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गंगा किनारे की घेराबंदी कर हुई प्रतिमाओं का विसर्जन, एनजीटी नियमों का हुआ उल्लंघन

Updated at : 13 Oct 2024 9:34 PM (IST)
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गंगा किनारे की घेराबंदी कर हुई प्रतिमाओं का विसर्जन, एनजीटी नियमों का हुआ उल्लंघन

पिछले छह साल से एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार मायागंज अस्पताल के पीछे विसर्जन तट पर तालाब बनाकर प्रतिमाओं का विसर्जन कराया जा रहा था. इस बार दुर्गा पूजा में एनजीटी के नियमों का उल्लंघन करते हुए गंगा किनारे की घेराबंदी कर प्रतिमाओं का विसर्जन कराया गया.

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पिछले छह साल से एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार मायागंज अस्पताल के पीछे विसर्जन तट पर तालाब बनाकर प्रतिमाओं का विसर्जन कराया जा रहा था. इस बार दुर्गा पूजा में एनजीटी के नियमों का उल्लंघन करते हुए गंगा किनारे की घेराबंदी कर प्रतिमाओं का विसर्जन कराया गया. रविवार को अधिकतर प्रतिमाओं का विसर्जन गंगा में कर दिया गया. कुछेक छोटी प्रतिमाओं का विसर्जन लाखों की लागत से बने कृत्रिम तालाब में कराया गया. स्पेशल पुलिस फोर्स की निगरानी में इस तालाब को रखा गया था, ताकि कोई बच्चा इसमें घुमते हुए गलती से गिर नहीं जाये.

नगर निगम प्रशासन की ओर से जिस तरह से गंगा की घेराबंदी की गयी और प्रतिमाओं का विसर्जन कराया गया, उससे प्रतिमा का केमिकल गंगा में जाना तय है. प्रतिमाओं का अवशेष हटाने के बाद भी केमिकल को गंगा में मिलने से नहीं रोका जा सकेगा. इससे जहां जलीय जीव-जंतु पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा. खासकर डॉल्फिन की सुरक्षा की चिंता बढ़ गयी है.

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2019 में काली की प्रतिमा विसर्जन करने पर 62 लोगों पर हुआ था मामला दर्ज

भागलपुर में ही नवंबर 2019 में काली व लक्ष्मी की प्रतिमा का विसर्जन गंगा में करने पर पुलिस प्रशासन की ओर से 15 पूजा समिति व 62 लोगों पर मामला दर्ज कराया गया था. मूर्ति विसर्जन के संबंध में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों का उल्लंघन करने तथा मूर्ति बनाने में सिंथेटिक रंगों और गैर-बायोडिग्रेडेबल वस्तुओं के उपयोग के आरोप में आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

डॉल्फिन अभयारण्य के लिए उचित नहीं

पर्यावरणविद् अरविंद मिश्रा ने बताया कि मूर्ति विसर्जन भागलपुर में विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य के लिए अच्छा नहीं है, जो गंगा के किनारे 50 किलोमीटर में फैला भारत का एकमात्र नदी डॉल्फिन अभयारण्य है. अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के अनुसार गंगा डॉल्फिन एक लुप्तप्राय प्रजाति है. गंगा की घेराबंदी करके विसर्जन कराने से पहले से असर कम होगा, लेकिन प्रशासन को समय रहते उचित व्यवस्था करने की जरूरत है.

नाकाम साबित हुआ नगर निगम प्रशसन

सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी ) के निर्देशों के तहत नदियों में प्रतिमा विसर्जन प्रतिबंधित है. इसको लेकर निगम प्रशासन की ओर से शहरी क्षेत्र में नदी किनारे चिन्हित स्थलों पर कृत्रिम तालाब बनाये गये, इस कृत्रिम तालाब में प्रतिमाओं का विसर्जन कराने में नगर निगम प्रशासन नाकाम साबित हुआ.

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क्या है गाइडलाइन

विभिन्न स्थानों पर प्रशासन मूर्तियों के विसर्जन के लिए अलग से जल निकाय या विशिष्ट तालाब बनाने में विफल रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी और प्रशासन को बड़े पैमाने पर जागरूकता फैलानी होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी मूर्ति फिर से नदियों में विसर्जित न हो. 2019 के अक्तूबर में, केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन -एनएमसीजी ने राज्यों को 15 सूत्री निर्देश जारी किए थे, जिसमें कहा गया था कि वे मूर्ति विसर्जन की अनुमति न देकर गंगा और उसकी सहायक नदियों में प्रदूषण रोकने के लिए व्यापक व्यवस्था करें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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