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bhagalpur news.सोमवार की रात होलिका दहन व बुधवार को मनेगा होली रंगोत्सव

Updated at : 01 Mar 2026 12:01 AM (IST)
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bhagalpur news.सोमवार की रात होलिका दहन व बुधवार को मनेगा होली रंगोत्सव

पंचांग के अनुसार हर साल होली का त्योहार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. प्रतिपदा तिथि चार मार्च तक है. ऐसे में होली चार मार्च को मनायी जायेगी.

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फाल्गुन पूर्णिमा का पर्व होली इस बार एक अनोखे खगोलीय संयोग के साथ मनेगी. होली की तिथि को लेकर लोग उहापोह की स्थिति में हैं. देश के अलग-अलग राज्य में अलग-अलग दिन होली मनायी जायेगी. राजस्थान, मध्यप्रदेश में दो को होलिका दहन व तीन को रंगोत्सव होगा. जबकि बिहार व झारखंड में तीन को होलिका दहन व चार को होली पर रंगोत्सव मनाया जायेगा. पंचांग के अनुसार हर साल होली का त्योहार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. प्रतिपदा तिथि चार मार्च तक है. ऐसे में होली चार मार्च को मनायी जायेगी. होली का शुभ मुहूर्त ज्योतिषाचार्यों की मानें तो रंगों की होली और आकाशीय घटना चंद्रग्रहण का मेल भक्तों और ज्योतिष प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखेगा. काशी पंचांग के अनुसार चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ तीन मार्च मंगलवार को संध्या 4:33 बजे से है, जबकि चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि समाप्त चार मार्च बुधवार को संध्या 04:15 बजे तक होगा. अमृत सर्वोत्तम समय चार मार्च बुधवार को सुबह 06:33 बजे से 07:55 बजे तक है. शुभ उत्तम समय चार मार्च बुधवार को सुबह 09:18 बजे से 10:41 बजे तक है. होली पर चंद्रग्रहण और सूतक का प्रभाव पंडित सौरभ मिश्रा ने बताया कि होलिका दहन के ठीक अगले दिन होली का पर्व मनाया जाता है. लेकिन इस बार होलिका दहन के ठीक अगले दिन यानी तीन मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. तीन मार्च को चंद्रग्रहण और सूतक काल होने के कारण उस दिन होली खेलना संभव नहीं होगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के दौरान शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं. ग्रहण का सूतक सुबह से ही शुरू हो जायेगा. ऐसे में रंगोत्सव होली चार मार्च मनाना शुभ रहेगा. ज्योतिषाचार्य दीपक पाठक सारस्वत ने बताया कि इस बार दो व तीन मार्च को होलिका दहन होगा. भद्रापुच्छ मध्यरात्रि 12:50 बजे है. इस दौरान ही होलिका दहन होगा. ऐसे में यह तीन मार्च का मान रहा. तीन मार्च को प्रात: 6: 20 बजे ग्रहण का सूतक प्रारंभ होगा, जो दोपहर 3:20 बजे तक सूतक रहेगा. उसके बाद चंद्रग्रहण प्रारंभ हो जायेगा. संध्या 7:05 बजे तक रहेगा. इस दिन रंगोत्सव नहीं होगा. पंडित शंकर मिश्रा ने बताया कि होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल की प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित वेला में करना शास्त्रोक्त बताया गया है. इस साल फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी दो मार्च सोमवार को संध्या 5: 56 बजे पूर्णिमा प्रारंभ होगी, जो अगले दिन तीन मार्च मंगलवार को संध्या 5:08 बजे तक रहेगी. ऐसे में प्रदोषकाल में पूर्णिमा दो मार्च सोमवार को ही होने से होलिका दहन होगा. इस दिन भद्रा सायं 5 बजकर 56 मिनट से अन्तरात्रि 5 बजकर 32 मिनट तक है. होलिका पर्व में यदि भद्रा अर्द्धरात्रि को पार करके उषाकाल तक पहुंच जाती है, तो भद्रा युक्त प्रदोष काल में होलिका दहन करना चाहिए.

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NISHI RANJAN THAKUR

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By NISHI RANJAN THAKUR

NISHI RANJAN THAKUR is a contributor at Prabhat Khabar.

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