औरंगाबाद को कचरे से जल्द मिलेगी निजात, 4 करोड़ की लागत से लगेगा MRF प्लांट

सांकेतिक तस्वीर
Bihar News: औरंगाबाद जिले के दाउदनगर नगर परिषद क्षेत्र में करीब 4.19 करोड़ रुपये की लागत से मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) और विंड्रो प्लांट बनाया जा रहा है, जहां रोजाना आने वाले कचरे को वैज्ञानिक तरीके से अलग कर रीसाइक्लिंग के लिए तैयार किया जाएगा.
Bihar News: बिहार का औरंगाबाद जिला में दाउदनगर नगर पर्षद क्षेत्र में पर्यावरण को नई संजीवनी देने के लिए ‘मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी’ (MRF) और ‘विंड्रो’ प्लांट का निर्माण युद्ध स्तर पर चल रहा है. करीब 4.19 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हो रहा यह प्रोजेक्ट न केवल दाउदनगर को गंदगी से मुक्ति दिलाएगा, बल्कि कचरे को आय के स्रोत में बदल देगा.
अगले एक से दो महीने में इस केंद्र के चालू होने की उम्मीद है, जिसके बाद शहर की गलियों से उठने वाला कूड़ा डंपिंग यार्ड में सड़ने के बजाय मशीनों के जरिए रीसायकल किया जाएगा.
4 करोड़ से अधिक की लागत से बन रहा यह प्रोजेक्ट
दाउदनगर नगर परिषद क्षेत्र में यह प्रोजेक्ट करीब 4 करोड़ 19 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही है. इसमें दो करोड़ 54 लाख रुपये से अधिक की लागत से एमआरएफ सेंटर का निर्माण हो रहा है, जबकि करीब एक करोड़ 64 लाख रुपये से अधिक की राशि से विंड्रो प्लांट तैयार किया जा रहा है.
एमआरएफ सेंटर एक विशेष सुविधा होगी, जहां शहर से एकत्र किए गए कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा. यहां प्लास्टिक, कागज, धातु और कांच जैसे सूखे कचरे को मशीनों की मदद से अलग किया जाएगा. इसके बाद इन उपयोगी सामग्रियों को रीसाइक्लिंग उद्योगों तक भेजा जाएगा, ताकि उनका दोबारा इस्तेमाल किया जा सके.
निर्माण कार्य अंतिम चरण में
निर्माण स्थल पर विंड्रो प्लांट का फाउंडेशन तैयार हो चुका है और शेड बनाने का काम बाकी है. वहीं एमआरएफ सेंटर का फाउंडेशन तैयार किया जा रहा है. गीले कचरे को सुखाने के लिए अलग से व्यवस्था बनाई गई है और उसके लिए फाउंडेशन तैयार किया जा चुका है.
इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से शहर में कचरे के ढेर कम होंगे और साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर होगी. साथ ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा किया जा सकेगा. इसके अलावा कचरे की छंटाई और रीसाइक्लिंग से जुड़ी गतिविधियों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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