bhagalpur news. नवरात्र को लेकर भक्ति का माहौल, आज महालया पर होगा मां दुर्गा का आवाहन

नवरात्र को लेकर शहर में भक्ति का माहौल बनने लगा है. सोमवार को कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र शुरू होगा.
नवरात्र को लेकर शहर में भक्ति का माहौल बनने लगा है. सोमवार को कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र शुरू होगा. इससे पहले रविवार को मां का आवाहन महालया से होगा. आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि को वैदिक, पौराणिक एवं तांत्रिक मंत्रोच्चार के साथ नवरात्र दुर्गा पूजा के लिए यथा विधि कलश स्थापित की जायेगी. इसी कलश पर षष्ठी तक सभी पूजा होती हैं. महासप्तमी के प्रात: काल से प्रतिमाओं में पत्रिका प्रवेश के साथ प्राण-प्रतिष्ठा कर विजया दशमी तक पूजा का विधान है.
मां दुर्गा की उपासना को लेकर भागलपुरवासी काफी उत्साहित हैं. शहर से लेकर गांव तक पूरे जोर-शोर से दुर्गा उत्सव की तैयारियां चल रही है. महालया के अगले दिन यानी सोमवार को ग्रह गोचरों के शुभ संयोग में घरों, दुर्गा मंदिरों से लेकर पूजा पंडालों तक में कलश स्थापना होगी. कलश स्थापना को लेकर इन दिनों पूजन सामग्री, मां की पोशाक, चुनरी और कलश आदि की मांग बढ़ी है. भक्त कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री खरीदने बाजार पहुंच रहे हैं.
महालया के दिन पितृ पक्ष का समापन हो जायेगा. विभिन्न गंगा घाटों पर अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धांजलि देंगे. गंगा तटों पर पूर्वजों का तर्पण करेंगे. साथ ही मां दुर्गा का आवाहन करेंगे. महालया को सर्वपितृ अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. इस तिथि को महत्वपूर्ण माना जाता है. दरअसल इस दिन मां दुर्गा कैलाश पर्वत से धरती पर आती हैं. देवी के इसी क्रम को महालया कहते हैं. इस दिन को बुराई पर अच्छाई के रूप में भी देखा जाता है. इसके अगले दिन शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो जायेगी.
पंडित वीरेंद्र कृष्ण भद्र की आवाज में सुनेंगे चंडी पाठबंगाली बहुल क्षेत्र में इसकी तैयारी पूरी हो गयी है. खासकर दुर्गाबाड़ी, कालीबाड़ी, महाशय ड्योढ़ी, सरकारबाड़ी, रिफ्यूजी कॉलोनी दुर्गा स्थान में बांग्ला समाज के लोग जागो तुमि जागो… (तुम जागो) कहकर अलसुबह उठेंगे और चंडी पाठ सुनेंगे. इसके लिए रेडियो के साथ ही घर-घर में मोबाइल पर भी देवी से संबंधित श्लोक व गीत सुनने की व्यवस्था की गयी है. चंडी पाठ के महिषासुर मर्दिनी अध्याय में मां दुर्गा के जन्म और राक्षस राजा महिषासुर पर उनकी अंतिम विजय का वर्णन है. इसे सुनने के बाद ही लोग अन्न-जल ग्रहण करेंगे. कालीबाड़ी के महासचिव विलास कुमार बागची ने बताया कि यहां बंगाल के पंडित वीरेंद्र कृष्ण भद्र की आवाज में चंडी पाठ का श्रवण सामूहिक रूप से श्रद्धालु करेंगे. आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवरात्रि का प्रारंभ हो जायेगा. दुर्गा पूजा के लिए तैयार की जा रही प्रतिमा में आंखें महालया के दिन ही लगाते हैं.
नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की होगी आराधनाशक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा में सोमवार को कलश स्थापना होगी. नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना होगी. शारदीय नवरात्र के पहले दिन माता शैलपुत्री की उपासना की जायेगी. सनातन धर्मावलंबी निराहार या फलाहार रहते हुए अपने घर, मंदिर व पूजा पंडालों में घट स्थापना के बाद दुर्गा सप्तशती, रामचरितमानस, सुंदरकांड, रामरक्षा स्त्रोत्र, दुर्गा सहस्त्र नाम, अर्गला, कवच, कील, सिद्ध कुंजिका स्त्रोत्र आदि का पाठ आरंभ करेंगे.
सुबह 6:09 बजे कलश स्थापना का है शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्र की शुरुआत 22 सितंबर से होगी. इस दिन घटस्थापना मुहूर्त सुबह 06 बजकर 09 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 06 मिनट तक है. इसके बाद अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना कर सकते हैं. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक है. साधक अपनी सुविधा अनुसार समय पर घटस्थापना कर मां दुर्गा की पूजा कर सकते हैं. कलश स्थापना की सामग्रीपंडित शंकर मिश्रा ने बताया कि कलश स्थापना के लिए गंगा जल के साथ पंचरत्न (स्वर्ण, हीरा, पद्मराज, सप्तमृतिका, पंचपल्लव, सर्वोषधि, रक्तवस्त्र (लाल सालूक), नारियल के साथ ये सभी वस्तुएं वेद मंत्रोच्चार द्वारा मिट्टी के कलश में दिया जाना चाहिए. इसके बाद मां भगवती षोडषोपचार पूजन, दुर्गा के सभी अंगों वाहन, परिकर, नव चंडिका, नव दुर्गा, नवग्रह, दशदिक्पाल, षोडष मातृका आदि का उनके मंत्रों से आवाहन पंचोपचार, पुष्पांजलि एवं आरती सहित की जानी चाहिए.
चतुर्थी तिथि में वृद्धि के कारण नवरात्रि 10 दिन कापंडित समीर मिश्रा ने बताया कि इस बार शारदीय नवरात्र 22 सितंबर से प्रारंभ होगा. समापन एक अक्तूबर को होगा. चतुर्थी तिथि में वृद्धि के कारण नवरात्र नौ की बजाय 10 दिन का है.
22 सितंबर सोमवार : मां शैलपुत्री स्वरूप की पूजा23 सितंबर मंगलवार : मां ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा
24 सितंबर बुधवार : मां चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा
25 सितंबर गुरुवार : मां कुष्मांडा स्वरूप की पूजा
26 सितंबर शुक्रवार : मां कुष्मांडा स्वरूप की पूजा
27 सितंबर शनिवार : मां स्कंदमाता की पूजा
28 सितंबर रविवार : मां कात्यायनी स्वरूप की पूजा
29 सितंबर सोमवार : मां कालरात्रि स्वरूप की पूजा 30 सितंबर मंगलवार : मां महागौरी की पूजा 01 अक्तूबर बुधवार : मां सिद्धिदात्री की पूजा 02 अक्तूबर गुरुवार : विजयदशमी (दशहरा) मनाया जायेगा प्रत्येक पूजा के लिए अलग-अलग फूल का रंग पहली पूजा सफेद व लाल फूलदूसरी पूजा अपराजिता(नीला)
तीसरी पूजा पीला व लालचौथी पूजा सफेद
पंचमी पूजा नीला व लालछठी पूजा लाल व पीला
सप्तमी पूजा सफेद व लालअष्टमी पूजा लाल, नीला व पीला
नवमी पूजा लाल, नीला व पीलाडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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