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bhagalpur news. एफआइआर में नामजद होने पर घबराएं नहीं, कानून देता है निर्दोषों को संरक्षण

Updated at : 05 Jan 2026 12:36 AM (IST)
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bhagalpur news. एफआइआर में नामजद होने पर घबराएं नहीं, कानून देता है निर्दोषों को संरक्षण

आदमपुर स्थित प्रभात खबर कार्यालय में रविवार को आयोजित लीगल काउंसलिंग कार्यक्रम में उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता धनंजय कुमार पांडेय ने आपराधिक मामलों में निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों पर विस्तार से जानकारी दी

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आदमपुर स्थित प्रभात खबर कार्यालय में रविवार को आयोजित लीगल काउंसलिंग कार्यक्रम में उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता धनंजय कुमार पांडेय ने आपराधिक मामलों में निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों पर विस्तार से जानकारी दी. कहा कि कई बार परिस्थितिवश या गलतफहमी में किसी निर्दोष व्यक्ति का नाम प्राथमिकी में दर्ज हो जाती है, जिससे उसे अनावश्यक मानसिक, सामाजिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. अधिवक्ता पांडेय ने बताया कि ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति को घबराने के बजाय विधिसम्मत तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए. सबसे पहले संबंधित थाना स्तर पर तथा वरीय पुलिस पदाधिकारियों के समक्ष अपने निर्दोष होने से संबंधित आवेदन देना चाहिए और उपलब्ध साक्ष्यों को प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके. कहा कि पुलिस जांच के दौरान सहयोग करना भी व्यक्ति के हित में होता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को यह महसूस हो कि पुलिस द्वारा की जा रही जांच से वह संतुष्ट नहीं है, तो वह संबंधित न्यायालय के समक्ष उचित आवेदन देकर जांच की निगरानी अथवा निष्पक्ष जांच की प्रार्थना कर सकता है. इसके अतिरिक्त, आवश्यकता पड़ने पर विधि के प्रावधानों के अंतर्गत उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर कर न्यायिक संरक्षण की मांग की जा सकती है. अधिवक्ता ने बड़ी संख्या में पाठकों को कानूनी सलाह दी. 1. प्रश्न – पांच साल पहले एक घटना हुई थी. संलिप्तता नहीं रहते हुए भी मुझे आरोपी बनाया गया. अनुसंधान में झूठे मामले को सत्य कर दिया गया. पिछले दिनों मेरी अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज हो गई. अब मुझे क्या करना चाहिए. जितेंद्र प्रसाद सिंह, भागलपुर. उत्तर – उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर करें, दूसरी तरफ आप पुलिस पदाधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखें और अगर आपकी बात नहीं सुनी जाय तो आप उच्च न्यायालय में सही अनुसंधान के लिए रीट दाखिल करें. 2. प्रश्न – एक हत्या के प्रयास मामले में मेरा बेल खारिज हो गया है. हाई कोर्ट में जमानत के लिए 10 हजार रुपए फीस मांगी जा रही है. मेरे पास पैसे नहीं है. क्या कोई उपाय है. मणिकांत मंडल, नवगछिया. उत्तर – आप विधिक सेवा प्राधिकार से मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं. ज्यादा समस्या हो तो आप मुझसे मिलें, मैं आपकी कानूनी मदद करूंगा. 3. प्रश्न – इन दिनों जब राजस्व कर्मचारी के पास जमीन की रसीद कटवाने गया तो पता चला कि हालिया सर्वे में मेरी जमीन बिहार सरकार की हो गयी है. मुझे क्या करना चाहिए. विवेक कुमार, नवगछिया. उत्तर – सबसे पहले आप अंचल कार्यालय में लिखित सूचना देकर आपत्ति व्यक्त करें. अगर सुनवाई नहीं होती है तो आप सिविल सूट दायर करें, निश्चित रूप से अगर आपकी जमीन है तो फैसला आपके पक्ष में आएगा. 