bhagalpur news. अंग प्रदेश की सांस्कृतिक इतिहास की साक्षी है यहां की नदियां : प्रो भारती

Updated at : 26 May 2025 12:49 AM (IST)
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bhagalpur news. अंग प्रदेश की सांस्कृतिक इतिहास की साक्षी है यहां की नदियां : प्रो भारती

अंग प्रदेश की सांस्कृतिक इतिहास की साक्षी यहां की नदियां हैं.

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भागलपुर

अंग प्रदेश की सांस्कृतिक इतिहास की साक्षी यहां की नदियां हैं. अब अंग प्रदेश की अधिकांश नदियां विलुप्त होने के कगार पर हैं. अंग प्रदेश की ऐतिहासिक चंपा नदी का अस्तित्व खतरे में है. यह अब नाले में तब्दील हो गयी है और इसे अब समाज भूल चुका है. चंपा नदी की चर्चा महाभारत व पुराणों में हुई है. लोक मान्यताएं हैं कि अंग प्रदेश के राजा सूर्यपुत्र कर्ण चंपा नदी में स्नान कर सूर्य को जल अर्पण करते थे. लोक गाथा बिहुला विषहरी और मंजूषा चित्रकला का संबंध चंपा नदी से है. सती बिहुला चंपा नदी के रास्ते स्वर्ग से अपने पति के प्राण वापस लेने गयी थी. हर्षवर्धन के शासनकाल में चीनी यात्री ह्वेनसांग भारत आये थे. उक्त बातें नदी विशेषज्ञ फिजी में भारत के सांस्कृतिक राजनयिक रहे डॉ ओमप्रकाश भारती ने रविवार को आयोजित नदी मित्र इकाई भागलपुर व गंगा घाट विकास समिति के संयुक्त तत्वावधान में बरारी पुल घाट परिसर में नदी संवाद में कहा.

डॉ भारती ने कहा कि आज उन्होंने अपने यात्रा वृतांत में चंपा नदी व आसपास की समृद्धि की चर्चा की. एक समय में चंपा तथा गंगा के रास्ते दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से सिल्क तथा अन्य वस्तुओं का व्यापार होता था. चंपा नदी अंग प्रदेश की सभ्यता, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत रही है. इसके बिना भागलपुर शहर की कल्पना ही नहीं की जा सकती है. चंपा नदी की धारा वापस लाने के लिए इसके विभिन्न जलस्रोतों को पुनर्जीवित करना होगा. नदी मार्ग से अतिक्रमण हटाना होगा. यह सरकार के साथ-साथ जन सहयोग से ही संभव हो पायेगा. जैसे 50-60 वर्ष पहले जब चंपा नदी कलकल करते बहती थी, तो भूगर्भ में पर्याप्त पानी था. 1970 के दौर तक चंपा नदी अपने मूल रूप में प्रवाहित होती थी. इसके प्रवाह मार्ग से गाद हटाकर इसकी जलधारा को गति देनी होगी. नदी के आसपास के जलाशयों एवं तालाबों की सूची तैयार कर उसे समृद्ध करना होगा, ताकि चंपा नदी पर सिंचाई का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ सके.

नदी मित्र ने बिहार की नदियों के सांस्कृतिक मान चित्रण का संकल्प लिया. इसमें नदियों की जनगणना के साथ जुड़े मिथक, कहानी, गीत तथा ऐतिहासिक विवरणों को एकत्र किया जायेगा. भौगोलिक सूचना प्रणाली द्वारा नदियों का ‘डेटाबेस’, ‘डिजिटल आर्काइव’ तथा संग्रहालय का निर्माण किया जायेगा. अतिथियों का स्वागत मंजूषा गुरु मनोज पंडित व धन्यवाद ज्ञापन नवीन सिंह कुशवाहा ने किया. मौके पर राहुल यादव, काशीकांत सिंह, पंकज मिश्र, कमलेश वर्मा, मोहित राज, संजय ठाकुर, शालिनी कुमारी, पूजा कुमारी, मानवी कुमारी, देवांश कुमार, वैष्णवी कुमारी, श्रुति राय, साक्षी राय, विद्याश्री, अर्पणा कुमारी, पल्लवी कुमारी, छाया कुमारी, सोनाक्षी कुमारी, पिट्टू कुमारी, गणेश ठाकुर, सुमित, मोहित, राज, अमित आदि उपस्थित थे.

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