सुबह नौ बजे के बाद नहीं है पैसेंजर ट्रेन

Published at :25 Sep 2015 1:45 AM (IST)
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सुबह नौ बजे के बाद नहीं है पैसेंजर ट्रेन

संवाददाता : बक्सर बक्सर स्टेशन से पढ़ाई, व्यवसाय व नौकरी समेत अन्य कार्यों को लेकर रोजाना हजारों की संख्या में लोकल यात्री डुमरांव, आरा, दानापुर, पटना समेत अन्य स्टेशनों के लिए पैसेंजर ट्रेनों से सफर करते हैं. साथ ही बक्सर स्टेशन को राजस्व भी काफी अच्छा मिलता है. बावजूद इसके लोकल यात्रियों को पैसेंजर ट्रेनों […]

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संवाददाता : बक्सर बक्सर स्टेशन से पढ़ाई, व्यवसाय व नौकरी समेत अन्य कार्यों को लेकर रोजाना हजारों की संख्या में लोकल यात्री डुमरांव, आरा, दानापुर, पटना समेत अन्य स्टेशनों के लिए पैसेंजर ट्रेनों से सफर करते हैं.

साथ ही बक्सर स्टेशन को राजस्व भी काफी अच्छा मिलता है. बावजूद इसके लोकल यात्रियों को पैसेंजर ट्रेनों की कमी की मार झेलनी पड़ती है. रोजाना यात्री घंटों पैसेंजर ट्रेनों की इंतजार करते हैं या फिर एक्सप्रेस व सुपरफास्ट ट्रेनों में जुर्माना भर कर अपने गंतव्य तक पहुंचने को मजबूर हैं.

आलम यह है कि पैसेंजर ट्रेनों में इतनी भीड़ होती है कि यात्री ट्रेन के पायदान और खिड़की पर लटक कर सफर करने को मजबूर हैं.पैसेंजर ट्रेनों की कमी का असर एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन पर भी पड़ता है. सोमवार को बक्सर रेलवे स्टेशन पर लोकल यात्रियों ने हंगामा कर सिकंदराबाद एक्सप्रेस ट्रेन को पैसेंजर ट्रेन के रूप में चलाने की मांग की. अंत में रेलवे ने सिकंदराबाद को सभी स्टेशनों पर रोक कर चलाया.

एक्सप्रेस ट्रेनों पर पड़ता है असर
पैसेंजर ट्रेनों की कमी के कारण यात्रियों को जहां परेशानी उठानी पड़ती है. वहीं, एक्सप्रेस ट्रेनों के यात्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ती है. दरअसल पैसेंजर ट्रेनों के अधिक विलंब होने पर लोकल यात्री स्टेशन पर हंगामा कर एक्सप्रेस ट्रेनों को पैसेंजर ट्रेन के रूप में चलाने की मांग करने लगते हैं. इस तरह की घटना अक्सर शाम के वक्त घटती है.
पटना की ओर जानेवाली पैसेंजर ट्रेन शाम पांच बज कर 15 मिनट पर है. इसके बाद अगली ट्रेन शाम सात बजे के बाद है. ऐसे में पांच बजेवाली पैसेंजर ट्रेन यदि विलंब हो जाये, तो लोकल यात्रियों को एक्सप्रेस ट्रेन का ही सहारा रह जाता है. कई बार यात्रियों ने हंगामा कर एक्सप्रेस ट्रेनों को पैसेंजर ट्रेन के रूप में चलवाया है.
पांच घंटे के अंतराल पर है ट्रेन
बड़े स्टेशनों की बात करें, तो वहां हर एक मिनट पर एक पैसेंजर ट्रेन की सुविधा है, लेकिन बक्सर स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेनों का अंतराल पांच घंटे पर है. पटना की ओर जानेवाली पैसेंजर ट्रेनों में दोपहर 12 बजे के बाद अगली ट्रेन पांच बजे शाम को है. ऐसे में यात्री मजबूरन एक्सप्रेस ट्रेनों में सफर करने पर मजबूर हैं.जबकि अधिकतर एक्सप्रेस ट्रेनों में पटना के लिए टिकट वैध नहीं है. लोकल यात्रियों को जुर्माना भी भरना पड़ता है. पटना व मुगलसराय के लिए 11 पैसेंजर ट्रेने हैं, जिनमें छह पटना और पांच मुगलसराय के लिए हैं.
एक्सप्रेस ट्रेनों में बढ़ी चेन पुलिंग की घटनाएं : पैसेंजर ट्रेनों की कमी के कारण लोकल यात्री एक्सप्रेस ट्रेनों में सवार हो जाते हैं. ऐसे में लोकल यात्री अपने गंतव्य स्टेशन पर उतरने के लिए नन स्टॉपेज ट्रेनों में चेन पुलिंग करते हैं. लगातार कई दिनों से चेन पुलिंग की घटना बढ़ी है.मंगलवार को विक्रमशिला और श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेनों में चेन पुलिंग किया गया, जिसमें तीन लोगों को चेन पुलिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया.
जान जोखिम में डाल करते हैं सफर : पैसेंजर ट्रेनों की कमी के कारण पैसेंजर ट्रेनों में क्षमता से अधिक यात्री सफर करते हैं. यात्री ट्रेनों के पायदान और खिड़कियों पर घंटों लटक कर अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचते हैं. चलती ट्रेन से गिर कर यात्री की मौत की खबर अक्सर सुनने को मिलती है.
मंगलवार को चौसा-बक्सर स्टेशन के बीच पोल संख्या 665/25 के समीप ट्रेन से गिर कर एक 25 वर्षीय युवक मौत हो गयी. बताया जाता है कि अत्यधिक भीड़ होने के कारण उक्त युवक पायदान पर सफर कर रहा था.
क्या कहते हैं स्टेशन प्रबंधक
यात्रियों की परेशानी को देखते हुए पैसेंजर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के लिए उच्च अधिकारियों को लिखित सूचना दी गयी है. आदेश आते ही बक्सर से पैंसेजर ट्रेनों की संख्या बढ़ा दी जायेगी.
एमके पांडेय, बक्सर, स्टेशन प्रबंधक
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