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अभियुक्त के मेल में आकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेरफेर करने के आरोप में किया था नालिसीवाद, कोर्ट ने लिया संज्ञान

Updated at : 09 May 2024 11:36 PM (IST)
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अभियुक्त के मेल में आकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेरफेर करने के आरोप में किया था नालिसीवाद, कोर्ट ने लिया संज्ञान

अभियुक्त के मेल में आकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेरफेर करने के आरोप में किया था नालिसीवाद, कोर्ट ने लिया संज्ञान

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– हत्या कर शव को गंगा में फेंकने का लगा था आरोप, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नदी में डूबने से मौत की आयी रिपोर्ट – ऐसे कई मामले हैं जिनमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर खड़े हो चुके हैं सवाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट व पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों को मैनेज करने के आरोप कई बार लग चुके हैं. पर हाल ही में हत्या जैसे गंभीर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किये गये हेरफेर का आरोप लगाते हुए कुछ दिन पूर्व ही एक नालिसीवाद दायर किया गया था. जिसमें बरारी थाना क्षेत्र के धोबी टोला के रहने वाले रंजन कुमार की ओर से नालिसीवाद दाखिल किया गया था. उनके अधिवक्ता की ओर से जानकारी दी गयी है कि वाद में जेएलएनएमसीएच के प्रो एंड फॉरेंसिक मेडिसिन के डॉ एके मल्लिक, अनु शिक्षक पैथोलॉजी विभाग के डाॅ आरजेपी साह सहित मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी शत्रुघ्न यादव को आरोपित बनाया गया था. दाखिल नालिसीवाद पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने मामले में सुनवाई शुरू की. कोर्ट ने उक्त नालिसीवाद पर संज्ञान लिया है. इस पर सुनवाई की अगली तिथि 29 मई निर्धारित की गयी है. क्या है आरोप : वाद के सूचक के बड़े भाई गणपति राय उर्फ गुलचा का शव 6 मई 2015 को बरारी पुल घाट के समीप गंगा नदी में मिला था. परिवादी का कहना था कि मृतक के शरीर पर चोट के निशान व कई ऐसे चिह्न थे जो हत्या कर साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को नदी में फेंके जाने की ओर स्पष्ट तौर पर इशारा कर रहे थे. बरारी थाना में उन्होंने दुर्गा यादव, अमरदीप तांती, समीर कुमार उर्फ खुटिया, प्रदीप मंडल और रामपुकार भगत के विरुद्ध हत्या के आरोप में केस दर्ज कराया था. इसके बाद 6 मई को शव को दोपहर करीब 2 बजे नौलखा कोठी स्थित पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया. जहां पूर्व से ही अभियुक्त पहुंच कर डॉ आरजेपी साह से बातचीत कर रहा था. पोस्टमार्टम के दौरान किसी प्रकार का कोई एफएसएल जांच के लिए विसरा जमा नहीं किया गया और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर उसमें गंगा नदी में डूबने से मौत प्रमाणित कर दिया गया. इससे स्पष्ट है कि उक्त आरोपित कांड के अभियुक्तों के मेल में आकर झूठा और गलत पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर समर्पित कर दिया. परिवादी ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना के बाद अभियुक्तों की ओर से उन्हें केस उठाने की धमकी दी जा रही थी. और दो लाख रुपये में पोस्टमार्टम रिपोर्ट मैनेज करने की बात कही गयी थी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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