शहर में नहीं है वाहन पड़ाव

Published at :16 Jan 2017 3:46 AM (IST)
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शहर में नहीं है वाहन पड़ाव

परेशानी वाहन पड़ाव के अभाव में मुश्किल झेल रहे हैं चालक एवं यात्री हर वर्ष लाखों रुपये में होती है बंदोबस्ती सड़क जाम से हर दिन जूझ रहे हैं लोग बिक्रमगंज : स्थानीय शहर में एक भी वाहन पड़ाव नहीं है, इसके बावजूद भी नगर पंचायत हर वर्ष छोटी और बड़ी गाड़ियों के ग्राउंड टैक्स […]

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परेशानी वाहन पड़ाव के अभाव में मुश्किल झेल रहे हैं चालक एवं यात्री

हर वर्ष लाखों रुपये में होती है बंदोबस्ती
सड़क जाम से हर दिन जूझ रहे हैं लोग
बिक्रमगंज : स्थानीय शहर में एक भी वाहन पड़ाव नहीं है, इसके बावजूद भी नगर पंचायत हर वर्ष छोटी और बड़ी गाड़ियों के ग्राउंड टैक्स वसूली के लिये बंदोबस्त करती है. इससे नगर पंचायत को लाखों रूपये की आय होती है. यदि किसी कारण से बंदोबस्ती नहीं होती है तो नगर पंचायत स्वयं वाहनों से टैक्स की वसूली करती है. इससे होने वाले आय किस मद में खर्च किये जाते है इसकी जानकारी आम लोगों को नहीं होती है. अधिकारी भी इसके संबंध में सही-सही जानकारी नहीं दे पाते है. गौरतलब हो कि आरा-सासाराम के बीच व्यवसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले नगर पंचायत बिक्रमगंज से न केवल बिहार के बल्कि उत्तर प्रदेश और झारखंड के विभिन्न शहरों के लिये प्रत्येक दिन दर्जनों बड़ी-छोटी वाहने खुलती है.
सैकड़ों जीप और टेम्पो सासाराम, आरा, डिहरी, दिनारा, नासरीगंज, कोचस, डुमरांव, कोआथ, मलियाबाग, काराकाट, गोड़ारी, पीरो, आदि शहरों के लिये खुलती है. वाहन पड़ाव नहीं होने के कारण ये सभी वाहनें सड़कों पर ही खड़े रहते है. नगर पंचायत में वाहन पड़ाव का कहीं भी कोई अता-पता नहीं है, फिर भी नगर पंचायत कार्यालय बिक्रमगंज के द्वारा प्रत्येक वर्ष छोटी और बड़ी वाहनों के पड़ाव की बंदोबस्ती लगभग 10 से 15 लाख रूपये में की जाती है. नगर पंचायत के पास वाहन पड़ाव का न तो कोई खाता नम्बर है और न ही कोई प्लॉट जिसे वह बंदोबस्त करती है. जब भी बंदोबस्ती का टेंडर निकाला जाता है, उसमें अंकित होता है कि जीप स्टैंड और बस स्टैंड की बंदीबस्ती की जायेगी. जिसकी संवेदकों के द्वारा बोली भी लगाई जाती है. आश्चर्य की बात है कि इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन को भी है. इसके बाद भी कोई पहल नहीं की जाती है. बंदोबस्ती से प्राप्त रूपये यात्रियों के सुबिधा में खर्च करनी है. यात्रियों के लिये शेड, शौचालय, यूरिनल तथा पेयजल की व्यवस्था करना आदि सुबिधायें उपलब्ध कराना, लेकिन ऐसा इस नगर पंचायत में कुछ भी नहीं है, जबिक कई वर्षो से वाहन पड़ाव की बंदोबस्ती की जा रही है. सड़कों के किनारे चल रहे अघोषित वाहन पड़ावों पर अवैध एजेंटो का पूरी तरह से कब्जा है.
क्या कहते है यात्री : सासाराम से आरा जाने वाले यात्री आरा निवासी प्रदीप कुमार बताते है कि दो घंटे से जाम में फंसा हूं. गाड़ी में भारी सामान के कारण न तो गाड़ी छोड़ते बनती है और न ही इस गर्मी में इसमें बैठते. बक्सर जाने के लिये बस में सवार रांची के व्यापारी राधेश्याम प्रसाद बताते है कि रांची से आने में जितना परेशानी नहीं हुआ उससे कहीं ज्यादा परेशानी बिक्रमगंज को पार करने में हो रही है. यहां कहीं पर भी पुलिस भी नहीं है जो जाम हटवा सके. वाहन चालक बिक्रमगंज निवासी राजू कुमार का कहना है कि प्रत्येक दिन प्रत्येक छोटी गाड़ी से 10 रूपया वसूल किया जाता है. पुछने पर की यह कैसा पैसा वसूल करते है तो वसूल करने वाले लोग गाली-गलौज करने लगते है.
क्या कहते है अधिकारी
यह बंदोबस्ती कई दशक से हो रहा है. इससे प्राप्त राशि का उपयोग नगर की साफ-सफाई में किया जाता है. भूमि के अभाव में वाहनों के लिये स्थायी पड़ाव नहीं बनाया जा सका है.
सुरेश राम, नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी
परिचालन में अनियमितता
अनदेखी . िदयारा में नाव परिचालन की व्यवस्था दुरुस्त नहीं
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