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बिहार सरकार नीरा उत्पादकों को करेगी मदद, बोले सीएम नीतीश कुमार- एक लाख रुपये तक की मिलेगी सहायता

Updated at : 28 Feb 2022 9:20 AM (IST)
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बिहार सरकार नीरा उत्पादकों को करेगी मदद, बोले सीएम नीतीश कुमार- एक लाख रुपये तक की मिलेगी सहायता

कहा कि गड़बड़ी करने वाले केवल 10% लोग होते हैं. 2018 में एक सर्वे के मुताबिक एक करोड़ 64 लाख लोगों ने शराब का सेवन छोड़ दिया. इससे सामाजिक सुधार होने लगा है. साथ ही राज्य में पर्यटकों की संख्या भी बढ़ी.

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पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को नीरा का उत्पादन करने वालों को राज्य सरकार से एक लाख रुपये तक की मदद देने की घोषणा की. साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शराबबंदी को लेकर सबसे अधिक पटना जिले में अभियान चलाएं. साथ ही राज्य में दहेज और बाल विवाह के विरोध में भी अभियान चलाने की जरूरत है.

मुख्यमंत्री समाज सुधार अभियान के तहत आयोजित सभा में पटना और नालंदा जिलों की जीविका दीदियों को संबोधित कर रहे थे. सभा का आयोजन यहां सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर स्थित बापू सभागार में किया गया था. सीएम ने जीविका दीदियों सहित आम लोगों से जागरूकता फैलाने और गड़बड़ी की सूचना प्रशासन को देने की अपील की.

सीएम ने कहा कि शराबबंदी को लेकर पिछले दिनों राज्य में 26 ड्रोन और हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया. इसके जरिये आरोपितों को पकड़ने के लिए उन्होंने पुलिस वालों को धन्यवाद दिया. कहा-ड्रोन के इस्तेमाल से बालू के अवैध धंधे पर भी लगाम लगेगी. उन्होंने कहा कि शराबबंदी को लेकर तीन महीने में दो लाख 17 हजार छापेमारियां हुईं.

नीतीश कुमार ने कहा कि कुछ दिन पहले जहरीली शराब पीने से नालंदा जिले में आठ लोगों की मौत हो गयी थी. अन्य जिलों से भी ऐसी सूचना आने पर कुछ लोग शराबबंदी खत्म करने की मांग करने लगे. जिस राज्य में शराबबंदी नहीं है, वहां भी जहरीली शराब पीने से लोग मरते हैं. ऐसे में हमलोगों ने शराबबंदी के लिए अभियान चलाने का निर्णय लिया.

2016 में जब यह अभियान चलाया था, तो नौ जगहों पर कार्यक्रम रखा था. इस बार अभियान में 12 जगहों का कार्यक्रम रखा गया, जिनमें से छह जगहों पर कार्यकम कोरोना की तीसरी लहर से पहले पूरा हो गया था. रविवार का यह 10वां कार्यक्रम पटना में आयोजित है. आगे दो कार्यक्रम और भी होंगे.

5000 करोड़ राजस्व के बावजूद शराबबंदी की

मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी लागू करने के पहले शराब से सरकार को पांच हजार करोड़ रुपये का टैक्स मिलता था. इसके बावजूद महिलाओं की मांग पर शराब से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए शराबबंदी का निर्णय लिया और इसके लिए एक अप्रैल, 2016 से कानून लागू हुआ.

पहले अभियान चलाते थे, लेकिन लागू नहीं कर पाते थे, अब लागू कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि गड़बड़ी करने वाले केवल 10% लोग होते हैं. 2018 में एक सर्वे के मुताबिक एक करोड़ 64 लाख लोगों ने शराब का सेवन छोड़ दिया. इससे सामाजिक सुधार होने लगा है. साथ ही राज्य में पर्यटकों की संख्या भी बढ़ी.

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