मुखिया हत्याकांड में गवाह से जिरह
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Jul 2013 1:31 PM
आरा : प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसएस श्रीवास्तव के न्यायालय में ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड के गवाह जिला कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष डॉ कमलाकांत शर्मा की गवाही हुई. बचाव पक्ष के वरीय अधिवक्ता भुनेश्वर तिवारी ने सोमवार को गवाह के परीक्षण के बाद प्रतिपरीक्षण (जिरह) के दौरान गवाह के कही गयी बातों को प्रथम […]
आरा : प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसएस श्रीवास्तव के न्यायालय में ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड के गवाह जिला कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष डॉ कमलाकांत शर्मा की गवाही हुई.
बचाव पक्ष के वरीय अधिवक्ता भुनेश्वर तिवारी ने सोमवार को गवाह के परीक्षण के बाद प्रतिपरीक्षण (जिरह) के दौरान गवाह के कही गयी बातों को प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कलमबद्ध किया.
अभियोजन पक्ष के अपर लोक अभियोजक विष्णुधर पांडेय द्वारा किये गये परीक्षण के दौरान गवाह ने कहा था कि रंगदारी मांगने के मामले को लेकर योगेंद्र पांडेय से मुखिया जी का गरमा-गरम बहस हुई थी और देख लेने की बात भी कही गयी थी. उनको विश्वास है कि उक्त कांड के अभियुक्तों ने ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या की है.
जिरह के दौरान गवाह बोले
कोर्ट में वरीय अधिवक्ता भुनेश्वर तिवारी द्वारा प्रतिपरीक्षण के दौरान पहला गवाह डॉ कमलाकांत शर्मा ने कहा कि रंगदारी मांगने का मुकदमा न्यायिक दंडाधिकारी आशुतोष कुमार सिंह के न्यायालय में ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्या कांड के भी अभियुक्त योगेंद्र पांडेय व प्रिंस पांडेय के खिलाफ चल रहा है.
इन दोनों के अलावा और कोई अभियुक्त नहीं है. गवाह ने कहा कि ब्रह्मेश्वर मुखिया के संगठन से नहीं जुड़े हैं. उनको जानकारी नहीं है कि मुखिया जी रणवीर सेना के सुप्रीमो कहे जाते थे, निजी स्कूल संचालक देवेश से रंगदारी मांगने के मामले को लेकर 29 मई को घर गया था. उसने संगठन की बैठक में उक्त बात को रखने का सुझाव दिया और उनसे कहा कि एक समूह बना कर योगेंद्र पांडेय से बात की जाये. समूह में साथ चलने की बात नहीं कही थी.
योगेंद्र पांडेय से मिलने के लिए कब गये उन्हें पता नहीं है और न ही तहकीकात की. इससे पहले ब्रह्मेश्वर मुखिया से कभी बात नहीं हुई थी. उनकी हत्या की सूचना पाकर गांव से मोटरसाइकिल द्वारा शव के पास पहुंचे. वहां 10 से 15 मिनट रहे. संवेदना प्रकट करने के लिए उनके घर नहीं गया था.
वहां चर्चा का विषय था कि मुखिया जी योगेंद्र पांडेय को समझाने गये थे और उनके बीच गरमा-गरम बातें और देखने और देख लेने की बात हुई थी. पुलिस अधीक्षक से मिलने के लिए आवास पर गया था. मुखिया जी से मिला था. यह बात आरा में किसी अन्य व्यक्ति से नहीं कहा.
मुखिया जी की हत्या एक जून को हुई थी. रंगदारी मांगने को लेकर मुकदमा 3 जुलाई, 2012 को हुआ था. बचाव पक्ष के अधिवक्ता वीरेंद्र पांडेय, गणोश पाठक, सत्येंद्र सिंह दारा सहित सभी अभियुक्त उपस्थित थे. उक्त गवाह का प्रतिपरीक्षण जारी रखते हुए कोर्ट ने मंगलवार को तिथि निश्चित की है.
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