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bhagalpur news. महाशय ड्योढ़ी, सूजापुर व सन्हौला के पाठकडीह में दुर्गापूजा आज से, 18 दिनों तक पूजन

Updated at : 14 Sep 2025 10:42 PM (IST)
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bhagalpur news. महाशय ड्योढ़ी, सूजापुर व सन्हौला के पाठकडीह में दुर्गापूजा आज से, 18 दिनों तक पूजन

महाशय ड्योढ़ी में आज से दुर्गापूजा.

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– आज बांग्ला विधि-विधान से होगी कलश की स्थापना, गाजे-बाजे के साथ गंगा तट पर भरा जायेगा पहला बोधनमहाशय ड्योढ़ी, सूजापुर व सन्हौला पाठकडीह में दुर्गापूजा की तैयारी पूरी हो गयी. यहां सोमवार को जिउतिया पारण के साथ मां दुर्गा की पूजा शुरू हो जायेगी, जो 18 दिनों तक चलेगी. बांग्ला विधि-विधान से कलश स्थापित की जायेगी. इसे लेकर गाजे-बाजे के साथ गंगा तट पर कलश में जल भरा जायेगा और दुर्गा स्थान में विधि-विधान से स्थापित किया जायेगा. अर्थात पहला बोधन घट भरा जायेगा.

500 साल पुराना है महाशय ड्योढ़ी दुर्गा पूजा का इतिहास

नाथनगर में एक बोल प्रचलित है, काली है कलकत्ते की और दुर्गा है महाशय ड्योढ़ी की. महाशय ड्योढ़ी दुर्गा मंदिर में आज भी लगभग पांच सौ साल से बांग्ला विधि विधान से पूजा होती है. इस साल 15 सितंबर को पहला बोधन घट भरा जायेगा. बोधन घट भरने के दिन बंगाली परिवार सुबह में मां दुर्गा के पूजा-अर्चना कर देवी को अपने घर बुलाने के लिए स्वागत करेंगे. दुर्गापूजा पहले दिन की शुरुआत यहीं से हो जाती है. बंगाली टोला वार्ड एक की पूर्व पार्षद काकुली बनर्जी व उनके पति सामाजिक कार्यकर्ता देवाशीष बनर्जी ने बताया कि दुर्गा मंदिर से बोधन घट भरने के लिए महाशय तारकनाथ घोष ट्रस्ट के माध्यम से महाशय राज परिवार के साथ बंगाली परिवार व आसपास के काफी श्रद्धालु ढोल ढाक, तुतरू बाजा व शंख और घड़ीघंट की आवाज के साथ बंगाली टोला घाट पर पहुंचते हैं. बोधन घट को वहां से लाकर दुर्गा मंदिर में स्थापित किया जायेगा. इस दिन से सुबह-शाम लगातार मंदिर में दीया प्रज्वलित होने लगेगा.

हरेक बोधन घट पर लुटायी जायेगी कौड़ी

हरेक बोधन घट पर कौड़ी लुटायी जायेगी. पहला बोधन सोमवार 15 सितंबर और चौथी तिथि पर दूसरा बोधन घट भरा जायेगा. दुर्गा मंदिर में हर साल की तरह इस साल भी कुबेर धन कौड़ी लुटायी जायेगी. इस कौड़ी को लूट कर लोग घर के तिजोरी व सुहागिन सिंदूर के कीया में सहेज कर शगुन के रूप में रखते हैं.

हाथ में सिंदूर की थाप से शगुन-अपशगुन का कराती थीं आभास

महाशय ड्योढ़ी की मां दुर्गा के दरबार में मांगा गया वरदान खाली नहीं जाता है. महाशय राजपरिवार की रानी कृष्णा सुंदरी मां दुर्गा से साक्षात बात करती थीं. वह पालकी में दुर्गा मंदिर आती जाती थीं. इस दौरान उन्हें सिर्फ उसके पति ही देख पाते थे. देवाशीष बनर्जी ने बताया कि हमारे बड़े बुजुर्ग बताते थे मां दुर्गा को विदाई के दिन रानी कृष्णा देवी दोनों हाथों की हथेली से सिंदूर की थाप देकर शगुन अपशगुन की संदेश देती थी. वह मां दुर्गा से बात कर पूछती थी, मां बोलो कोई गलती हुई.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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KALI KINKER MISHRA

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By KALI KINKER MISHRA

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