किसानों को सिखाये गये उन्नत खेती के गुर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Dec 2017 7:08 AM (IST)
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विश्व मृदा दिवस. कहीं स्वायल हेल्थ कार्ड का हुआ वितरण, कहीं किसानों को दिया गया प्रशिक्षण आरा : विश्व मृदा दिवस पर कृषि विभाग ने कई कार्यक्रम आयोजित किये. मृदा दिवस पर कहीं किसानों को कृषि से संबंधित कई विषयों को लेकर प्रशिक्षित किया गया, वहीं कई जगह पैदावार की अधिक उपज के लिए स्वायल […]
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विश्व मृदा दिवस. कहीं स्वायल हेल्थ कार्ड का हुआ वितरण, कहीं किसानों को दिया गया प्रशिक्षण
आरा : विश्व मृदा दिवस पर कृषि विभाग ने कई कार्यक्रम आयोजित किये. मृदा दिवस पर कहीं किसानों को कृषि से संबंधित कई विषयों को लेकर प्रशिक्षित किया गया, वहीं कई जगह पैदावार की अधिक उपज के लिए स्वायल हेल्थ कार्ड का वितरण किया गया. मृदा दिवस कृषि कार्य के लिए महत्वपूर्ण दिवस है. आधुनिक खेती तथा पैदावार बढ़ाने के लिए कई वैज्ञानिक तरीके अपनाये जा रहे हैं. इनमें से महत्वपूर्ण तरीका मिट्टी की जांच है. मिट्टी की जांच के बाद उसके अनुरूप फसल की बोआई करने से पैदावार में काफी वृद्धि होती है और किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है.
किसानों के बीच बांटा गया स्वायल हेल्थ कार्ड : बड़हरा प्रखंड में किसानों के बीच स्वायल हेल्थ कार्ड का वितरण किया गया. लगभग ढाई सौ से अधिक किसानों को हेल्थ कार्ड का वितरण किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर प्रखंड उपप्रमुख संपत सिंह ने किया. जिला कृषि पदाधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में आत्मा के उप परियोजना निदेशक राणा राजीव रंजन कुमार ने कहा कि किसानों द्वारा खेत से मिट्टी लेकर कृषि विभाग में देने के बाद उसकी जांच की जाती है तथा उसके आधार पर स्वायल हेल्थ कार्ड बनाया जाता है.
कृषि विज्ञान केंद्र में विश्व मृदा दिवस पर कृषक सेमिनार सह किसान मेले का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन विधान पार्षद राधाचरण सेठ ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कृषि देश की आर्थिक रीढ़ है. किसान समाज के सम्मानित अंग हैं. किसानों की सुविधा के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करनी चाहिए ताकि पैदावार में वृद्धि हो सके और किसानों का जीवन स्तर सुधर सके. इस अवसर पर कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कई विषयों की तकनीकी जानकारी दी. सेमिनार में कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयक डॉ पीके द्विवेदी ने भूमि स्वास्थ्य सुधारने को लेकर किसानों को विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि अच्छी मिट्टी में ही अच्छी पैदावार की कल्पना की जा सकती है. इस कारण किसानों को मिट्टी का स्वास्थ्य हमेशा ठीक रखने का प्रयास करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मिट्टी में कई तरह के अवांछित तत्व मिल जाने से उसकी उपजाऊ क्षमता कम हो जाती है. इस कारण पैदावार में भी कमी आ जाती है. किसानों को इस पर ध्यान रखना चाहिए. रबी फसलों की तकनीकी जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि रबी फसलों में कब पानी देना चाहिए. वहीं किस तरह और कब इसकी बोआई करनी चाहिए. इसको देखते हुए किसानों को रबी फसल की बोआई करनी चाहिए. वहीं डॉ नीलेश कुमार ने मिट्टी व पानी के जांच की तकनीकी जानकारी किसानों को दी. वहीं रबी फसलों में दिये जानेवाली खाद व मात्रा की जानकारी विस्तार से दी. उन्होंने रबी फसल के अनुसार खाद की प्रकार तथा उचित मात्रा देने से ही अधिक पैदावार का लाभ लिया जा सकता है. इस अवसर पर काफी संख्या में किसान, कृषि सलाहकार व कृषि समन्वयक आदि उपस्थित थे.
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