पल भर में ही छिन गयीं कई जिंदगियां
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Sep 2015 8:24 AM (IST)
विज्ञापन

बबुरा-डोरीगंज पुल के 44 नंबर पाये के समीप हुआ यह दर्दनाक हादसा, माहौल गमगीन 54 पायों में से पहले पांच पाये बबुरा पुल घाट पर हैं बबुरा-डोरीगंज पुल पर 54 पाया में से 1 से 5 पाया बबुरा गंगा नदी पर बनाये गये है. इस छोटी गंगा को पार करने के लिए भी नाव का […]
विज्ञापन
बबुरा-डोरीगंज पुल के 44 नंबर पाये के समीप हुआ यह दर्दनाक हादसा, माहौल गमगीन
54 पायों में से पहले पांच पाये बबुरा पुल घाट पर हैं
बबुरा-डोरीगंज पुल पर 54 पाया में से 1 से 5 पाया बबुरा गंगा नदी पर बनाये गये है. इस छोटी गंगा को पार करने के लिए भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है. इस नदी में भी पानी भर गया है. जिसके कारण आवागमन प्रभावित है. जहां पहले छपरा जाने के लिए केवल बड़ी गंगा नदी पार करनी पड़ती थी. अभी पानी होने के कारण बबुरा के समीप छोटी गंगा भी नाव के सहारे पर करना पड़ रहा है.
जिसके कारण बहुत कम लोगों ही भोजपुर से छपरा जा रहे है. लेकिन लोगों को जैसी ही इस घटना की सूचना मिली बबुरा पुल पार कर घटना स्थल पर पहुंचने लगे.
बालू के खेल में फिर जा सकती हैं कई जानें
बबुरा-डोरीगंज पुल पिछले पांच सालों से सुर्खियों मे है. फुहां से लेकर डोरीगंज के कई गांवों में चमकीले रेत का ऐसा खेल चलता है जिसमें कई मजदूरों की जाने जा सकती है. जिस तरह की घटना क्रेन का बूम टूटने की वजह से पाया नंबर 44 के समीप घटी वह घटना भले ही थोड़ी अलग हो लेकिन सारा खेल अवैध बालू बिक्री से जुड़ा हुआ है. छपरा पार से सस्ते में मजदूरों को लाकर 40-40 रुपये प्रति नाव ढुलाई करायी जाती है. वो भी बीना सरकार के राजस्व की. फुहां से लेकर कई गांवों में जिसकी लाठी उसकी भैस के अनुसार बालू की सप्लाई बड़े-बड़े कंपनियों में की जा रही है. जो पुल से लेकर सड़क तक का निर्माण करा रहे है.
भोजपुर डीएम ने सीओ को घटनास्थल पर भेजा
घटना की सूचना मिलते ही भोजपुर जिलाधिकारी डॉ विरेंद्र कुमार ने बड़हरा के सीओ को घटना स्थल पर भेजा. घटना स्थल छपरा में होने के कारण मृतकों के शव तथा जख्मी को ईलाज के लिए छपरा सदर अस्पताल भेज दिया गया है. इस संबंध में भोजपुर जिलाधिकारी ने छपरा जिलाधिकारी से भी बातचीत की.
दिन के उजाले में काला खेल
मजेदार बात यह है कि बीना राजस्व के सस्ते में इसका फायदा कंपनी के कई वर्करों को भी हो जाता है. रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक आप बबुरा के आसपास के घाटों पर चले जाइये, हमेशा यहां इस तरह का काला खेल चलता है.
गंगा के जलस्तर रात में हलचल पैदा करती है. फिर भी मजदूरों को पेट की आग के लिए आगे आना पड़ता है. इसका फायदा दबंग लोग उठा रहे हैं. यदि इस पर अंकुश नहीं लगा तो आनेवाले दिनों में क्रेन का बूम टूटने जैसी मिलती-जुलती घटना भी घट सकती है. तिवारी घाट और बबुरा के बीच 54 पाया है.
जिसमें तिवारी घाट के समीप पहले पाया 44 और 45 के बीच घटना घटी. इस घटना के बाद अफरा – तफरी का माहौल कायम हो गया.
घेंघटा मेला मालिक के परिजनों की थी नाव
बुबुरा-डोरीगंज गंगा नदी में डूबी नाव घेंघटा मेला मालिक स्व विश्वनाथ राय के परिजनों की थी. यह नाव गंगा में डूब गयी थी. नाव के मालिक का कहना था कि पुल निगम द्वारा कराये जा रहे निर्माण कार्य के कारण नदी में जगह – जगह लोहे के छड़ लगे है. जिससे टकरा कर नाव नदी में डूब गयी है.
जिसके बाद पुल निगम द्वारा क्रेन के माध्यम से डूबे नाव को निकालने का कार्य किया जा रहा था. उसी समय क्रेन का बूम टूटा और यह घटना घटी. इस घटना में तीन के मरने तथा दर्जन भर के जख्मी होने की सूचना है. जो पुल निर्माण कार्य में लगे हुए थे.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










