प्रतिनिधि, कहलगांव
कहलगांव के सियां में सात दिनों तक चलने वाले श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का चौथे दिन वृंदावन से आये कथावाचक बाबा नवनाथ कृष्ण जी महाराज ने मंवंतर की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग इन चारों युगों को मिलाकर चतुर्युग होता है. 71 चातुर्युग में एक मंवंतर होता है. जिसमें मनु की आयु जो ब्रह्मा द्वारा सृजित किया जाता है, वो मनु विश्व की और सभी प्राणियों की उत्पत्ति करते हैं. आगे उन्होंने गजेन्द्रमोक्ष के बारे में बताते हुए कहा कि भगवान विष्णु जी गजेंद्र को जल प्राणी मगरमच्छ के चंगुल से बचाया और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई. वामनावतार, मत्स्यावतार, श्री रामावतार जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं. उन्हें धर्म और मर्यादा की स्थापना के लिए जाना जाता है. जिन्होंने असुरों का वध किया और धर्म की स्थापना की. अंत में उन्होंने श्री कृष्णावतार के बारे में बताते हुए कहा कि भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं जो कृष्ण वासुदेव और देवकी के पुत्र हैं. जो अपने प्रेम प्रकाश से प्रकाशित करने के लिए अवतरित हुए. वह श्री कृष्णावतार है. कथा का श्रवण करने के लिए बड़ी संख्या में आसपास से आए श्रद्धालु तथा आयोजन समिति के सदस्य मौजूद थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

