जर्दालू समेत अन्य आम की चमक और गुणवत्ता बढ़ाने की तैयारी शुरू
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 13 May 2024 9:13 PM
जिले के आम उत्पादक किसान जीआइ टैग जर्दालू समेत अन्य आमों की क्वालिटी व चमक बढ़ाने के लिए कैप लगाने का काम शुरू कर दिये हैं.
जिले के आम उत्पादक किसान जीआइ टैग जर्दालू समेत अन्य आमों की क्वालिटी व चमक बढ़ाने के लिए कैप लगाने का काम शुरू कर दिये हैं. आम की साइज ज्यों-ज्यों बढ़ती जा रही है, इसकी सुरक्षा की चिंता किसानों की बढ़ती जा रही है. किसानों की मानें तो पिछले साल प्रयोग के तौर पर कैप लगाये गये थे, जिसका परिणाम हुआ कि कैप वाले आम की डिमांड विदेशों व महानगरों में अधिक हुई. कहलगांव के आम उत्पादक किसान कृष्णानंद सिंह ने बताया कि पिछले साल कैप लगाने से आम की कीमत दोगुनी तक बढ़ गयी थी. यह आम पकने के बाद भी अधिक दिनों तक खराब नहीं होता है. इस आम की डिमांड मॉल में भी अधिक थी. आम की चमक भी आकर्षक होती है. नाथनगर के किसान मुनीलाल मंडल भी अपने पेड़ों में लगे आम में कैप लगाने में जुट गये हैं.
आत्मा की ओर से किसानों को किया जा रहा जागरूक
आत्मा के उप परियोजना निदेशक प्रभात कुमार सिंह ने बताया कि आत्मा की ओर से आम किसानों के बीच लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है, ताकि उनके आम की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सके. इससे विदेशों से लेकर देश के विभिन्न महानगरों में बाजार मिल सके. प्रतिस्पर्द्धा के दौर में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. मेंगो कैप के फायदे से आम किसानों को अवगत कराया जा रहा है. आम उत्पादक किसान मनीष सिंह ने बताया कि यदि प्रदेश सरकार मैंगो कैप की खरीद पर सब्सिडी दे तो उत्पादन में ज्यादा बढ़ोतरी होगी. जर्दालू आम को जीआइ टैग मिला है. इसके अलावा भागलपुर का दुधिया आम भी मशहूर है. पिछले तीन साल से इंग्लैंड, अमेरिका, खाड़ी देशों में यह निर्यात किया जा रहा है.
मेंगो कैप लगाने से कीटनाशक की जरूरत नहीं, ऐसे करें इस्तेमाल आत्मा के उप परियोजना निदेशक प्रभात कुमार सिंह ने बताया कि वाणिज्य मंत्रालय विदेश भेजने से पहले फलों की क्वालिटी व क्वांटिटी पर विशेष ध्यान देता है. जर्दालू को चमकदार व दाग-धब्बे रहित बनाने के लिए कैप लगाये जा रहे हैं. सुरक्षा कवच के रूप में मेंगो कैप काम कर रहा है. यह कवच कोहरा, धब्बे, बर्फ का कीड़ा, अखरोट का कीड़ा, मकर, मक्खियों से बचाव करता है. इसे फल के नींबू या अंडे के आकार का उपयोग किया जाना चाहिए. अच्छे पके पिंडों को थैली में रखा जाना चाहिए. स्ट्रिंग को स्टेम के ऊपर तीन सेंटीमीटर बांधना चाहिए. इसे 50 दिनों के बाद काटा जा सकता है. इससे और भी फायदे हैं. यह थैली फल को किसी भी कीट से बचाती है. फलों पर कीटनाशक की आवश्यकता नहीं होती है. यह कैप अत्यधिक धूप और ओला-बारिश से बचाता है. जिले के कहलगांव, पीरपैंती, सुलतानगंज आदि आम उत्पादक क्षेत्र में मैंगो कैप लगाया जा रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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