी बनेगा आयुष्मान कार्ड, 5 लाख तक का इलाज होगा मुफ्त

AI जनरेटेड इमेज प्रतीकात्मक तस्वीर
Bihar News: बिहार सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया है, अब आयुष्मान कार्ड सिर्फ गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपकी 'आशा' और 'आंगनबाड़ी' दीदियां भी इस सुरक्षा कवच के दायरे में होंगी.
Bihar News: आयुष्मान भारत योजना के दायरे को बढ़ाते हुए बिहार सरकार ने लाखों कामगार परिवारों को बड़ी राहत दी है. अब आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, एसएपीएफ के जवान और भवन निर्माण कर्मकार बोर्ड में निबंधित श्रमिक भी इस योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के सालाना स्वास्थ्य बीमा का लाभ ले सकेंगे. इस फैसले से राज्य के 17 लाख से अधिक कामगार परिवार सीधे तौर पर कवर हो जाएंगे.
फ्रंटलाइन वर्कर भी आयुष्मान के दायरे में
अब तक आयुष्मान भारत योजना को आम तौर पर गरीब और वंचित वर्गों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन इसके विस्तार ने इसका दायरा और व्यापक बना दिया है. बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के सीईओ शशांक शेखर के अनुसार, राज्य में आशा, आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के कुल 2 लाख 68 हजार 492 परिवार इस योजना के अंतर्गत लाए गए हैं. यह वही वर्ग है जो गांवों और कस्बों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माना जाता है.
निर्माण श्रमिकों के परिवारों को भी राहत
भवन निर्माण कर्मकार बोर्ड में निबंधित श्रमिकों को भी अब आयुष्मान योजना का लाभ मिलेगा. ऐसे कामगार परिवारों की संख्या 14 लाख 26 हजार 14 बताई जा रही है. इन श्रमिकों का बीमा श्रम संसाधन विभाग द्वारा कराया जाएगा और बीमारी की स्थिति में बीमा राशि का भुगतान भी विभाग की ओर से किया जाएगा. यह व्यवस्था असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए एक बड़ी सुरक्षा ढाल मानी जा रही है.
महिला कार्यकर्ताओं को मिलेगा सीधा लाभ
आशा और आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को मिलाकर कुल लाभार्थियों की संख्या 11 लाख तीन हजार से अधिक है. लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि कम मानदेय पर काम करने वाली इन महिला कार्यकर्ताओं को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा मिले. आयुष्मान योजना का विस्तार इस दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है.
सरकार का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ कामगारों और महिला स्वास्थ्य कर्मियों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज को लेकर होने वाली आर्थिक चिंता भी कम होगी. यह फैसला सामाजिक सुरक्षा के दायरे को मजबूत करता है और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक अहम राहत साबित होगा.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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