एक ही डाॅक्टर के भरोसे बड़हरा पीएचसी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Jul 2017 6:31 AM (IST)
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उदासीनता . चिकित्सीय उपकरणों की भी है कमी बड़हरा : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अब भी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. सरकार एक तरफ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की बात करती है, पर दूसरी तरफ स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जहां सतरंगी चादर योजना फेल है. वहीं बेड की स्थिति भी […]
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उदासीनता . चिकित्सीय उपकरणों की भी है कमी
बड़हरा : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अब भी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. सरकार एक तरफ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की बात करती है, पर दूसरी तरफ स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जहां सतरंगी चादर योजना फेल है. वहीं बेड की स्थिति भी काफी दयनीय है. पूरे प्रखंड के मरीजों की आशा का केंद्र यह अस्पताल मरीजों की आशाओं पर खरा नहीं उतर पा रहा है. जितने भी कार्यरत चिकित्सक हैं वे प्रतिदिन नहीं आते हैं.
बारी-बारी से अपने द्वारा निर्धारित दिन को ही आते हैं. इस कारण मरीजों को काफी परेशानी होती है. सरकार द्वारा प्रदत्त सुविधाएं उन्हें नहीं मिल पाती है. एक तरफ मरीजों की काफी संख्या है और दूसरी तरफ चिकित्सकों की नगण्य संख्या से अस्पताल में चिकित्सा की स्थिति दयनीय है. वहीं पीएचसी के भवन की भी स्थिति दयनीय है. इतना ही नहीं पीएचसी में चिकित्सीय उपकरणों की कमी से मरीजों की चिकित्सा में काफी व्यवधान उत्पन्न होता है. महिलाओं का प्रसव आज भी पूर्व की स्थिति में पहुंच गया है. चिकित्सक के नहीं होने से प्रसव कराने का काम नर्स करती हैं. इससे हमेशा खतरा बना रहता है,
जिससे प्रसव के दौरान महिलाओं को काफी परेशानी होती है. 22 पंचायतोंवाले प्रखंड में विभिन्न गांवों से मरीज स्वास्थ्य जांच के लिए पीएचसी में आते हैं. लेकिन चिकित्सकों की लापरवाही के कारण मरीजों को समुचित इलाज का फायदा नहीं मिल पाता है. अकसर स्वास्थ्यकर्मी गायब रहते हैं. स्वास्थ्य केंद्र परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था अच्छी नहीं है. सफाई के लिए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को काफी मशक्कत करनी पड़ती है.
डॉक्टरों और मरीजों के लिए बने शौचालय साफ-सफाई के अभाव में बंद है. पीने के लिए पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है. रात्रि में बिजली जाने के बाद ऊमस भरी गरमी और अंधेरे में ही मरीजों को रात गुजारनी पड़ती है. वहीं एक्सरे व जांच की भी व्यवस्था नहीं है.
मरीजों को नहीं मिलती है एक्सरे व जांच की सुविधा
सरकार द्वारा मरीजों की सुविधा के लिए सरकारी अस्पतालों में एक्सरे व जांच की व्यवस्था करने की बात बार-बार कही गयी है. पर अब भी हर जगह धरातल पर मरीजों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है. इस कारण पीएचसी के मरीजों को एक्सरे व जांच के लिए बाजार में जाना पड़ता है. जहां एक्सरे व जांच की सुविधा तो है, पर काफी महंगी है. इससे गरीब मरीजों को काफी परेशानी होती है.
अस्पताल के भवन की स्थिति है दयनीय
पीएचसी के भवन की स्थिति काफी दयनीय है. फर्श कई जगह टूट-फूट गया है. वहीं कमरे भी काफी खराब हो चुके हैं. अस्पताल की छत की हालत ऐसी है कि बरसात में छत से पानी टपकते रहता है. दीवारों में भी सीलन की स्थिति बनी रहती है. इससे भरती मरीजों व परिजनों को काफी परेशानी होती है. उनकी आशा पर पानी फिर जाता है.
महज एक चिकित्सक के सहारे चलता है अस्पताल
अस्पताल में आठ चिकित्सकों का पद स्वीकृत है, पर वर्तमान में महज एक ही चिकित्सक कार्यरत है. इस कारण मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था पर काफी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है. मरीज मजबूरी में निजी क्लिनिकों में चले जाते हैं, ताकि सुविधाजनक चिकित्सा पा सकें. इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. मरीजों के इलाज के लिए समुचित व्यवस्था करने में सरकार विफल साबित हो रही है.
