Bhagalpur news श्रीमद् भागवत कथा को लेकर भव्य कलश शोभायात्रा

Published by :JITENDRA TOMAR
Published at :28 Apr 2026 12:49 AM (IST)
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Bhagalpur news श्रीमद् भागवत कथा को लेकर भव्य कलश शोभायात्रा

सुलतानगंज नगर परिषद वार्ड पांच स्थित जयनगर मोहल्ले में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के शुभारंभ को लेकर सोमवार को भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली गयी.

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सुलतानगंज नगर परिषद वार्ड पांच स्थित जयनगर मोहल्ले में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के शुभारंभ को लेकर सोमवार को भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली गयी. कथा स्थल भगवती स्थान, जयनगर से महिलाओं एवं कन्याओं ने मिट्टी का कलश लेकर नमामि गंगे घाट पहुंच कर पवित्र गंगा में स्नान किया. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में गंगा जल भरकर श्रद्धालु पैदल कथा स्थल पहुंचे, जहां विधि-विधान से कलश स्थापित किया गया. कलश यात्रा में आचार्य अशोक मंडल श्रद्धालुओं के साथ मौजूद रहे. रथ पर सवार वृंदावन से पधारी कथा वाचिका प्रीति किशोरी जी महाराज ने शोभा यात्रा की शोभा बढ़ायी. शोभायात्रा के उपरांत संध्या में कथा वाचिका ने ज्ञान, वैराग्य, भक्ति तथा गोकर्ण-धुंधकारी प्रसंग पर विस्तार से कथा का रसपान कराया, जिसे सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे. भगवान श्री गणेश की आकर्षक झांकी निकाली गयी. कलश शोभायात्रा और कथा कार्यक्रम में काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया.

श्रीमद्भागवत में ध्रुव जी के वंश व भगवान विष्णु के अवतारों की कथा

कहलगांव देवीपुर स्थित शिव मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचिका पूर्ति किशोरी ने श्रद्धालुओं को ध्रुव जी के वंश में राजा वेन के जन्म और उनके अत्याचारों से दुखी पिता के वन गमन की कथा विस्तार से वर्णित की. उन्होंने बताया कि दुष्ट राजा वेन की मृत्यु के पश्चात ऋषियों ने उनके मृत शरीर की भुजाओं का मंथन किया, जिससे एक दिव्य जोड़ा प्रकट हुआ. पुरुष रूप में महाराज पृथु थे, जो भगवान विष्णु के अंश थे और स्त्री जो महारानी अर्चि थीं. उन्होंने प्रजा को धर्म का उपदेश दिया. प्रहलाद जी पर भगवान की कृपा हुई और उन्होंने अपने पिता हिरण्यकश्यप को उपदेश दिया. अजामिल की कथा में, अजामिल ने अनजाने में भगवान का नाम लिया और भगवान ने उस पर कृपा की. त्रेतायुग में भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को माता अदिति और कश्यप ऋषि के पुत्र के रूप में भगवान बामन का प्राकट्य हुआ था, जिसे वामन द्वादशी कहा जाता है. उन्होंने असुर राजा बलि के छीने गये स्वर्ग को देवताओं को वापस दिलाने के लिए एक छोटे ब्राह्मण बालक के रूप में जन्म लिया. यह अवतार बक्सर बिहार के सिद्धाश्रम में हुआ था, जहां उन्होंने 52 अंगुल का रूप धारण किया. भगवान के मोहिनी रूप धारण करने और देवताओं को अमृत पान कराने, समुद्र मंथन से 14 रत्न निकालने सहित भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया और भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के प्राकट्य की कथा सुन कर श्रोता भावविभोर हो गये. मौके पर अरुण राम, मृत्युंजय कुमार, दिवाकर सिंह, कल्पना देवी, आशीष कुमार, दिलीप कुमार, विनीत कुमार, राकेश कुमार, विश्वजीत सिंह, कुंदन कुमार, उदय कुमार उपस्थित थे.

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