बिहार: लोन का 1300 नहीं चुकाने पर सरेआम बेइज्जत करते थे वलूसी गैंग गुंडे, आहात होकर महिला ने की आत्महत्या

बिहार के कटिहार में कदवा थाना क्षेत्र के सागरध में साप्ताहिक ऋण की एक किस्त 1300 रुपये नहीं चुकाने के बाद प्रताड़ना से तंग एक महिला ने आत्महत्या कर ली.
बिहार के कटिहार में कदवा थाना क्षेत्र के सागरध में साप्ताहिक ऋण की एक किस्त 1300 रुपये नहीं चुकाने के बाद प्रताड़ना से तंग एक महिला ने आत्महत्या कर ली. ऋण धारक कर्मियों की ओर से साप्ताहिक किस्त चुकाने को लेकर दबाव बनाने तथा प्रताड़ित व बेइज्जत करने से कदवा के सागरथ निवासी संजीत साह की पत्नी पुतुल देवी आहत हो गयी थी. उसने मंगलवार की रात गले में फंदा डालकर आत्महत्या कर ली. परिजनों ने घटना की जानकारी कदवा थाना पुलिस को दी. सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तथा मामले की तफ्तीश करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया.
पुतुल देवी ने निजी फाइनेंस कंपनी उत्कर्ष से सात माह पूर्व 75 हजार रुपये ग्रुप लोन लिया था. पांच माह तक बैंक की ओर से निर्धारित साप्ताहिक किस्त 1330 रुपये चुकाया. परिजनों का आरोप है एक किस्त नहीं चुकाने पर पुतुल देवी को बेइज्जत किया गया. पति संजीत ने कहा कि मंगलवार की देर शाम बैंककर्मी रुद्रा यादव कुछ सहयोगी व ग्रुप की महिलाओं के साथ उसके घर पर आये. वह अपनी मां को लाने के लिए गांव से बाहर गये हुए थे. पुतुल ने बैंक कर्मियों को कहा कि अगले सप्ताह किस्त चुका देगी. बैंक कर्मी उस पर किस्त देने का दबाव बनाते रहे.
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पीड़िता की असमर्थता पर बैंक कर्मी उसे खरी-खोटी सुनाने लगे और बेइज्जत करने लगे. इसके बाद ग्रुप में शामिल महिलाओं के साथ बैंक कर्मी ने कहा कि रुपया नहीं दे सकती हो तो जान दे दो. तुम्हारा सारा कर्ज माफ हो जायेगा. इस बात से आहत पुतुल देवी ने अपने दोनों बच्चों को अलग कमरे में सुला कर अपने गले में फंदा लगा कर मुंगलवार की रात आत्महत्या कर ली. सुबह जब पति के बड़े भाई रंजीत की नजर फंदे से लटकते पुतुल पर पड़ी तो इसकी जानकारी ग्रामीणों व अपने भाई को दी. इसके बाद ग्रामीणों ने इस बात की जानकारी कदवा थाना पुलिस को दी. कदवा थानाध्यक्ष विजय कुमार यादव ने कहा कि महिला की आत्महत्या की सूचना मिली है. मामला आत्महत्या का है या फिर हत्या को लेकर उकसाया गया है इसकी जांच की जायेगी. परिजनों के आवेदन के आधार पर केस दर्ज कर पुलिस अग्रेतर कार्रवाई करेगी.
बिहार में काफी दिनों से गुंडा बैंक एक्टिव है. जो लोगों को लोन देने के बाद वसूली का काम करती है. हालांकि, इसपर सरकार के द्वारा सख्ती से जांच कर रही थी. मगर, जांच की रफ्तार धीमी पड़ने पर कर्ज देकर सूद वसूलने वाले महाजनों के पंख भी फड़फड़ाने लगे हैं. पिछले वर्ष नवंबर में सूद के पैसे से जुड़े विवाद में हुए कटिहार में ही हुए ट्रिपल मर्डर मामले में हाईकोर्ट ने सूदखोरों पर नकेल कसने के लिए जांच का आदेश दिया था. एसआइटी के गठन के बाद ताबड़तोड़ छापेमारी भी अचानक तेज हो गयी थी. कई धनाढ्य लोग जांच एजेंसियों के रडार पर भी चढ़े. लेकिन अब जांच जब सुस्त पड़ी तो प्रताड़ना और आत्महत्याओं का दौर फिर एकबार तेज होने लगा है.
एकतरफ जहां गुंडा बैंक की जांच की रफ्तार अब धीमी पड़ गयी वहीं सूद के पैसे से आत्महत्या के नौबत तक पहुंचाने वाले धनाढ्य सूदखोरों का मनोबल बढ़ने लगा है. ऐसे में कटिहार में ही फिर से सूद के पैसे न देने के कारण महिला को आत्महत्या करना पड़ा है. ऐसा ही एक मामला, पिछले वर्ष नवादा में भी सामने आया था. इस मामले में दुकान चलाने के लिए एक परिवार से कर्ज लिया था. इसे नहीं चुकाने की स्थिति में परिवार को लगातार बेइज्जत किया जा रहा है. परिस्थितियों से हारकर पूरे परिवार ने आत्महत्या कर ली.
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