इमरजेंसी सेवा नहीं है चालू
अस्पताल में इमरजेंसी सेवा चालू नहीं है. इमरजेंसी मरीजों को अस्पताल जाने पर निराशा हाथ लगती है. उन्हें चिकित्सकों द्वारा आरा सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है. अस्पताल में इमरजेंसी सेवा सुविधा नहीं होने से मरीजों का काफी समय बरबाद हो जाता है. इससे उनके जीवन पर संकट मंडराता रहता है. कभी-कभी जान भी चली जाती है.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
सीमित साधन में भी मरीजों की सुविधाओं का ख्याल रखा जाता है. यहां लगभग सभी प्रकार की दवाएं उप्लब्ध हैं. ऑक्सीजन की व्यवस्था उपलब्ध है.
डॉ अरविंद कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी
अस्पताल में चिकित्सकों की काफी कमी है. जबकि अधिक संख्या में मरीज चिकित्सा के लिए आते हैं. पर उनका इलाज चिकित्सकों की कमी के कारण ठीक ढंग से नहीं होता है.
संझारो देवी, बड़हरा
क्या कहते हैं मरीज
सतरंगी चादर बेड पर नहीं बिछायी जाती है. इससे गरमी के दिन में संक्रमण होने का भय बना रहता है. इस पर कार्रवाई नहीं की जा रही है.
चंदीप साह, सेमरिया
महिला चिकित्सक नहीं होने से महिला मरीजों को काफी परेशानी होती है. प्रसव के समय तो इसमें और भी कठिनाई होती है. अस्पताल में महिला चिकित्सकों की पदस्थापना किया जाना चाहिए.
चंद्रावती देवी, करजा
चिकित्सकों के कुल स्वीकृत पद8
कार्यरत चिकित्सक1
महिला चिकित्सक0
एएनम की कुल स्वीकृत पद60
कार्यरत एएनम28
संविदा एएनम20
ड्रेसर1
कुल बेडों की संख्या6
उपलब्ध4
स्वास्थ्य कर्मी80
चपरासी के कुल पद5
कार्यरत5
आउटडोर दवाएं28
उपल्बध दवाएं26
इनडोर दवाएं32
उपलब्ध दवाएं 24
कंपाउंडर के स्वीकृत पद1
कार्यरत1
स्वास्थ्य उप केंद्र27
दवा वितरण के लिए की गयी है व्यवस्था
अस्पताल में मरीजों को दवा वितरण के लिए काउंटर बना हुआ है. पर काउंटर पर कर्मी काफी कम समय उपलब्ध रहते हैं. इससे मरीजों को काफी परेशानी होती है. जबकि सरकार द्वारा मरीजों को अस्पताल में दवा उपलब्ध कराने की बात कही जाती है.
सतरंगी चादर व्यवस्था है फेल : मरीजों की सुविधा के लिए तथा स्वास्थ्य लाभ में साफ-सफाई की महत्ता को देखते हुए सरकार ने सतरंगी चादर योजना लागू की थी, ताकि प्रतिदिन मरीजों को अलग-अलग रंगों में बिस्तर पर चादर दी जा सके. पर अस्पताल में मरीजों को यह सुविधा नहीं दी जा रही है. इस कारण मरीजों की स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है.
छह की जगह चार ही बेड से चलता है काम
छह बिस्तरोंवाला अस्पताल आज कुव्यवस्था का शिकार है. अस्पताल में छह बेड स्वीकृत है, पर अभी उसमें महज चार ही बेड लगाये गये हैं. इससे काफी संख्या में जुटनेवाले मरीजों का इलाज कैसे हो पायेगा. यह विभाग ही बता सकता है. बहरहाल मरीजों की दुर्दशा की स्थिति ऐसी है कि उन्हें जमीन पर लिटा कर इलाज किया जाता है. इससे मरीजों में काफी असंतोष दिखाई पड़ता है.
सीएचसी का हो चुका है उद्घाटन, पर मरीजों को नहीं दी जा रही सुविधा: सीएचसी का उद्घाटन हो चुका है. इसके निर्माण पर लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं. इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों को इसकी सुविधा नहीं दी जा रही है.
इससे मरीजों को सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गयी सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
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