4. मेरी पत्नी मेरे साथ रहते हुए मुझपर दहेज प्रताड़ना और मेंटनेंस का केस की है. जबकि मैंने अक्तूबर माह में उसे एक लड़के के साथ आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ चुका हूं, जिसका वीडियो फुटेज भी मेरे पास है. क्या मैं अपने केस में उक्त साक्ष्य का उपयोग कर सकता हूं. एक पाठक, भागलपुर. उत्तर – आप संबंधित न्यायालय में उक्त मामले की शिकायत अपने वकील के माध्यम से विधिवत करें. निश्चित रूप से आपके पक्ष को देखते हुए आपके मामले में विचार किया जाएगा. 5. प्रश्न – मजदूरी से संबंधित एक केस में हाईकोर्ट ने संबंधित संस्थान को आठ सप्ताह में भुगतान का आदेश दिया था, लेकिन ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी मुझे भुगतान नहीं मिला. अब क्या करना चाहिए ? सुजीत कुमार, भागलपुर. उत्तर – आप उच्च न्यायालय में विविध न्यायिक वाद दायर करें, निश्चित रूप से आपको न्याय मिलेगा. 6. प्रश्न – मेरे नाना की संपत्ति बिहार सरकार की हो गयी थी. उक्त जमीन का अकेला वारिस घोषित कर उसके मामा कोर्ट में गये और कोर्ट से उन्हें जमीन का मालिकाना हक मिल गया. वर्तमान में उक्त जमीन का अधिग्रहण पावर प्लांट में किया गया है. अब सिर्फ उनके मामा ही मुआवजा प्राप्त कर सकेंगे. जबकि उक्त जमीन की हकदार मामा की पांच बहनें भी हैं. मो सोहेब, पीरपैंती, भागलपुर उत्तर – आप सभी प्रकार के साक्ष्यों के साथ भू-अर्जन विभाग को आवेदन दें और रिसीविंग कॉपी भी प्राप्त करें. निश्चित रूप से पुस्तैनी जमीन में सभी संतानों का बराबर का हक होता है. 7. प्रश्न – मेरा घर बांका जिला में है. वहां मेरी पुस्तैनी जमीन है. सभी प्रकार के आवश्यक कागजात प्रस्तुत करने के बाद भी जमीन का म्युटेशन नहीं किया जा रहा है. रंधीर कुमार सिंह, भागलपुर. उत्तर – आप अपनी समस्या को लेकर अंचलाधिकारी से मिलें. वहां बात नहीं बने तो डीसीएलआर के कार्यालय में अपनी बातों को रखें. अगर सब कुछ ठीक है तो निश्चित रूप से आपके जमीन का म्युटेशन होगा और आप जमीन की रसीद भी कटावा सकेंगे. 8. प्रश्न – मेरी चार कट्ठा पुस्तैनी जमीन पर दबंगों ने 13 साल से कब्जा कर रखा है. क्या करूं समझ नहीं आ रहा है. राजेंद्र प्रसाद, सजौर, भागलपुर. उत्तर – सबसे पहले आप संबंधित थाने को सूचना दें और जमीन पर दखल कब्जा करने के पजेशन सूट दाखिल करें. जरूरतमंदों को मुफ्त कानूनी मदद देते हैं धनंजय पांडेय अधिवक्ता बताया कि अपने शहर भागलपुर के समग्र विकास और सामाजिक सरोकारों को मजबूत करने के लिए उन्होंने अंग प्रदेश विकास मोर्चा नामक संगठन का गठन किया है. इस संगठन के माध्यम से जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता के साथ अन्य आवश्यक सहयोग भी प्रदान किया जाता है. कहा कि कानून की सही जानकारी के अभाव में कई लोग अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक रविवार को सुबह दस बजे से दो बजे तक लीगल अवेयरनेस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. इस दौरान जनता दरबार भी लगाया जाता है, जहां आम लोग अपनी समस्याएं सीधे रख सकते हैं और उन्हें विधिसम्मत मार्गदर्शन दिया जाता है. बताया कि जनता दरबार के माध्यम से जरूरतमंदों के लिए मुफ्त न्याय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है, ताकि कोई भी व्यक्ति केवल आर्थिक कमजोरी के कारण न्याय से वंचित न रहे. प्रस्तुति – ऋषव मिश्रा कृष्णा

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL KUMAR

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ATUL KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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