Bhagalpur news आस्था का केंद्र ऐतिहासिक ‘जियछ पोखर’ उपेक्षित

Updated at : 13 Apr 2026 12:49 AM (IST)
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Bhagalpur news आस्था का केंद्र ऐतिहासिक ‘जियछ पोखर’ उपेक्षित

जियछ पोखर और जियछ माता मंदिर में पूरे साल श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है, लेकिन आज भी यह विकास की राह देख रहा है.

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सुलतानगंज रेलवे लाइन के पार स्थित जियछ पोखर और जियछ माता मंदिर में पूरे साल श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है, लेकिन आज भी यह विकास की राह देख रहा है. प्रभात पड़ताल में सामने आया कि यहां हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन पर्यटन और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यह ऐतिहासिक स्थल उपेक्षित बना है. हजारों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा यह स्थल पर्यटन के लिहाज से अपार संभावनाएं समेटे है, लेकिन सरकारी पहल के अभाव में अब तक सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाएं अधूरी हैं.

आस्था का अटूट विश्वास

मान्यता है कि इस पोखर में स्नान करने और मां जियछ की पूजा-अर्चना करने से नि:संतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूरी होती है. पुजारी अशोक राम बताते हैं कि श्रद्धालु पहले पोखर में स्नान करते हैं, फिर विधि-विधान से पूजा कर मन्नत मांगते हैं. मनोकामना पूर्ण होने पर चढ़ावा चढ़ाने और मुंडन संस्कार कराने की परंपरा है. ग्रामीणों के अनुसार जियछ पोखर का संबंध महाभारत काल से जुड़ा है, जिसे पहले यक्ष पोखर के नाम से जाना जाता था. मान्यता है कि यक्ष के 18 प्रश्नों का उत्तर देने के बाद युधिष्ठिर को वरदान मिला था कि इस पोखर में स्नान करने वाले को संतान की प्राप्ति होगी और मनोकामनाएं पूर्ण होगी. पोखर के जल को औषधीय गुणों से युक्त भी माना जाता है, जिससे त्वचा रोग दूर होने की आस्था जुड़ी है.

सालभर उमड़ती भीड़, विशेष अवसरों पर मेला जैसा माहौल

विशुआ पर्व, माघ पूर्णिमा और अमावस्या पर यहां हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है. बिहार के साथ-साथ अन्य राज्यों से लोग यहां पहुंचते हैं. यह स्थल सदियों पुराना है और लोगों की गहरी आस्था से जुड़ा है.

सुविधाओं का अभाव, श्रद्धालु परेशान

प्रभात पड़ताल में ग्रामीण अनिल ठाकुर, पवन ठाकुर, पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि अगर यहां सौंदर्यीकरण और पर्यटन की दृष्टिकोण से विकास किया जाए, तो यह क्षेत्र एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर सकता है. इतनी प्रसिद्धि के बावजूद यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. साफ-सफाई, बैठने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं हैं. श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. इस स्थल को विकसित किया जाए तो श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार की नयी संभावनाएं विकसित होंगी.

पर्यटन की अपार संभावनाएं

जियछ पोखर और मंदिर का समुचित सौंदर्यीकरण किया जाए, तो यह क्षेत्र एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है. इससे न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. वार्ड पार्षद ने सामान्य बोर्ड की बैठक में विकास की मांग उठायी है. ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने सरकार से मंदिर के विकास, पोखर के सौंदर्यीकरण की मांग की है.

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