bhagalpur news.पीएम कार्यालय के हस्तक्षेप से सेमापुर घाट को विकसित करने के लिए सुनवाई 11 को

Updated at : 08 Apr 2025 9:33 PM (IST)
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bhagalpur news.पीएम कार्यालय के हस्तक्षेप से सेमापुर घाट को विकसित करने के लिए सुनवाई 11 को

सेमापुर घाट को विकसित करने के लिए सुनवाई 11 अप्रैल को.

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– चंपानगर निवासी कपिलदेव प्रसाद ने प्रधानमंत्री को लिखा था पत्र, लोक शिकायत निवारण भागलपुर में होगी सुनवाई

वरीय संवाददाता, भागलपुर

नाथनगर के चंपानगर स्थित सेमापुर घाट को विकसित करने की आस अब जगने लगी है. 11 अप्रैल को बिहार लोक शिकायत निवारण भागलपुर मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करेगा. इस ऐतिहासिक घाट के विकास की मांग को लेकर चंपानगर निवासी कपिलदेव प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था. प्रधानमंत्री कार्यालय ने मामले को बिहार सरकार के पास भेजा था. इसके बाद बिहार सरकार के प्रधान सचिव ने मामले को लोक शिकायत निवारण कार्यालय को भेज दिया. सुनवाई के दौरान सेमापुर घाट के विकास का प्रस्ताव तैयार करने के लिए बिहार सरकार को निर्देश दिया जायेगा. कपिलदेव प्रसाद ने बताया कि मांग पत्र को प्रधानमंत्री के अलावा गृहमंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री समेत स्थानीय नगर निगम प्रशासन के पास भेजा गया था. गृह मंत्रालय ने भी राज्य सरकार से संपर्क कर आवेदन पर काम शुरू करने का आश्वासन फोन के माध्यम से दिया है.

महासती बिहुला व मंजूषा से जुड़ा है सेमापुर घाट का इतिहास : अंग महाजनपद की राजधानी चंपा का वर्तमान स्वरूप नाथनगर का चंपानगर है. यहां बहने वाली चंपा नदी के किनारे सेमापुर घाट अंग क्षेत्र का धरोहर है, इसे बचाने की जरूरत है. सदियों पहले चंपा के विश्व प्रसिद्ध सिल्क व्यापारी चंद्रधर सौदागर सेमापुर घाट का छोटे बंदरगाह के रूप में प्रयोग करते थे. यहां से देश व दुनिया में सिल्क कपड़े को नाव व जहाज के माध्यम से निर्यात करते थे. चंद्रधर के बेटे बाला के शव के साथ मंजूषा में बैठकर महासती बिहुला सेमापुर घाट से ही स्वर्ग की ओर प्रस्थान की थी. लिखित साक्ष्य के अनुसार सेमापुर घाट पर मां विषहरी की प्रतिमा विसर्जन के लिए 1632 इस्वीं में तत्कालीन शासन से आदेश मिला था.

भगवान वासुपूज्य की जीवनी से भी जुड़ा है घाट : सेमापुर घाट के पास जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का मंदिर है. सेमापुर घाट से भगवान वासुपूज्य की जीवनी जुड़ी है. जैन संप्रदाय के अनुयायी देशभर से यहां सालों भर हजारों की संख्या में आते हैं. लेकिन मंदिर के निकट सेमापुर घाट की हालत देखकर काफी निराश होते हैं. सेमापुर के सामने प्राचीन भगवान जगन्नाथ का मंदिर है. इस मंदिर की स्थापना एक हजार साल पहले रामानंद संप्रदाय के साधु संन्यासियों ने किया था.

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