जनता के लिए हो लेखन : मुधकर

Updated at :22 Sep 2013 10:39 PM
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जनता के लिए हो लेखन : मुधकर

संवाददाता, आरा नागरी प्रचारिणी सभागार में कथाकार मधुकर सिंह के सम्मान में एक सम्मान समारोह हुआ. जसम के राष्ट्रीय महासचिव प्रणय कृष्ण ने एक मानपत्र, शाल और 25 हजार रुपये का चेक देकर उन्हें सम्मानित किया. मधुकर सिंह ने कहा कि जो लेखक अपनी जनता के लिए लिखेगा, वहीं इतिहास में बना रहेगा. कवि कृष्ण […]

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संवाददाता, आरा

नागरी प्रचारिणी सभागार में कथाकार मधुकर सिंह के सम्मान में एक सम्मान समारोह हुआ. जसम के राष्ट्रीय महासचिव प्रणय कृष्ण ने एक मानपत्र, शाल और 25 हजार रुपये का चेक देकर उन्हें सम्मानित किया. मधुकर सिंह ने कहा कि जो लेखक अपनी जनता के लिए लिखेगा, वहीं इतिहास में बना रहेगा. कवि कृष्ण कल्पित ने सम्मान समारोह को एक अनुकरणीय उदाहरण बताते हुए कहा कि सही मायने में मधुकर सिंह एक श्रमजीवी लेखक हैं. रंगकर्मी राजेश कुमार ने कहा कि भोजपुर से अभिजात्य और सामंती समाज के खिलाफ जनता के रंगकर्म की जो धारा फूटी उसका श्रेय मधुकर सिंह को जाता है. मदन मोहन ने मधुकर सिंह के जन सांस्कृतिक आंदोलन के हमसफर बनने के कारणों का उल्लेख किया.

इसके अलावे मधुकर सिंह के अंतरंग साथी श्रीराम तिवारी, वरिष्ठ कवि जगदीश नलीन, युवानीति के पूर्व सचिव सुनील सरीन, पत्रकार श्रीकांत, कथाकार आनंत कुमार सिंह, रंगकर्मी विंदेश्वरी, अरुण नारायण, पत्रकार पुष्प राज, संस्कृति सुदामा प्रसाद, कवयित्री उर्मिला कौल एवं अरविंद कुमार आदि ने मधुकर जी से जुड़ी यादों को ताजा किया. सम्मान सत्र की अध्यक्षता प्रो पशुपति नाथ सिंह, सुरेश कांटक और बनाफर चंद्र ने किया. मंच संचालन कवि जितेंद्र कुमार ने किया. सम्मान समारोह में कथाकार रामधारी सिंह दिवाकर, अशोक कुमार सिन्हा, वाचस्पति समेत कई जाने माने साहित्यकार उपस्थित थे. वहीं दूसरे सत्र में कथाकार मधुकर सिंह साहित्य में लोक तंत्र की आवाज विषय पर विचार- विमर्श के दौरान वक्ताओं ने उनके साहित्यिक योगदान को चिह्न्ति किया. लखनऊ से आये कहानीकार सुभाष चंद्र कुशवाहा ने कहा कि जाति का विकास, जाति का नेता ही कर सकता है. इस धारणा को मधुकर सिंह की कहानियां गलत साबित करती है. युवा कहानीकार रणोंद्र(रांची) ने कहा कि मधुकर सिंह की कहानियों में वर्ण से उत्पन्न पीड़ा तो है, पर वह चेतना वर्ग तक जाती है.

आलोचक प्रो रवींद्र नाथ राय ने कहा कि सामाजिक मुक्ति और आर्थिक आजादी के लिए गरीब मेहनतकश का जो संघर्ष है, उसे मधुकर सिंह ने लिखा है. वरिष्ठ आलोचक खगेंद्र ठाकुर ने मधुकर सिंह को जीवन और समाज के यथार्थ के प्रति सचेत कथाकार बताया. कवि चंद्र शेखर ने कहा कि मधुकर सिंह की कहानियां भारतीय लोकतंत्र के झूठ का परदफाश करती है. कथाकार नीरज सिंह ने कहा कि मधुकर सिंह का सम्मान केवल भोजपुर ही नहीं बल्कि पूरे देश की जनधर्मी संघर्षशील साहित्य परंपरा के लिए गौरव की बात है. इसके अलावे आलोचक रवि भूषण, सुधीर सुमन, गीतकार नचीकेता, बलभद्र तथा कहानीकार शिव कुमार यादव ने भी अपनी बात को रखा. दूसरे सत्र की अध्यक्षता खगेंद्र ठाकुर, रवि भूषण एवं नीरज सिंह ने संयुक्त रूप से किया.

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