मजदूरों ने गैस प्लांट में उत्पादन कराया ठप

Published at :02 Jul 2017 1:27 AM (IST)
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मजदूरों ने गैस प्लांट में उत्पादन कराया ठप

आरा/कोइलवर : कोइलवर थाना क्षेत्र के गीधा इंडस्ट्रियल क्षेत्र में इंडेन गैस प्लांट गीधा में विस्थापित भूमिहीन परिवार के सदस्योंनेअस्थायी से स्थायी नियोजन किये जाने को लेकर प्लांट के गेट पर धरना- प्रदर्शन किया. इसकी वजह से गैस लोड करने के लिए आनेवाले व गैस लोड कर एजेंसी जानेवाले वाहन प्लांट के अंदर फंसे रहे. […]

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आरा/कोइलवर : कोइलवर थाना क्षेत्र के गीधा इंडस्ट्रियल क्षेत्र में इंडेन गैस प्लांट गीधा में विस्थापित भूमिहीन परिवार के सदस्योंनेअस्थायी से स्थायी नियोजन किये जाने को लेकर प्लांट के गेट पर धरना- प्रदर्शन किया. इसकी वजह से गैस लोड करने के लिए आनेवाले व गैस लोड कर एजेंसी जानेवाले वाहन प्लांट के अंदर फंसे रहे.

वहीं कर्मियों के नहीं आने से इंडेन ऑयल बॉटलिंग प्लांट में उत्पादन पूर्ण रूप से ठप रहा. सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन प्लांट पहुंच कर आंदोलन कर रहे लोगों के साथ वार्ता करने का प्रयास किया लेकिन विस्थापित मजदूर स्थायी नियोजन की मांग पर अड़े रहे. बाद में देर शाम अनुमंडल पदाधिकारी नवदीप शुक्ला व एसडीपीओ संजय कुमार प्लांट पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे लोगों की बात सुनी. वार्ता से हल निकाले जाने की बात कही.

क्या है मामला : वर्ष 2000 में बियाडा भूमि अधिग्रहण कर बॉटलिंग प्लांट को जमीन उपलब्ध करायी थी, जिसमें से विस्थापित परिवार के एक सदस्य को नियोजन की बात प्रबंधन द्वारा की गयी थी. नियोजन के लिए 62 विस्थापित लोगों की सूची बनायी गयी थी, जिसमें 15 व्यक्तियों को योग्य पाये जाने पर प्लांट में नियोजित किया गया था. बाकी को कैजरोल बढ़ने पर नियोजन में प्राथमिकता देने की बात प्रबंधन द्वारा की गयी थी. हालांकि इस दौरान 17 वर्ष बीत गये लेकिन विस्थापितों के ऊपर कोई विचार नहीं किया गया.
मजदूरों ने कहा कि उत्पादन बढ़ा, लेकिन नहीं मिला लाभ : विस्थापित मजदूरों ने कहा, बदलते समय के साथ इंडेन ऑयल बॉटलिंग प्लांट में उत्पादन बढ़ा, कैजरोल बढ़े व कार्य दो शिफ्ट में शुरू किया गया. लेकिन विस्थापित मजदूरों का नियोजन स्थायी नहीं किया गया. जबकि वो पूर्णरूप से भूमिहीन विस्थापित हैं. मजदूरों ने कहा कि 17 साल अस्थायी नियोजन पर कार्य के दौरान तत्कालीन प्रबंधन द्वारा सिर्फ आश्वासन दिया गया कि बहाली आते ही स्थायी कर दिया जायेगा. लेकिन प्लांट द्वारा स्थायी नियोजन के नाम पर कोई वैकेंसी नहीं है, की बात कही जाती है.
आमरण अनशन पर भी है कर्मी : इधर विस्थापित मजदूरों को स्थायी नहीं किये जाने पर विस्थापित भूमिहीन 27 जून से आरा में आमरण अनशन पर बैठे हैं. लेकिन प्रशासन का कोई मुलाजिम उनकी खबर लेने तक नहीं पहुंचा. अगर किसी अनशनकारी को कुछ हो जाता है, तो इसकी सारी जवाबदेही प्लांट प्रबंधन की रहेगी. आमरण अनशन पर के मौके पर कमलेश दत्त पांडेय, पवन सिंह, सत्येंद्र पासवान, बबलू सिंह, गौतम सिंह, दीपू, मनीष तिवारी सहित कई लोग थे.
एक दिन प्लांट बंद रहने से 45 हजार सिलिंडर रिफिलिंग का नहीं हुआ काम
प्लांट प्रबंधक ने बताया कि इंडेन ऑयल बॉटलिंग प्लांट में एक दिन का कार्य बाधित होने से लगभग पांच लाख रुपये से ज्यादा का घाटा कंपनी को हुआ है. गीधा प्लांट से प्रतिदिन 45 हजार सिलिंडर रिफिल किया जाता है, जिससे लगभग एक लाख परिवार के घर में चूल्हे जलते हैं. इंडेन गैस प्लांट में धरना- प्रदर्शन के कारण शनिवार को उत्पादन ठप रहा, जिससे सैकड़ों गैस वाहन जहां- तहां खड़े रहे. बॉटलिंग प्लांट से पटना, जहानाबाद, छपरा, मजफ्फरपुर, सीवान, बक्सर, कैमूर, रोहतास व भोजपुर जिले में गैस सप्लाइ नहीं हुई.
क्या कहते हैं वरीय संयंत्र प्रबंधक
प्लांट स्तर पर स्थायी नियोजन करने का कार्य उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है. प्लांट नहीं, कंपनी स्थायी नियोजन कराती है. प्रदर्शन कर रहे सभी विस्थापित मजदूर अस्थायी रूप से लोडिंग- अनलोडिंग पर कार्य कर रहे हैं और सारी सुविधाएं उन्हें मुहैया करायी जाती हैं.
मो इरफान आलम, इंडेन बॉटलिंग प्लांट,गीधा
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