पिता को समर्पित कवियों की एक शाम

Published at :21 Jun 2015 11:28 AM (IST)
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पिता को समर्पित कवियों की एक शाम

प्रभात खबर ने कराया फादर्स डे की पूर्व संध्या पर काव्य पाठ आरा : फादर्स डे के पूर्व संध्या पर पिता एवं पितृत्व को सम्मान देने के लिए प्रभात खबर द्वारा बार एसोसिएशन के पुस्तकालय कक्ष में विचार गोष्ठी एवं कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामाधार सिंह ने […]

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प्रभात खबर ने कराया फादर्स डे की पूर्व संध्या पर काव्य पाठ
आरा : फादर्स डे के पूर्व संध्या पर पिता एवं पितृत्व को सम्मान देने के लिए प्रभात खबर द्वारा बार एसोसिएशन के पुस्तकालय कक्ष में विचार गोष्ठी एवं कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामाधार सिंह ने किया. कवि गोष्ठी का उद्घाटन बार के सचिव राजेश कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय ने किया.
वहीं कवि नंद किशोर कमल ने कहा कि भगवान को हमने नहीं देखा परंतु जब भी मैं भगवान की कल्पना करता हूं, तो मेरे नजरों के सामने माता-पिता का चेहरा नजर आता है. पिता ही परिवार का पालन हार यानी विष्णु होता है.
कवि अलख अनाड़ी ने कहा कि पिता का प्यार पाना धरती पर सबसे बड़ी उपलब्धि है. किसी भी व्यक्ति का सबसे बड़ा दुर्भाग्य उसके पिता का न होना या पिता के होने के बावजूद उनका मार्ग दर्शन न होना है.
गोष्ठी में दाउजी पांडेय ने कहा कि आज के इस बदलते दौर में भी किसी पुत्र का भविष्य उसके पिता की ईमानदारी कर्मनिष्ठा तथा सजगता पर निर्भर करता है. कवि सियाराम दूबे ने कहा कि अच्छी तरह जीने की राह एक पिता ही अपनी संतानों को दे सकता है. आज कल पिता की सेवा अर्थ पर आधारित हो गया है. साहित्य कार सतीश कुमार ने कहा कि पिता का महत्व हमारी जिदंगी में सर्वोच्य स्थान रखता है. पिता का बिना हमारा जीवन अधुरा होता है. उन्होंने इस पर एक कविता भी प्रस्तुत किया. कविता पिता के महत्व वे ही जाने जिनके पिता नहीं, पिता नहीं तो खोज लो न मिलेंगे कहीं..
का पाठ किया. अरुण सिंह ने कहा कि हर पुत्र एवं पुत्री को पिता हीं दुनिया दिखाता है. प्रभुलाल प्रसाद ने कहा कि मानवता की शुरुआत पिता के मार्ग दर्शन में होता है. युवा कवि शरद सिंह ने कहा कि पिता परिवार का स्तंभ होता है. एक पिता 100 शिक्षकों से बड़ा होता है. कवि दीपक कुमार ने कहा कि पिता धरती पर भगवान होता है. उन्होंने पिता को समर्पित गीत गाकर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवियों ने अपनी-अपनी नूतन नवीन कविताओं का पाठ किया. काव्य पाठ करनेवालों में नंद किशोर कमल दाउजी पांडेय, शरद सिंह, अलख अनाडी, सतीश कुमार, सियाराम दूबे, प्रभु लाल प्रसाद, विजय चंद्र पाठक, दीपक कुमार, पप्पू पांडेय आदि प्रमुख है.अतिथियों का स्वागत सत्येंद्र नारायण सिंह एवं विष्णु सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन पप्पू पांडेय ने किया. बार के सचिव पप्पू पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रभात खबर की पहल की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि किसी अखबार की ओर यह पहला कार्यक्रम है, जिसमें स्थानीय कवियों को प्रमुखता से जगह दी गयी है.
फादर्स डे की शुरुआत वज्रेनियां प्रांत से हुई : संजय
युवा कवि संजय कुमार उर्फ अतुल प्रकाश ने कहा कि फादर्स डे की शुरुआत 20वीं सदी में संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिम वज्रेनियां प्रांत से हुई. पांच जुलाई, 1908 में इसे पहली बार मनाया गया और तब से जून के तीसरे सप्ताह में इसे मनाने की परंपरा चली आ रही है.
पित शब्द ऋग्वेद एवं परवर्ती साहित्य में पितृ, पितर के रूप में आया है. संस्कृत के पितर शब्द का समानार्थी ही अंगरेजी का फादर्स शब्द है. प्राचीन भारतीय साहित्य में पिता को शिशु को उत्पन्न करनेवालों की अपेक्षा शिशु के रक्षक एवं पालक के अर्थ में अधिक प्रयुक्त हुआ है. पिता की तुलना अगिA एवं आकाश से की गयी है. प्राचीन भारतीय साहित्य में पिता-पुत्र संबंध को बड़े ही मार्मिक ढंग से दर्शाया गया है.
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