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Bhagalpur News: सिल्क सिटी भागलपुर की 'धड़कन सैंडिस कंपाउंड' पर 44.60 करोड़ खर्च, सेवा-सुविधाएं तालों में कैद

Updated at : 18 Feb 2025 6:29 PM (IST)
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Bhagalpur News: सिल्क सिटी भागलपुर की 'धड़कन सैंडिस कंपाउंड' पर 44.60 करोड़ खर्च, सेवा-सुविधाएं तालों में कैद

सैंडिस में बंद पड़ा कैफेटेरिया

Bhagalpur News: स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट की सर्वाधिक राशि सैंडिस कंपाउंड पर खर्च हुई. यही वजह है कि पूरा शहर स्मार्ट सिटी का मतलब सैंडिस कंपाउंड को मानते हैं. क्योंकि, इसको विकसित करने के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया गया. तकरीबन 44.60 करोड़ रुपये खर्च किये गये. बावजूद इसके हाल यह कि सैंडिस कंपाउंड के विभिन्न हिस्सों में सन्नाटा पसरा है.

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Bhagalpur News, ब्रजेश, भागलपुर: सैंडिस कंपाउंड को सिल्क सिटी भागलपुर की धड़कन कहा जाता है. वह इसलिए कि इस हरे-भरे कंपाउंड में शहर के सैकड़ों वाशिंदे रोज सुबह और शाम टहलने, योगा करने, दौड़ने और दिनभर खेलने के लिए आती है. यह बदहाल हुआ करती थी. जब भागलपुर शहर को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट मिला, तो अन्य योजनाओं की अपेक्षा सबसे अधिक खर्च सैंडिस कंपाउंड पर कर इसे संवारा गया और सुविधासंपन्न बनाया गया. सुविधा मुहैया कराने के लिए एजेंसी रखी गयी. लोगों को तीन वर्षों तक सुविधा मिली भी. लेकिन एक बार फिर तमाम सुविधाओं पर ताले लग गये हैं. इसकी पड़ताल प्रभात खबर ने की.

स्मार्ट सिटी का मतलब सैंडिस कंपाउंड

यहां लोगों की सेवा-सुविधाएं तालों में कैद है. संचालन करने वाली एजेंसी के हाथ खींचने के बाद यहां की रौनक फीकी पड़ गयी है. बच्चों की परीक्षा खत्म हो गयी है, लेकिन चिल्ड्रन पार्क बदहाल पड़े हैं. मेन गेट पर ताला लटका है. बच्चे निराश होकर लौटने को विवश हैं. खेलने-कूदने के लिए कोई स्थान नहीं है. झूले व अन्य संसाधन महज शोपीस बने हैं. सुविधाओं को बहाल करने के लिए स्मार्ट सिटी दूसरी एजेंसी का चयन नहीं कर सकी है. एकल टेंडर होने की वजह से टेंडर रद्द हो चुका है और दोबारा टेंडर निकालने के नाम पर काम कम, बहानेबाजी ज्यादा हो रही है.

ढाई महीने से सुविधाएं बंद

सिटी के लोगों को करीब ढाई महीने से सैंडिस कंपाउंड की सुविधाएं नहीं मिल पा रही है. सैंडिस कंपाउंड सिर्फ सुबह और शाम की सैर तक ही सीमित रह गया है. सुबह से लेकर शाम तक शहर के लोगों के अलावा खिलाड़ियों की बहुतायत संख्या की वजह से सैंडिस कंपाउंड गुलजार रहता है. लेकिन यहां के जिम, स्वीमिंग पूल, कैफेटेरिया आदि की सुविधाओं से वंचित हैं. शहर के संभ्रांत लोगों समेत निगम के पार्षदों का कहना है कि स्मार्ट सिटी को नयी एजेंसी के चयन तक सभी सुविधाओं को उपलब्ध कराना चाहिए.

सैंडिस में बदहाल पड़ा भोजन करने का स्थान

इन सुविधाओं से व्यवस्था से वंचित है शहरवासी

किड्स पार्क, ओपन एयर थिएटर, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स ( जिम, बैडमिंटन, स्विमिंग पूल), कैफेटेरिया, पार्किंग, नाइट शेल्टर, क्लीवलैंड मेमोरियल पार्क, स्टेशन क्लब में कैफेटेरिया व रेस्टोरेंट व अन्य.

सेवा-सुविधा की बहाली के लिए यह अनिवार्य

मैनपावर(ग्रुप-ए)

पार्क मैनेजर : 01
मेंटेनेंस मैनेजर : 02
सिक्यूरिटी ऑफिसर : 01
सिक्यूरिटी गार्ड : 14
माली : 08
टेक्निशियन(इलेक्ट्रिक व प्लंबर) : 02
स्वीपर : 10
कंपाउंडर व नर्स : 01
सपोर्ट स्टॉफ : 02
कुल : 432.

मैनपावर (ग्रुप-बी)

सिक्यूरिटी गार्ड : 06
स्वीपर : 04
प्राथमिक उपचार के लिए कंपाउंडर, नर्स व मेडिकल स्टॉफ : 01
सपोर्ट स्टाफ : 03
जिम, स्वीमिंग पूल, बैडमिंटन, क्रिकेट, वॉलीबॉल, फुटबॉल व एथेलेटिक्स के लिए कोच : 08
कुल : 223.

नाइट शेल्टर के लिए मैनपावर

सिक्यूरिटी गार्ड : 06
स्वीपर : 04
कुल : 104. ऑ

ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के लिए मशीनरी

ट्रॉली के साथ ट्रैक्टर : 01
इंजन के साथ वाटर टैंकर : 01

भागलपुर स्मार्ट सिटी सोसाइटी गठित, डेढ़ साल बाद भी रजिस्ट्रेशन नहीं

भागलपुर स्मार्ट सिटी सोसाइटी गठित हो गयी है. लेकिन इसके गठन के डेढ़ साल बाद भी रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका है. यूडीएचडी से रजिस्ट्रेशन होना है. दरअसल, सोसाइटी इस वजह से गठित की गयी है, ताकि स्मार्ट सिटी से जितने भी प्रोजेक्ट पर काम हुआ है उसका इस सोसाइटी से मेंटेनेंस हो सके.

यूडीएचडी मिनिस्टर के समक्ष मेयर डॉ बसुंधरा लाल उठानेवाली है मामला

स्मार्ट सिटी का सीजीएम कुछ बताना क्यों नहीं चाहता है?
स्मार्ट सिटी कंपनी टेंडर निकालने में क्यों कर रही देरी?
स्मार्ट सिटी के पास करने के लिए गिनती के एक-दो काम है, तो पहले जितना मैनपावर और बड़ा ऑफिस सेटअप किसलिए?
भागलपुर स्मार्ट सिटी सोसाइटी गठित है, तो इसका वह रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं करा रहा है?

क्या कहते हैं पदाधिकारी

भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के पीआरओ पंकज कुमार ने कहा कि पहली बार में एकल टेंडर हुआ था, जिसको रद्द कर दिया गया है. दोबारा टेंडर जारी करने की तैयारी चल रही है. अगले दो-तीन दिनों में रि-टेंडर पीआरडी से प्रकाशित होगा और इसकी प्रक्रिया पूरी की जायेगी. एजेंसी चयनित होने के बाद सैंडिस कंपाउंड की सारी सुविधाएं पहले की तरह बहाल होगी.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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