अरबों खर्च करने के बाद भी नगर बदहाल, निगम की कार्यशैली पर सवाल
Author Prabhat khabar digital desk
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आरा : अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी आरा नगर निगम क्षेत्र अब भी बदहाल है. खुली नालियां, सड़क पर तथा सड़कों के किनारे कचरा नगर की पहचान बन चुकी है. निगम की कार्यशैली में सुधार नहीं होने के कारण स्वच्छता रैंकिंग में सुधार नहीं हो रहा है. इस कारण नगर केंद्र सरकार की […]
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आरा : अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी आरा नगर निगम क्षेत्र अब भी बदहाल है. खुली नालियां, सड़क पर तथा सड़कों के किनारे कचरा नगर की पहचान बन चुकी है. निगम की कार्यशैली में सुधार नहीं होने के कारण स्वच्छता रैंकिंग में सुधार नहीं हो रहा है. इस कारण नगर केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना से बाहर होने के कगार पर है. निगम द्वारा निर्धारित मानक पूरा नहीं करने से पहले ही नगर को काफी आर्थिक क्षति हो चुकी है. इससे नगरवासी काफी परेशान है.
स्वच्छता रैंकिंग में नहीं हो रहा सुधार
स्मार्ट सिटी योजना से बाहर होने का है खतरा
स्मार्ट सिटी के लिए स्वच्छता है पहली शर्त
स्मार्ट सिटी के लिए स्वच्छता सबसे पहली शर्त है. स्वच्छता के मानदंड पर खरा उतरने पर ही सरकार द्वारा स्मार्ट सिटी को मिलनेवाली सुविधाएं दी जायेगी. इसके लिए कई तरह के मानक तय किये गये हैं, ताकि निगम प्रशासन द्वारा नगरवासियों के हित को देखते हुए उस मानक को तत्परता से पूरा किया जाये, पर निगम की सुस्ती व लापरवाही के कारण मानक पूरा नहीं हो पा रहा है.
लगभग सौ लोगों ने ही डाउनलोड किया है स्वच्छता एप: स्वच्छता एप का सर्वेक्षण में काफी महत्व है. इसके लिए केंद्र सरकार ने इस एप की शुरुआत की थी, पर नगर निगम द्वारा प्रचार नहीं किये जाने से लगभग सौ लोगों ने ही स्वच्छता एप को डाउनलोड किया है. जबकि स्वच्छता एप पर 600 अंक निर्धारित है.
चार तरह से तय की जाती है रैंकिंग
कचरे को कचरा वाहनों में ढक कर ले जाना होता है. घर से कचरा प्वाइंट पर कचरा ले जाने की विधि, कचरा परिवहन का स्तर, घरों में कचरा संग्रहण की व्यवस्था, कचरा प्वाइंट से कचरा ट्रेचिंग तक परिवहन की स्थिति, टिपर द्वारा प्रतिदिन घर-घर से कचरा उठाव की स्थिति, ठोस कचरा प्रबंधन, बाजारों, बस स्टैंड, पार्क, मॉल, सिनेमा घरों, स्कूल-कॉलेज में सफाई की व्यवस्था पर भी अंक मिलते हैं. वहीं टिपर द्वारा खाली भूंखंडों तथा सड़कों के किनारे कचरा नहीं फेंकना है. नगर को खुले में शौचमुक्त होना मानदंड में शामिल है.
स्वच्छता को लेकर प्रचार प्रसार है जरूरी: स्वच्छता को लेकर प्रचार प्रसार जरूरी है. इसके लिए कई तरह से प्रचार प्रसार करना है, ताकि लोगों में जागरूकता आये, पर निगम प्रचार-प्रसार में पूरी तरह फिसड्डी साबित हो रहा है.
स्वच्छता में नहीं सुधर रही रैंकिंग
स्वच्छता में केंद्र सरकार द्वारा प्रतिवर्ष सर्वेक्षण के आधार पर नगरों की रैंकिंग की जाती है, पर आरा नगर निगम की रैंकिंग में सुधार नहीं हो पा रहा है. वर्ष 2015 में पांच शहरों की सूची में आरा की रैकिंग 391 थी. जबकि वर्ष 2016 में रैंकिंग 393 थी. वहीं वर्ष 2017 में 390 है. नगर निगम की लापरवाह कार्यशैली नगरवासियों की सुविधा पर भारी पड़ रही है. नगर निगम की लापरवाही से नगर को स्मार्ट सिटी योजना से बाहर होने का खतरा उत्पन्न हो गया है.
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