प्रतिनिधि, बिहपुर
माह-ए-रमजान का महीना इस्लामिक कैलेंडर का सबसे पाक महीना माना जाता है. आज से माह-ए-रमजान का पहला रोजा शुरू हो गया. पूरे एक महीने में लोग अल्लाह पाक की इबादत करते हैं और रोजा रखते हैं. ज्ञात हो कि माह-ए-रमजान महीने को इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना माना जाता है. इस पूरे महीने मुसलमान इस्लामिक कैलेंडर एवं निर्धारित समय के अनुसार सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त के पहले अन्न-पानी ग्रहण नहीं करते हैं. उपवास के अलावा मुसलमानों को इस पूरे माह अपने विचारों में शुद्धता रखना और अपनी बातों से किसी को नुकसान नहीं पहुंचाना जरूरी होता है. रमजान उल मुबारक का पवित्र महीना नेकी व बरकतों से भरपूर है. इस मुबारक महीना में नफल नमाज का सवाब फर्ज नमाज के बराबर है और एक फर्ज नमाज का सवाब 70 फर्ज नमाजों के बराबर होते हैं.रमजान में जहन्नुम के दरवाजे हो जाते हैं बंद
जन्नत में एक दरवाजा है, जिसका नाम रैहान है. इसमें सिर्फ और सिर्फ रोजेदार ही दाखिल होंगे, इसलिए हर मुसलमान की माह-ए-रमजान का एहतराम करना चाहिए. बिहपुर खनका के गद्दीनशीं हजरत अली कौनैन खान फरीदी व नायब सज्जादानशीन मौलाना अली शब्बर खां फरीदी ने फरमाया है कि जब माह -ए- रमजान का महीना आता है, तो जन्नत के दरवाजे खोल दिये जाते हैं और जहन्नुम के दरवाजे को बंद कर दिये जाते हैं.ऐसे रखा जाता है रोजा
रोजे रखने वाले मुसलमान सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के दौरान कुछ भी नहीं खाते और न ही कुछ पीते हैं. सूरज निकलने से पहले सेहरी की जाती है. मतलब सुबह फजर की अजान से पहले खा सकते हैं. रोजेदार सेहरी के बाद सूर्यास्त तक यानी पूरा दिन कुछ न खाते और न ही पीते हैं. इस दौरान अल्लाह की इबादत करते हैं या फिर अपने काम करते हैं. सूरज अस्त होने के बाद इफ्तार करते हैं. हालांकि इसके साथ-साथ पूरे जिस्म और मन को कंट्रोल करना होता है. इस दौरान न किसी को जुबान से तकलीफ देनी है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

