जीवनशैली में सुधार लाकर महिलाएं कमर दर्द के खतरा को कर सकती हैं कम

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 15 Jun 2024 9:11 PM

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जागृति क्लब ऑफ भागलपुर व मणिपाल फिजियोथैरेपी एंड फिटनेस सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को गौशाला सभागार में नि:शुल्क फिजियोथैरेपी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया

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जागृति क्लब ऑफ भागलपुर व मणिपाल फिजियोथैरेपी एंड फिटनेस सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को गौशाला सभागार में नि:शुल्क फिजियोथैरेपी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था कि महिलाओं को कब अपने कमर दर्द के लिए फिजियोथेरेपिस्ट से मिलना चाहिए. फिजियोथेरेपिस्ट डॉ प्रणव ने कहा कि अगर किसी को छह सप्ताह के बाद भी घरेलू उपचार करते हुए कमर दर्द हो, तो फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेनी चाहिए. एक्यूट दर्द-छह सप्ताह तक, सब एक्यूट दर्द छह से 12 सप्ताह और 12 सप्ताह में दर्द ठीक नहीं होता है, तो उसे क्रॉनिक दर्द कहते हैं. महिलाओं की दिनचर्या ही ऐसी होती है कि उन्हें हमेशा सामने की तरफ झुकना पड़ता है और भारी सामान उठाना पड़ता है. इससे कमर दर्द का खतरा बना रहता है. जीवन शैली में सुधार कर महिलाएं ऐसी समस्याओं से बच सकती हैं. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ओबीजी सोसाइटी की सचिव डॉ वर्षा सिन्हा ने कहा कि महिलाओं को अपने लिए प्रतिदिन काम से काम दो घंटे का समय निकालना चाहिए, जो सिर्फ उनके लिए हो, जिसमें वो अपनी फिटनेस का ध्यान रख सकें. विशिष्ट अतिथि पूर्व उप महापौर डॉ प्रीति शेखर ने कहा कि आधुनिक युग में फिजियोथेरेपी ऐसी विधा है, जिससे महिलाएं और पुरुष अपने कमर, गर्दन और जोड़ों के दर्द से छुटकारा पा सकते हैं. मौके पर अनिता जैन, प्रभा कोटरीवाल, सुनीता संथालिया, बीना ढांढनिया, निमिषा जैन, पल्लवी सिंह, डॉ प्रीति कुमारी, डॉ प्रियांशु प्रिया, आशीष कुमार का विशेष योगदान रहा. शिविर में 40 महिलाओं ने कमर दर्द, गर्दन दर्द व अन्य जोड़ों के दर्द की समस्या से अवगत कराया और उन्हें जरूरी सुझाव दिया गया.

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