बिहार में अप्रैल से जमीन की खरीद-बिक्री होगी महंगी, आपको पड़ सकता इतना ज्यादा पैसा, जानें पूरी बात

Updated at : 01 Feb 2023 9:09 AM (IST)
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बिहार में अप्रैल से जमीन की खरीद-बिक्री होगी महंगी, आपको पड़ सकता इतना ज्यादा पैसा, जानें पूरी बात

बिहार में एक अप्रैल से सूबे में जमीन की खरीद-बिक्री महंगी हो सकती है. सभी जिला मूल्यांकन समितियों ने जमीन के मिनिमम वैल्यू रेट (एमवीआर) में बदलाव को लेकर मद्यनिषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है. विभागीय अधिकारी इसकी समीक्षा में जुटे हैं.

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बिहार में एक अप्रैल से सूबे में जमीन की खरीद-बिक्री महंगी हो सकती है. सभी जिला मूल्यांकन समितियों ने जमीन के मिनिमम वैल्यू रेट (एमवीआर) में बदलाव को लेकर मद्यनिषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है. विभागीय अधिकारी इसकी समीक्षा में जुटे हैं. विभाग के स्तर पर विस्तृत समीक्षा के बाद राज्य सरकार को प्रस्ताव दिया जायेगा. सरकार की मंजूरी मिलने पर एक अप्रैल से संशोधित एमवीआर लागू हो सकता है. एमवीआर जमीन का वह न्यूनतम निर्धारित मूल्य होता है, जिसके आधार पर उसकी खरीद-बिक्री पर रजिस्ट्री शुल्क वसूल की जाती है.

बड़े शहरी क्षेत्रों में दो फीसदी अधिक शुल्क ले रहा विभाग

सूबे में पिछले दो-तीन वर्षों के दौरान शहरी निकायों की संख्या 142 से बढ़ कर 261 हो गयी है. ऐसे में इन क्षेत्रों में होने वाली रजिस्ट्री से स्टांप शुल्क के रूप में निबंधन कार्यालयों को दो फीसदी अतिरिक्त राशि मिल रही है. ग्रामीण निकायों में एमवीआर का आठ फीसदी, जबकि शहरी निकायों में एमवीआर का दस फीसदी रजिस्ट्री शुल्क लगता है. सरकारी परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि दर का मुआवजा भी एमवीआर के आधार पर ही भुगतान किया जाता है. मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग के आयुक्त बी कार्तिकेय धनजी ने कहा िक जिला मूल्यांकन समितियों ने एमवीआर में बदलाव को लेकर प्रस्ताव भेज दिया है, जिसकी समीक्षा हो रही है. इसको लेकर राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जायेगा. सरकारी की मंजूरी मिलने पर ही इसमें कोई बदलाव होगा.

सात साल से नहीं बढ़ी है एमवीआर

जिलों में गठित मूल्यांकन समितियों का मानना है कि पिछले छह-सात वर्षों में जमीन का बाजार मूल्य काफी बढ़ा है, लेकिन एमवीआर में बढ़ोतरी नहीं हो सकी. आखिरी बार 2016 में बड़े स्तर पर एमवीआर में बदलाव हुआ था, जिसमें अलग-अलग जिलों में इसकी दर 10 से 40 फीसदी तक बढ़ायी गयी थी. उसके बाद से एमवीआर नहीं बढ़ा है. उल्टे 2017 में कुछ इलाकों के एमवीआर में संशोधन कर उसमें कमी की गयी थी. समितियों का मानना है कि वर्तमान में कई इलाकों में एमवीआर से अधिक कीमत पर जमीन की खरीदबिक्री हो रही है, जिससे राजस्व की हानि हो रही है.

डीएम की अध्यक्षता में बनी कमेटियों ने भेजी रिपोर्ट

नये एमवीआर के निर्धारण को लेकर जिलों में संबंधित डीएम की अध्यक्षता में गठित जिला मूल्यांकन कमेटियों ने विभाग को रिपोर्ट भेजी है. इस कमेटी में संबंधित जिला अवर निबंधक, अपर समाहर्ता (राजस्व), सभी भूमि उप सुधार समहर्ता, अंचलाधिकारी व राजस्व पदाधिकारी शामिल होते हैं. इनके द्वारा जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों का समेकित रूप से सर्वे कर बाजार दर को ध्यान में रखते हुए एमवीआर का आकलन किया जाता है.

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