BHAGALPUR : हमारी खुशी, हमारे भय और हमारी आकांक्षाओं को व्यक्त करता है नृत्य

Published by :SANJEEV KUMAR JHA
Published at :29 Apr 2026 5:34 PM (IST)
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BHAGALPUR : हमारी खुशी, हमारे भय और हमारी आकांक्षाओं को व्यक्त करता है नृत्य

भागलपुर के टैलेंटेड डुएट डांसर अमर और अंजलि पिछले चार वर्षों से साथ में डुएट डांस कर रहे हैं. कई चैलेंज और मुश्किलों का सामना करने के बाद कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके हैं.

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Bhagalpur News भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट : नृत्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं है. यह आत्म-अभिव्यक्ति, संस्कृति, परंपरा व भावनाओं को दर्शाने का एक माध्यम है. यह शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्फूर्ति व सामाजिक एकता को बढ़ावा देता है. आध्यात्मिक दृष्टि से भी कई नृत्य रूप ईश्वर की आराधना से जुड़े होते हैं. नृत्य की उत्पत्ति प्राचीन काल से मानी जाती है. भारतीय शास्त्रों में नाट्य शास्त्र को नृत्य का सबसे पुराना ग्रंथ माना जाता है. इसमें भरत मुनि ने नृत्य को नाट्य का एक अनिवार्य अंग बताया है. भारतीय संस्कृति में नृत्य की शुरुआत देवताओं से जोड़ी जाती है. त्रेतायुग में देवताओं की विनती पर ब्रह्माजी ने नृत्य वेद तैयार किया. तभी से नृत्य की उत्पत्ति संसार में मानी जाती है. नृत्य एक सशक्त अभिव्यक्ति है जो पृथ्वी व आकाश से संवाद करती है. हमारी खुशी, हमारे भय और हमारी आकांक्षाओं को व्यक्त करती है.

मैथिल संस्कृति में नृत्य का विशेष स्थान

मैथिली संस्कृति में नृत्य का विशेष स्थान है. यहां पारंपरिक लोकनृत्य व आधुनिक नृत्य शैलियां दोनों ही प्रचलित हैं. झिझिया नृत्य विशेष रूप से दुर्गा पूजा के अवसर पर महिलाएं करती हैं. सामा-चकेवा नृत्य भाई-बहन के प्रेम पर आधारित एक लोक पर्व के दौरान किया जाने वाला नृत्य है. जट-जटिन नृत्य पारंपरिक नाटकीय नृत्य है. यह पति-पत्नी के बीच के प्रेम, तकरार और सामाजिक जीवन को दर्शाता है. यह मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा ऋतु में किया जाता है. जहां महिला पात्र जटिन एवं पुरुष जट की भूमिका निभाते हैं. विद्यपत नृत्य महाकवि विद्यापति के गीतों पर आधारित होता है. इसमें भक्ति व शृंगार रस की झलक होती है. आजकल मैथिली गीतों पर आधारित आधुनिक नृत्य भी लोकप्रिय हो रहे हैं.

भागलपुर के अमर और अंजलि का नृत्य सफर प्रेरणादायी

भागलपुर के टैलेंटेड डुएट डांसर अमर और अंजलि पिछले चार वर्षों से साथ में डुएट डांस कर रहे हैं. शुरुआत में कई चैलेंज और मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार प्रैक्टिस के साथ अपने पैशन को जारी रखा. दोनों ने कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया है. इनमें रेमो डिसूजा, टेरेंस लुईस, धर्मेश, पुनीत पाठक, वर्तिका झा, वैभव जैसे मशहूर कलाकारों के सामने परफॉर्म करने का मौका मिला. कई प्राइज और अवॉर्ड भी जीते. जून, 2025 में इन्होंने अपना डांस इंस्टीट्यूट आर्टिफॉर्म डांस स्टूडियो शुरू किया. इनका उद्देश्य नये टैलेंट को प्लेटफॉर्म देना और डांस के लिए लोगों को इंस्पायर करना है.

——————अपने सपनों को अपनी कला से करें व्यक्तफोटो : श्वेता भारतीनृत्य शिक्षिका श्वेता भारती ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस पर, कलाकार अपनी ऊर्जा और सपनों को अपनी कला के माध्यम से व्यक्त करें. नृत्य केवल शरीर की हलचल नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है. अपनी लय खोजें, खुलकर थिरकें और दुनिया को अपनी प्रतिभा से प्रेरित करें. नृत्य करते रहें और चमकते रहें. आधुनिक दौर में जब हम वैश्विक संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं, लोक नृत्य हमें याद दिलाता है कि हमारी जड़ें कहां हैं.

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