मसाढ़ के कई गांवों में बनती है नकली शराब

Published at :01 Sep 2015 1:33 AM (IST)
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मसाढ़ के कई गांवों में बनती है नकली शराब

40 लोगों की मौत के बाद भी नहीं चेती भोजपुर पुलिस आरा : मसाढ़ के बाहरी इलाके सहित कई गांवों में आज भी नकली शराब बनाने का धंधा जारी है. कारोबारी यूपी से टैंकर से स्पिरिट मंगा कर छोटे-छोटे कारोबारियों को ड्रम-दर-ड्रम सप्लाइ करते हैं. इसके बाद नकली शराब के पाउच तैयार होते हैं. तैयार […]

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40 लोगों की मौत के बाद भी नहीं चेती भोजपुर पुलिस
आरा : मसाढ़ के बाहरी इलाके सहित कई गांवों में आज भी नकली शराब बनाने का धंधा जारी है. कारोबारी यूपी से टैंकर से स्पिरिट मंगा कर छोटे-छोटे कारोबारियों को ड्रम-दर-ड्रम सप्लाइ करते हैं. इसके बाद नकली शराब के पाउच तैयार होते हैं.
तैयार शराब को लाइसेंसी दुकानों पर सेल्समैन तथा कई जगह मालिकों को मिला कर अवैध तरीके से बेचा जाता है. इसकी जानकारी शराब के शौकीनों को नहीं है.
अधिकतर क्षेत्र जहां -जहां नकली शराब बनायी जाती है, वहां के बारे में उस क्षेत्र की पुलिस को जानकारी होती है, लेकिन पुलिस जान-बूझ कर निष्क्रिय बनी रहती है.
यूपी से आता है स्पिरिट का टैंकर : अवैध शराब कारोबारियों की पकड़ यूपी तक है. एक स्पिरिट टैंकर की कीमत 7 लाख 20 हजार रुपये से लेकर 9 लाख तक होती है. अवैध शराब कारोबारी वेबरेज के नाम पर चालान पहले से मंगवा लेते हैं और रात के अंधेरे में टैंकर किसी गांव के कोने में खड़ा कर दिया जाता है.
वहीं से काट कर (निकाल कर ) छोटे – छोटे अवैध शराब कारोबारियों को ड्रम में स्पिरिट सप्लाइ कर दी जाती है. इसके बाद कारोबारी अपने – अपने क्षेत्रों में ले जाकर अवैध शराब के पाउच तैयार करते हैं.
स्कूल की बगल में बिकती है शराब : जहरीला शराबकांड की याद अब भी सबों की जेहन में ताजा है.वर्ष 2012 में 40 से ज्यादा लोग मौत के मुंह में समा गये थे. तब जिला प्रशासन ने अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगा दी थी. परचुनिया (दुकान से अन्यत्र जगह ले जाकर बिक्री करनेवाला) को देखते ही गिरफ्तार कर लेने का आदेश दिया गया था, लेकिन कृष्णगढ़ थाना क्षेत्र के गुंडी एक ऐसा गांव है, जहां एक स्थान पर ही नहीं, बल्कि दर्जन से ज्यादा स्थानों पर खास कर नाश्ते कीदुकान व किराना पर खुलेआम देसी से लेकर विदेशी शराब की बिक्री की जा रही है.
सरैंया – गुंडी पथ पर मां मत्रयनी स्कूल, स्कूल में जिस तरह से पियक्कड़ों का जमावड़ा लगा रहता है, उससे स्कूल जानेवाले बच्चे दहशत में रहते हैं. अधिकतर थाना क्षेत्रों के प्रशासनिक अधिकारियों को यह पता रहता है कि अवैध तरीके से शराब की बिक्री हो रही है, फिर भी उन्होंने चुप्पी साध रखी है. यदि प्रशासन ने इस पर रोक नहीं लगायी, तो आनेवाले दिनों में जहरीला शराबकांड दोहराया जाये.
दुकान पर रेट ज्यादा, परचुनिया के पास मिलता है कम में : देसी शराब लाइसेंसी दुकान पर 35 रुपये प्रति पीस बिक रही है, जबकि इन क्षेत्रों में परचुनिया के पास जाइयेगा, तो प्रति पाउच की बोतल मात्र 25 रुपये में ही मिल जायेगी. शराब के शौकीनों को तो बस पीने से मतलब है. जहां सस्ता मिलेगा वहां वे पहुंच जाते हैं. ऐसे में लाइसेंसी शराब की दुकान वालों को भी चुना लगने लगता है. यहां सवाल यह है कि जब लाइसेंसी दुकानदार इन्हें शराब नहीं देते, तो कहां से इनके पास पाउच की बोतलें आ जातीं. कई बार उत्पाद विभाग व पुलिस के रेड में भारी मात्र में शराब पकड़ी जाती है.
एक लीटर स्पिरिट से तैयार होते है 30 पाउच
एक टैंकर में 12 हजार से लेकर 18 हजार लीटर स्पिरिट रहती है. एक लीटर में 30 पाउच तैयार किये जाते हैं. उस हिसाब से यदि 12 हजार लीटर स्पिरिट है, तो उसमें 3 लाख 60 हजार पाउच होते हैं, जबकि 18 हजार में इसका रेसियो बढ़ जाता है और उससे 5 लाख 54 हजार पाउच तैयार हो जाते हैं, जिसकी कुल कीमत 30 लाख से ऊपर की होती है.
इसकी पुष्टि जिले में एक्साइज विभाग की पुलिस द्वारा कभी – कभार रेड में जब्त की गयी नकली शराब से अक्सर होती रही है. इन अवैध शराब कारोबारियों की वजह से प्रति माह सरकार के राजस्व को करीब 1 करोड़ से ज्यादा का नुकसान होता है.
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