घोरघट टू मिजौचौकी : बाढ़ से क्षतिग्रस्त हाइवे के लिए एक भी पैसा नहीं देगा विभाग, कांट्रैक्टर को खुद के खर्चे पर करना होगा दुरुस्त

Updated at : 28 Sep 2024 1:31 AM (IST)
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घोरघट टू मिजौचौकी : बाढ़ से क्षतिग्रस्त हाइवे के लिए एक भी पैसा नहीं देगा विभाग, कांट्रैक्टर को खुद के खर्चे पर करना होगा दुरुस्त

घोरघट से मिर्जाचौकी के बीच (शहरी हिस्सा छोड़कर) जगह-जगह एनएच 80 की सड़क बाढ़ में डूब गयी थी.

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-बाढ़ प्रभावित हाइवे को दुरुस्त रखना एनएच विभाग के लिए होगा चुनौती-12 चक्के के वाहनों के चलने पर रोक के निर्देश का अनुपालन नहीं होने पर धंस सकती है हाइवे वरीय संवाददाता, भागलपुर घोरघट से मिर्जाचौकी के बीच (शहरी हिस्सा छोड़कर) जगह-जगह एनएच 80 की सड़क बाढ़ में डूब गयी थी. गंगा का जलस्तर घटने के बाद हाइवे से पानी उतर गया है. इसके साथ एनएच 80 की दुर्दशा नजर आने लगी है. पूरी सड़क निमार्णाधीन है. लेकिन, बाढ़ में जहां कहीं भी सड़क क्षतिग्रस्त हुई है, वहां रिस्टोरेशन कार्य पर एनएच विभाग एक भी पैसा खर्च नहीं करेगा. हाइवे का निर्माण करा रहे कांट्रैक्टर को खुद के खर्चे पर क्षतिग्रस्त हिस्से की सड़क बनानी होगी. एनएच विभाग ने खुद के फैसले से कांट्रैक्टर को अवगत कराया दिया है. अकबरनगर, खानकित्ता, फरक्का आदि जगहों पर एनएच 80 की सड़क पर बाढ़ का पानी चढ़ गया था और कई दिनों तक सड़क बाढ़ के पानी में डूबी रह गयी थी. हाइवे को चलने लायक दुरुस्त रखना विभाग के लिए होगा चुनौती बाढ़ से क्षतिग्रस्त हाइवे को दुरुस्त रखना विभाग के लिए चुनौती होगा. दरअसल, सड़क कई दिनों से बाढ़ के पानी डूबे रहने से इसमें नमी ज्यादा है. ओवरलोड वाहनों का परिचालन बंद नहीं होने से मरम्मत के बाद भी इसके टूटने व धंसने की संभावना बनी रहेगी. 12 चक्का वाहन पर रोक के निर्देश का अनुपालन करने की जरूरत एनएच विभाग का कहना है कि बाढ़ व बारिश की वजह से 10 व 12 चक्के के वाहन के परिचालन पर रोक लगाने का निर्देश है. इसका शक्ति से अनुपालन कराने की जरूरत है. तभी हाइवे कम से कम चलने लायक दुरुस्त रह सकेगी. अन्यथा, कितना भी मरम्मत करा दिया जायेगा, ओवरलोड वाहनों के परिचालन से यह टूट जायेगी. कोट : बाढ़ में क्षतिग्रस्त सड़क के रिस्टोरेशन कार्य पर विभाग पैसा खर्च नहीं करेगा. कार्य एजेंसी पहले से बहाल है और वह सड़क बना रही है. इस वजह से क्षतिग्रस्त हिस्से का रिस्टोरेशन कार्य एजेंसी ही अपने खर्चे पर करेगी. लेकिन, मरम्मत कराने के बाद भी इसको चलने लायक रखना चुनौती होगा. क्योंकि, बाढ़ में डूबने की वजह से नमी है और ओवरलोड वाहनों के चलने से धंसने का खतरा बना रहेगा. ओवरलोड वाहनों के परिचालन पर रोक के निर्देश का पालन हो तो फिर दिक्कत नहीं होगी. बृजनंदन कुमार, कार्यपालक अभियंता राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर

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